डिजिटल क्रांति सरकारी सेवाओं में दक्षता, पारदर्शिता बढ़ाने के अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है: मिश्र
माधव वैभव
- 22 Apr 2024, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने सोमवार को कहा कि डिजिटल क्रांति सरकारी सेवाओं में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के अभूतपूर्व अवसर प्रदान करती है।
मिश्र ने ‘भारत की सिविल सेवा की क्षमता निर्माण आवश्यकता’ विषय पर केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान (सीटीआई) कार्यशाला को वर्चुअल रूप में संबोधित किया।
उन्होंने सिविल सेवा के लिए चयनित अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण के ढांचे में बदलाव की जरूरत बताई और कहा कि बदलते समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए क्षमता निर्माण पहल को पारंपरिक प्रशिक्षण संरचनाओं से आगे ले जाना होगा।
मिश्र ने कहा, ‘‘शासन प्रणाली का परिवर्तन तभी होगा, जब हर कर्मचारी तक सही रवैया और कौशल पहुंचेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ई-लर्निंग मंचों और आभासी कक्षाओं से लेकर ‘डेटा एनालिटिक्स’ व कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक, हमें अपने प्रशासनिक अधिकारियों को सशक्त बनाने और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को सुधारने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ उठाना चाहिए।’’
शुरुआत में, मिश्र ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आज भारत सामाजिक-आर्थिक विकास और विश्व की प्रमुख शक्ति बनने की अपनी यात्रा के एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान सुशासन, नागरिकों को केंद्र में रखने, भविष्य के लिए तैयार रहने और कार्य प्रदर्शन विस्तार पर है।
मिश्र ने कहा कि क्षमता निर्माण के समग्र दृष्टिकोण के मूल में नागरिकों को केंद्र में रखा जाना चाहिए और क्षमता निर्माण के प्रत्येक आयाम व घटक की प्रासंगिकता की पड़ताल; न केवल वर्तमान संदर्भ में, बल्कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्यों और दृष्टिकोण को भी ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि क्षमता निर्माण तंत्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशासनिक अधिकारी विकास की इस रूपरेखा में भागीदारी करने और इसमें योगदान देने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “आज के आकांक्षी भारत के लिए, सरकार को एक सुविधा प्रदाता बनना होगा। हमें नियामक की बजाय सहायक बनना होगा और इसके लिए गहरी जड़ें जमा चुकी मान्यताओं और दृष्टिकोणों को बदलना होगा। विशाल मानव संसाधन के संरक्षक के रूप में, भारत सरकार के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती है।”
मिश्र ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थान एक क्षमता निर्माण तंत्र को बनाने के विचार को साकार करने में सहायक हो सकते हैं जो विकसित भारत के दृष्टिकोण को मूर्त रूप प्रदान करे।
उन्होंने कहा, “उनमें से प्रत्येक शक्ति और विशेषज्ञता से लैस है, जो समूची नौकरशाही के लिए मूल्यवान हो सकते हैं। इसलिए, अधिक सामंजस्यपूर्ण क्षमता-निर्माण तंत्र बनाने की गुंजाइश बरकरार है। क्षमता-निर्माण संबंधी इस तंत्र को व्यवस्था-स्तरीय मजबूती की आवश्यकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अनेक सिविल सेवक आज असाधारण रूप से अच्छा कार्य कर रहे हैं, लेकिन क्षमता निर्माण के प्रति संस्थागत एवं सुविचारित दृष्टिकोण प्रत्येक सिविल सेवक को सफल होने और बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बना सकता है।”
मिश्र ने बताया कि क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) दक्षताओं को परिभाषित करने और समझने में सामंजस्य कायम करने के लिए एक स्वदेशी लोक मानव संसाधन प्रबंधन ढांचा "कर्मयोगी योग्यता मॉडल" विकसित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि योग्यता मॉडल के अतिरिक्त, ज्ञान का लोकतंत्रीकरण करने और इसे स्पष्ट रूप से साझा करने के लिए सीबीसी ‘अमृत ज्ञान कोष’ भी विकसित कर रहा है, जो ‘केस स्टडीज’ और अन्य सामग्री के रूप में संस्थानों में प्रशिक्षण के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सार्वजनिक प्रशासन के सर्वोत्तम तौर-तरीकों का भंडार होगा।
मिश्रा ने प्रशिक्षण संस्थानों को अपने प्रशिक्षण की रूपरेखा में गुणवत्तापूर्ण सुधार लाने की सलाह दी।
भाषा माधव वैभव