बंगाल के स्कूलों में नौकरियां समाप्त करने का फैसला गैर-न्यायोचित : ममता बनर्जी
वैभव माधव
- 25 Apr 2024, 08:28 PM
- Updated: 08:28 PM
केशियारी/तामलुक (पश्चिम बंगाल), 25 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 25,000 से अधिक स्कूली नौकरियों को निरस्त किये जाने को बृहस्पतिवार को ‘पूरी तरह अन्याय’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों को मतदान ड्यूटी में तैनात करने से रोकने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की साजिश है।
बनर्जी ने पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर लोकसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि इतने शिक्षकों को नौकरी से निकालने के बाद स्कूल कैसे काम कर सकते हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों में राज्य-स्तरीय चयन परीक्षा-2016 (एसएलटीएस) की भर्ती प्रक्रिया को इस सप्ताह की शुरुआत में निष्प्रभावी घोषित किया था और इसके माध्यम से की गई सभी भर्तियों को निरस्त करने का आदेश दिया था।
बनर्जी ने कहा, ‘‘अगर किसी ने गलती की है तो उसे सुधारा जा सकता है, लेकिन 25,000 नौकरियां छीन लेना पूरी तरह अन्याय है। अगर इतने सारे शिक्षक नौकरी पर नहीं रहेंगे तो स्कूलों में कैसे काम होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह भाजपा की साजिश है। मैं न्यायपालिका का सम्मान करती हूं, लेकिन जो कुछ हुआ वह पूरी तरह अन्याय है।’’
बनर्जी ने कहा कि देश में आजादी के बाद से बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा होने के बावजूद भाजपा नेता नौकरियां छीन रहे हैं।
बनर्जी ने कहा, ‘‘इतनी सारी नौकरियां ले ली गईं ताकि नौकरी गंवाने वाले इन लोगों को चुनाव के दौरान ड्यूटी पर तैनात नहीं किया जा सके और केंद्र सरकार के कर्मियों को लगाया जा सके जो भगवा खेमे के इशारे पर काम करेंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम नौकरियां दे रहे हैं। 10 लाख से अधिक नौकरियां तैयार हैं। लेकिन भाजपा अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नौकरियां छीन रही है। प्रशासन और शिक्षकों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है। हम उनका समर्थन करेंगे।’’
मेदिनीपुर लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के दिलीप घोष ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को हराया था।
हालांकि इस बार घोष को बर्द्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से उतारा गया है जहां भाजपा को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ रहा है।
ममता ने कहा, ‘‘भाजपा को जवाब देना होगा कि उसने इस सीट से अपने वर्तमान सांसद को दूसरी जगह से क्यों खड़ा किया है। क्या इसलिए कि उन्होंने कोई काम नहीं किया। अगर ऐसा है तो भाजपा को सार्वजनिक रूप से यह बात कहनी चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए।’’
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह संगठन देशभर में अत्याचार करने से भाजपा को नहीं रोक रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोचती थी कि आरएसएस त्यागी संगठन है, लेकिन अब वे भोगी बन गए लगते हैं। देशभर में अत्याचार की भाजपा की तैयारियों के बीच उनकी चुप्पी से यह बात पता चलती है।’’
मुख्यमंत्री ने तामलुक में एक दूसरी सभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली को आड़े हाथ लिया और आरोप लगाया कि उन्होंने ‘न्यायपालिका की छवि खराब कर दी है’।
उन्होंने कहा, ‘‘एक पूर्व न्यायाधीश, जो कई युवाओं की नौकरी खा गए, अब चाहते हैं कि मैं पद से उतर जाऊं।’’
बनर्जी ने चेतावनी दी कि यदि अगर बेरोजगार हुए 25,000 नौजवानों के साथ कुछ होता है तो तृणमूल कांग्रेस रैली निकालेगी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के घर की ओर कूच करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘पुरी के जगन्नाथ मंदिर जितना ही ऊंचा एक जगन्नाथ मंदिर का उद्घाटन जल्द ही दिघा में किया जाएगा जहां भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा संगमरमर की होगी।’’
बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संदेशखालि का मुद्दा बार-बार उठा रहे हैं, लेकिन उन्होंने गुजरात दंगों में, उत्तर प्रदेश के हाथरस में, मणिपुर में और अन्य भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं के अपमान पर आंखें मूंदे रखीं।
भाषा वैभव