महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने निम्न आय वर्ग पर केंद्रित नयी आवास नीति घोषित की
धीरज नेत्रपाल
- 20 May 2025, 07:20 PM
- Updated: 07:20 PM
मुंबई, 20 मई (भाषा) महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को एक नयी आवास नीति की घोषणा की जिसमें 70,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ झुग्गी पुनर्वास से लेकर पुनर्विकास तक की एक व्यापक योजना शामिल है। इस दौरान निम्न आय वर्ग और वहनीयता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि नीति का उद्देश्य ‘मेरा घर - मेरा अधिकार’ के तहत आम आदमी के लिए आवास मुहैया कराना है।
उन्होंने रेखांकित किया नीति में निम्न आय वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, औद्योगिक श्रमिकों और छात्रों को प्राथमिकता दी गई है।
नीति में झुग्गी पुनर्वास से लेकर पुनर्विकास तक का व्यापक कार्यक्रम शामिल है, जिसमें 70,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कामकाजी महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों के लिए किफायती और समावेशी आवास पर विचार किया गया है तथा किराये के आवास और भूमि बैंक बनाने के मुद्दों पर ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सभी हितधारकों और योजनाओं को एक ही पोर्टल ‘महा आवास’ पर लाया जाएगा। सरकारी भूमि का मानचित्रण किया जाएगा और उसे आवास के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। आवास की मजबूती एक महत्वपूर्ण कारक होगी और इसे आधुनिक तकनीक के साथ सुनिश्चित किया जाएगा। वर्ष 2007 के बाद, एक व्यापक और गतिशील सर्व-समावेशी नीति तैयार की गई है।’’
उन्होंने कहा कि ‘वर्टिकल स्लम’ (झुग्गी वालों के लिए बहुमंजिला इमारत) और एसआरए (स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी) भवनों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
फडणवीस ने रेखांकित किया कि नयी नीति में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की आवास आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है।
उपमुख्यमंत्री एवं राज्य के आवास विभाग को संभाल रहे एकनाथ शिंदे ने नयी नीति को ‘क्रांतिकारी’ करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किफायती घर उपलब्ध कराना और राज्य की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।
शिंदे ने सवांददाताओं से कहा कि इस नीति के माध्यम से महाराष्ट्र में आम नागरिकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए किफायती आवास का रास्ता साफ हो गया है।
उन्होंने कहा कि यह नीति राज्य में शहरी विकास और आवास क्षेत्र में बदलाव लाएगी। आवास मंत्री ने कहा कि प्रमुख क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश के प्रवाह से महाराष्ट्र के 2032 तक 1000 अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को काफी बढ़ावा मिलेगा।
शिंदे ने कहा, ‘‘मेरा घर - मेरा अधिकार’’ के नारे के साथ राज्य आवास नीति 2025 समाज के सभी वर्गों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए किफायती, टिकाऊ, समावेशी आवास उपलब्ध कराने में निर्णायक साबित होगी।
राज्य सरकार ने इन समूहों के लिए 2030 तक 35 लाख आवास बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें प्रत्येक वर्ग की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विशिष्ट प्रावधान किए गए हैं।
शिंदे ने नीति की विशेषताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों, कामकाजी महिलाओं, छात्रों, औद्योगिक श्रमिकों, पत्रकारों, दिव्यांगों और पूर्व सैनिकों की आवास आवश्यकताओं पर विचार किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके एक केंद्रीकृत राज्य आवास सूचना पोर्टल विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह आवास की मांग और आपूर्ति, आवास इकाइयों की जियो-टैगिंग, कोष वितरण, जिलेवार भूमि बैंक और महारेरा, महाभूलेख और पीएम गति शक्ति जैसे मंचों के साथ एकीकरण कर आंकड़ों का समन्वय करेगा।
नीति के तहत आवासीय उपयोग के लिए उपयुक्त सरकारी स्वामित्व वाले भूखंडों का एक भूमि बैंक बनाया जाएगा। राजस्व, वन, एमएसआरडीसी (महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम), एमआईडीसी(महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम) और जल संसाधन जैसे विभागों के समन्वय के माध्यम से 2026 तक इस राज्यव्यापी भूमि बैंक का विकास किया जाएगा।
नीति में रोजगार केंद्रों के पास, खास तौर पर औद्योगिक क्षेत्रों में, आवास विकसित करने पर जोर दिया गया है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘वॉक-टू-वर्क’ दृष्टिकोण के अनुरूप है। एमआईडीसी क्षेत्रों में उपयोगिता उद्देश्यों के लिए आरक्षित 20 प्रतिशत भूमि में से 10 से 30 प्रतिशत आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित की जाएगी।
भाषा धीरज