गाज़ीपुर ‘लैंडफिल’ पर आग लगने को लेकर आप-भाजपा में तकरार
नोमान वैभव
- 22 Apr 2024, 05:15 PM
- Updated: 05:15 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) पूर्वी दिल्ली के गाज़ीपुर ‘लैंडफिल’ स्थल (कचरा एकत्र करने की जगह) में लगी आग को लेकर सोमवार को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम आदमी पार्टी (आप) शासित दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर हमला किया।
आग लगने के बाद स्थानीय निवासी सांस लेने में परेशानी का सामना करने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।
दिल्ली की कैबिनेट मंत्री आतिशी ने कहा कि घटना के कारण का पता लगाने के लिए मामले की जांच की जाएगी।
पूर्वी दिल्ली में ‘लैंडफिल’ स्थल पर रविवार शाम भीषण आग लग गई। अधिकारियों ने बताया कि ऐसा अनुमान है कि गर्म और शुष्क मौसम के कारण गाजीपुर ‘लैंडफिल साइट’ में आग लगी है।
पुलिस के अनुसार, आग लगने के बाबत गाजीपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 336 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालना) और 278 (वातावरण को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनाना) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने गाजीपुर ‘लैंडफिल’ स्थल का सोमवार को दौरा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के "भ्रष्टाचार" का एक उदाहरण है।
महापौर शेली ओबेरॉय भी घटनास्थल पर गईं और उन्होंने कहा कि यह राजनीति का समय नहीं है।
उपमहापौर आले मोहम्मद इकबाल ने रविवार को घटनास्थल का दौरा किया था।
गाज़ीपुर लैंडफिल स्थल में भीषण आग लगने के कई घंटों बाद भी सोमवार को वहां से धुएं का घना गुबार आसमान की ओर उठता दिख रहा था।
कूड़े के ढेर का एक हिस्सा टूट जाने से ‘लैंडफिल’ से सटी टिन पैनल से बनी दीवार भी गिर गई। पोल्ट्री मार्केट की तरफ कई मीटर लंबी दीवार खड़ी की गई थी।
‘लैंडफिल’ स्थल के पास स्थित घड़ोली गांव के राम कुमार ने कहा, ‘‘आग लगे हुए 15 घंटे हो गए हैं। यह धुआं कोई आम धुआं नहीं है, यह बहुत जहरीला है। हम जलन के कारण अपनी आंखें खुली नहीं रख पा रहे हैं और सांस लेने में कठिनाई हो रही है।"
कई निवासियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि धुएं के कारण वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पा रहे हैं। उन्होंने एमसीडी और दिल्ली सरकार पर उन्हें बेहतर जीवन देने के लिए कोई कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया।
इलयास खान ने कहा, ‘‘15 साल हो गए है। मंत्री केवल चुनाव के दौरान हमारे पास आते हैं लेकिन उसके बाद उनमें से एक भी हमारे दरवाजे पर यह जानने के लिए नहीं आता कि हमें कोई समस्या है या नहीं। यह ‘लैंडफिल’ हमारे लिए एक अभिशाप है। हम हर दिन दुर्गंध झेलने को मजबूर हैं। और अब इस आग ने हमारे लिए कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर दी हैं। वे (मंत्री) क्यों चाहते हैं कि हम मर जाएं?’’
हृदय रोगी राकेश कुमार ने कहा कि उन्हें अपने रिश्तेदार के यहां जाना पड़ा क्योंकि वह अब और घुटन बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। उन्होंने कहा, "और यह केवल मेरी स्थिति नहीं है, कई लोग इसी कारण से अपना घर छोड़ रहे हैं।"
एक अन्य निवासी बिल्किस ने कहा कि ‘लैंडफिल’ अभी भी वहीं है जहां वह था क्योंकि नेताओं ने कभी भी अपने वादों को पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा, "अब वे फिर से यहां आएंगे और सिर्फ वोट लेने के लिए अपनी चिंता दिखाएंगे। कुछ नहीं होगा।"
महफूज ने कहा कि जब उन्होंने लगभग 20 साल पहले इस क्षेत्र में एक मकान खरीदा था, तो ‘लैंडफिल’ इतना बड़ा नहीं था। उन्होंने कहा, " इतने बड़े कूड़े के ढेर जैसा कुछ नहीं था। सरकार कोई उचित समाधान क्यों नहीं ढूंढ पा रही है? धुएं के कारण हम अपने बच्चों को स्कूल भी नहीं भेज पा रहे हैं।"
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2022 के एमसीडी चुनाव से पहले 31 दिसंबर 2023 तक ‘लैंडफिल’ स्थल को साफ करने का वादा किया था। इसके बावजूद कूड़े का पहाड़ बढ़ता ही जा रहा है।
साल 2019 में गाज़ीपुर ‘लैंडफिल’ की ऊंचाई 65 मीटर थी, जो कुतुब मीनार से सिर्फ आठ मीटर कम थी।
साल 2017 में ‘लैंडफिल’ से कचरे का एक हिस्सा बगल की सड़क पर गिर गया था, जिससे दो लोगों की मौत हो गई।
भाषा नोमान