केरल : मलप्पुरम में बाघ ने हमला कर व्यक्ति को मार डाला
रंजन रंजन पवनेश
- 15 May 2025, 09:57 PM
- Updated: 09:57 PM
मलप्पुरम, 15 मई (भाषा) केरल के मलप्पुरम जिले के कालीकावु के पास बृहस्पतिवार को तड़के रबर के बागान में काम करने जा रहे एक श्रमिक को बाघ ने मार डाला। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस ने कहा कि पीड़ित के साथ मौजूद एक अन्य श्रमिक ने बताया कि जानवर ने गफूर (45) पर हमला किया और उसे घसीटकर ले गया।
श्रमिक की मौत को लेकर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन हुआ जिसके बाद सरकार ने पीड़ित परिवार को अधिक मुआवजा देने की घोषणा की।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जंगली जानवरों के हमले में जान गंवाने पर 10 लाख रुपये के मुआवजे के अलावा पीड़ित के परिजनों को चार लाख रुपये की अतिरिक्त राशि दी जाएगी और उसके परिवार के किसी सदस्य को नौकरी भी मिलेगी।
राज्य के वन मंत्री ए के ससींद्रन ने कहा कि मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) को निर्देश दिया गया है कि वे जांच करें कि क्या स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार वन अधिकारियों की ओर से कोई चूक हुई है या नहीं। उन्होंने कहा कि सीसीएफ को इस संबंध में रिपोर्ट देने को कहा गया है।
पुलिस ने बताया कि इससे पहले दिन में बाघ ने पीड़ित गफूर पर हमला किया और उसे घसीटकर ले गया। उसके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने यह दावा किया है।
वन विभाग के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि श्रमिक पर हमला करने वाला जानवर बाघ था और वो गफूर को लगभग 200 मीटर तक जंगल में घसीट कर ले गया।
अधिकारी ने यह भी पुष्टि की है कि गफूर के शरीर के विभिन्न हिस्सों पर काटने के निशान थे।
घटना के बाद स्थानीय लोग भारी संख्या में वहां एकत्र हो गए और शव को वहां से उठाने नहीं दिया। भीड़ ने वन विभाग पर घटना को रोकने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
लोगों ने टीवी चैनल को बताया कि वन अधिकारियों को कई महीने पहले ही इस क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली थी। उन्हें ये सूचना तब मिल गई थी जब बाघ यहां से घरेलू और पालतू जानवरों को ले जा रहा था।
निवासियों ने दावा किया, ‘‘इसके बाद भी वन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा भी नहीं लगाया।’’ उन्होंने बाघ को गोली मारे जाने की मांग की।
वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वन एवं जिला अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया कि जंगली जानवरों के हमलों की समस्या से निपटने के लिए कदम उठाए जाएंगे और पीड़ित परिवार को अपेक्षित वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिसके बाद गफूर के शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने दिया गया।
बाद में, ससींद्रन ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोगों की प्रतिक्रिया समझी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि परिवार को अंतिम संस्कार की व्यवस्था सहित सभी तरह की मदद दी जाएगी और बाघ को पकड़ने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ महीने पहले इलाके में बाघ की मौजूदगी की खबरें आई थीं और वन अधिकारियों ने बाघ की तलाश के लिए व्यापक खोज की थी, लेकिन कुछ नहीं मिला।
उन्होंने कहा, "इसके बाद बाघ की अनुपस्थिति में वन अधिकारियों की सतर्कता थोड़ी कम हो गई होगी। अब हम बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाने और कुमकी हाथियों (प्रशिक्षित बंदी हाथी) को तैनात करने सहित सभी कदम उठा रहे हैं।"
मंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने क्षेत्र के पुलिस, वन एवं अन्य अधिकारियों से बात की है तथा उन्हें ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, यह सुनिश्चित करने के लिए निवारक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने एक बयान में कहा कि वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा ने घटना के संबंध में क्षेत्र के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) से बात की और उनसे लोगों का डर दूर करने के लिए कदम उठाने को कहा।
घटना के बाद क्षेत्र का दौरा करने वाले कांग्रेस विधायक ए. पी. अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि उन्होंने क्षेत्र के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) और राज्य के वन मंत्री ए. के. ससींद्रन को बजट सत्र के दौरान ही यहां बाघ की मौजूदगी के बारे में सूचित किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान मामले में वन अधिकारियों की ओर से गंभीर चूक हुई है, क्योंकि उन्हें दो महीने से अधिक समय पहले क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के बारे में पता था।’’
स्थानीय लोगों के विरोध के बाद, एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि बाघ का पता लगाने तथा उसे पकड़ने के लिए ‘कुमकी’ हाथियों एवं ट्रैंक्विलाइज़र के साथ दो टीमें वायनाड और पलक्कड़ से रवाना हुई हैं।
उन्होंने घटना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे स्थानीय निवासियों से कहा, "हमें इस मामले में सभी के सहयोग की आवश्यकता है।"
इससे पहले कांग्रेस विधायक ने कहा था कि वह मंत्री से आग्रह करेंगे कि पीड़ित परिवार को सामान्यतः दी जाने वाली 10 लाख रुपये की राशि से अधिक मुआवजा दिया जाए तथा गफूर की पत्नी को तत्काल नौकरी दी जाए।
भाषा रंजन रंजन