छोटा उदयपुर सीट से भाजपा-कांग्रेस के राठवा समुदाय के उम्मीदवार फिर से लड़ेंगे वर्चस्व की लड़ाई
प्रीति सिम्मी
- 22 Apr 2024, 01:35 PM
- Updated: 01:35 PM
(कुमार आनंद)
छोटा उदयपुर (गुजरात), 22 अप्रैल (भाषा) गुजरात की छोटा उदयपुर सीट पर राठवा जनजाति समुदाय से भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार इस बार लोकसभा चुनाव में फिर से आमने-सामने होंगे।
हालांकि समुदाय के दो प्रमुख नेता कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हो गए हैं लेकिन कांग्रेस को इस सीट पर अपने जीतने की उम्मीद है, वहीं भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) का भी मानना है कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई विकास और कल्याण योजनाओं के कारण ‘‘लोगों को मिले लाभ’’ की बदौलत इस सीट पर दोबारा से विजयी होगी।
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि उनके उम्मीदवार को ‘इंडियन नेशनल डेवलेपमेंटल इन्क्लूसिव एलायंस’ (इंडिया) के घटक दल आम आदमी पार्टी (आप) के समर्थन से भी फायदा होगा क्योंकि इससे भाजपा विरोधी मत विभाजित नहीं होंगे।
छोटा उदयपुर सीट से कांग्रेस ने इस बार पूर्व विधायक सुखराम राठवा को उम्मीदवार बनाया है, जहां उनका मुकाबला भाजपा के पूर्व सरपंच जसु राठवा से होगा। भाजपा ने मौजूदा सांसद गीताबेन राठवा को इस बार टिकट नहीं दिया।
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 से पहले, 10 बार के विधायक मोहनसिंह राठवा कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गये थे और उनके बेटे राजेंद्र राठवा ने उदयपुर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीता।
लोकसभा के पांच बार सदस्य रह चुके और तत्कालीन राज्यसभा सदस्य नारण राठवा इस साल 27 फरवरी को कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो गये थे।
सुखराम राठवा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ''कांग्रेस पर इसका कुछ असर नहीं पड़ेगा। जो लोग भाजपा में शामिल हुए हैं, वे अपनी मर्जी से गए और उनके कोई भी समर्थक उनके साथ नहीं गए। ''
उन्होंने कहा, ''वे कांग्रेस के लिए काम नहीं कर रहे थे, बल्कि भाजपा के लोगों की मदद कर रहे थे। मुझे जीत का भरोसा है।''
जसु राठवा ने भी कहा कि उन्हें जनता का भारी समर्थन मिल रहा है।
जसु ने 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मोहनसिंह राठवा के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
उन्होंने दावा किया कि वह ‘‘5.5 लाख से अधिक मतों की बढ़त’’ के साथ जीतेंगे।
जसु ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रहित, राष्ट्र प्रेम, गरीबों तक पहुंचने और उन्हें गरीबी से बाहर निकालने की बात करते हैं।''
उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री आवास योजना और गरीबों को मुफ्त अनाज जैसी योजनाओं से लोगों को फायदा हुआ है।''
छोटा उदयपुर क्षेत्र में करीब 10 लाख जनजातीय मतदाताओं में से राठवा समुदाय की संख्या चार लाख है और शेष बारिया, ढोरकोली, भील, तड़वी, नायका और वसावा समुदायों से हैं।
इस क्षेत्र में दो लाख क्षत्रिय मतदाता हैं, जो इस क्षेत्र में दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है लेकिन वे परषोत्तम रूपाला की कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा से नाराज हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिमों की संख्या 1.22 लाख है।
हाल में कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व ‘आप’ नेता अर्जुन राठवा ने कहा कि उनका समुदाय एक प्रगतिशील समुदाय है जो न केवल संख्यात्मक रूप से बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी अन्य जनजातीय समूहों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
राठवा समुदाय के नेताओं ने 1977 से संसद में छोटा उदयपुर का प्रतिनिधित्व किया है।
अमरसिंह राठवा 1977, 1980 और 1984 में कांग्रेस के टिकट पर जीते थे।
नारण राठवा लगातार चार बार कांग्रेस से जीते, लेकिन 1999 में वह भाजपा के रामसिंह राठवा से हार गए थे। उन्होंने 2004 में पुन: जीत हासिल की, लेकिन 2009 और 2014 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
भाजपा की गीताबेन राठवा ने 2019 के चुनाव में कांग्रेस के रंजीतसिंह राठवा को हराया था। भाजपा ने 2022 के चुनावों में इस लोकसभा सीट के तहत सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता नारण राठवा ने दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार भी सीट बरकरार रखेगी।
गुजरात की सभी 26 लोकसभा सीट पर सात मई को मतदान होगा।
भाषा
प्रीति