प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विरासत कर’ पर कांग्रेस को घेरा, विपक्षी दल ने पित्रोदा के बयान से दूरी बनाई
हक पवनेश
- 24 Apr 2024, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
नयी दिल्ली/अंबिकापुर, 24 अप्रैल (भाषा) लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले ‘इंडियन ओवरसीज कांग्रेस’ के प्रमुख सैम पित्रोदा की ‘विरासत कर’ संबंधी टिप्पणी को लेकर बुधवार को सियासी बवंडर खड़ा हो गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वह लोगों की संपत्ति छीनना चाहती है और उसका मंत्र है- ‘कांग्रेस की लूट जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’।
कांग्रेस ने पित्रोदा के बयान से तत्काल दूरी बना ली और इसे उनकी व्यक्तिगत राय करार दिया। उसने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली, पूर्व वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा और भाजपा के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय की पूर्व की कुछ टिप्पणियों का हवाला देते हुए यह दावा भी किया कि ‘विरासत कर’ लागू करने का विचार असल में भाजपा का है।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि पित्रोदा की बातों को सनसनीखेज बनाकर पेश किया जा रहा है ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘दुर्भावनापूर्ण और नफरत से भरे’ चुनाव अभियान से ध्यान भटकाया जा सके।
पित्रोदा ने अमेरिका के ‘विरासत कर’ वाली व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा है, ‘‘अमेरिका में विरासत कर लगता है। अगर किसी के पास 10 करोड़ डॉलर की संपत्ति है और जब उसकी मृत्यु हो जाती है तो इसमें से केवल 45 फीसदी उसके बच्चों को मिल सकता है। शेष 55 प्रतिशत संपत्ति सरकार के पास चली जाती है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘ भारत में ऐसा कानून नहीं है। अगर किसी की संपत्ति 10 अरब रुपये है और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो उसके बच्चों को 10 अरब रुपये मिलते हैं और जनता को कुछ नहीं मिलता...लोगों को इस तरह के मुद्दों पर चर्चा करनी होगी। मुझे नहीं पता कि अंत में निष्कर्ष क्या होगा, लेकिन जब हम धन के पुनर्वितरण के बारे में बात करते हैं, तो हम नई नीतियों और नए कार्यक्रमों के बारे में बात कर रहे हैं जो लोगों के हित में हैं, न कि केवल अति-अमीरों के हित में हैं।’’
पित्रोदा की टिप्पणी पर जब विवाद शुरू हो गया तो उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मैंने टेलीविजन पर अपनी सामान्य बातचीत में उदाहरण के रूप में केवल अमेरिका में अमेरिकी विरासत कर का उल्लेख किया था। क्या मैं तथ्यों को नहीं रख सकता? मैंने कहा था कि लोगों को इस तरह के मुद्दों पर बातचीत और बहस करनी होगी। इसका कांग्रेस समेत किसी भी पार्टी की नीति से कोई लेना-देना नहीं है।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने पित्रोदा के बयान को लेकर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर की चुनावी सभा में कांग्रेस पर तीखे वार किए।
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस की नजर सिर्फ आपके आरक्षण पर नहीं, बल्कि आपकी कमाई, आपके मकान, दुकान और खेत-खलिहान पर भी है। कांग्रेस के 'शहजादा' (राहुल गांधी की ओर इशारा) कहते हैं कि वे हर संपत्ति का एक्स-रे कराएंगे। घर और देश के हर परिवार से कांग्रेस ये सब छीन लेगी। वे कहते हैं कि हम इन्हें समान रूप से वितरित करेंगे। क्या आप जानते हैं कि वे आपसे इसे "लूटने" के बाद किसे वितरित करेंगे?’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे आपको यह बताने की जरूरत नहीं है कि वे किसे वितरित करेंगे।"
मोदी ने कहा कि कांग्रेस के 'खतरनाक इरादे' एक-एक करके सामने आ रहे हैं और अब वह कहती है कि वह विरासत कर लगाएगी।
मोदी ने कहा, "वे (कांग्रेस) आपकी संपत्ति और आपके बच्चों के अधिकार छीनना चाहते हैं।"
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, ''कांग्रेस का मंत्र है- कांग्रेस की लूट जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास सत्ता के लालच में देश को बर्बाद करने का रहा है।
प्रधानमंत्री और भाजपा के तीखे प्रहार के बीच कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पित्रोदा के बयान को उनकी व्यक्तिगत राय करार दिया और पलटवार करते हुए कहा कि भारत में ‘विरासत कर’ वाली व्यवस्था लागू करने का विचार भाजपा एवं मोदी सरकार का है।
रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘विरासत कर लागू करने की कांग्रेस की कोई योजना नहीं है। वास्तव में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1985 में संपदा शुल्क को खत्म कर दिया था। दरअसल, यह मोदी सरकार ही है जो ऐसा करना चाहती है।’’
उनका कहना था, ‘‘पहला तथ्य: मोदी सरकार में वित्त राज्य मंत्री रहे जयंत सिन्हा ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह 2014 में विरासत कर को लागू करना चाहते थे। दूसरा तथ्य यह है कि 2017 में ऐसी खबरें सामने आईं कि मोदी सरकार विरासत कर को फिर से लागू करने जा रही है।’’
उन्होंने दावा किया, ‘‘तीसरा तथ्य है कि 2018 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विरासत कर की प्रशंसा करते हुए कहा था कि पश्चिमी देशों में इस तरह के कर से अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को काफी मात्रा में अनुदान मिलता है। चौथा तथ्य है कि ऐसी खबरें सामने आईं थीं कि मोदी सरकार केंद्रीय बजट 2019 में विरासत कर पेश करेगी।’’
रमेश ने कहा, ‘‘यह आप पर है प्रधानमंत्री जी - इस मुद्दे पर आपकी पार्टी का रुख क्या है?’’
उन्होंने एक बयान में यह भी कहा कि पित्रोदा की बातों को सनसनीखेज बनाकर पेश किया जा रहा है ताकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘दुर्भावनापूर्ण और नफरत से भरे’ चुनाव अभियान से ध्यान भटकाया जा सके।
उन्होंने कहा, ‘‘पित्रोदा जी मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं जिनके बारे में वह बोलना ज़रूरी समझते हैं। लोकतंत्र में एक व्यक्ति अपनी बात रखने, चर्चा करने और व्यक्तिगत विचारों को लेकर बहस करने के लिए निश्चित रूप से स्वतंत्र भी होता है।’’
रमेश के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि पित्रोदा जी के विचार हमेशा कांग्रेस के रुख को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कई बार उनके विचार अलग होते हैं। अब उनकी टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाकर दूसरे संदर्भ में पेश किया जा रहा है। ऐसा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दुर्भावना और नफरत से भरे चुनाव अभियान से ध्यान भटकाने के लिए जानबूझकर किया जा रहा है; जो सिर्फ़ और सिर्फ़ झूठ पर आधारित है।’’
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पित्रोदा के बयान को लेकर कांग्रेस पर प्रहार किया और कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी की विरासत कर लगाने की योजना से मध्य वर्ग और आकांक्षी वर्ग प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि अगर विरासत कर लगाया गया, तो ये वर्ग अपनी बचत अपने बच्चों को नहीं दे पाएंगे।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘‘सैम पित्रोदा ने कांग्रेस के नापाक मंसूबे को विस्तार से बताया है। हम बचत आधारित अर्थव्यवस्था हैं। भारत में (एक परिवार की) एक पीढ़ी कड़ी मेहनत करके कमाती है। दूसरी पीढ़ी उसे आगे बढ़ाती है और फिर तीसरी पीढ़ी को कुछ आराम मिलता है।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कांग्रेस लोगों से खुशी और शांति छीन लेना चाहती है। सैम पित्रोदा सोने पर कर लगाने की बात कर रहे हैं।’’
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘भारत में लोग बचत के रूप में सोना खरीदते हैं और गरीब लोग भी कहते हैं कि सोना होना चाहिए। और आप चाहते हैं कि उस (सोने) पर 45 प्रतिशत कर लगाया जाए।’’
भाषा संजीव हक
हक