पूर्व आईएएस अधिकारी प्रदीप शर्मा की जमानत याचिका पर न्यायालय ने गुजरात सरकार से जवाब मांगा
सुभाष रंजन
- 22 Apr 2024, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में कच्छ का जिलाधिकारी रहने के दौरान मौद्रिक लाभ के लिए सरकारी भूमि का कथित अवैध आवंटन करने के मामले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रदीप शर्मा की जमानत याचिका पर सोमवार को राज्य सरकार से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया और चार सप्ताह में जवाब देने को कहा।
शर्मा की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने कहा, ‘‘मैं राज्य का सामान्य फरियादी व्यक्ति हूं, जो मामले में राहत का अनुरोध कर रहा है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘ठीक है, हम नोटिस जारी कर रहे हैं।’’
शर्मा ने मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को 20 मार्च को चुनौती दी थी।
अदालत ने कहा था कि वह इस तथ्य को देखते हुए शर्मा को जमानत देने की इच्छुक नहीं है कि उनके खिलाफ इसी तरह के अपराधों में कई प्राथमिकी दर्ज हैं।
शर्मा के खिलाफ कच्छ में राज्य आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने आपराधिक विश्वासघात, कानून के निर्देशों का पालन करने में लोकसेवक की अवज्ञा एवं आपराधिक साजिश संबंधी भारतीय दंड संहिता की प्रासंगिक धाराओं और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
भूमि आवंटन मामले में शर्मा न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला सीआईडी (अपराध) ने पिछले साल सितंबर में कच्छ जिले के भुज में दर्ज किया था।
इस बीच, भूमि आवंटन मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की मांग करने वाली उनकी याचिका खारिज करने संबंधी उच्च न्यायालय के 31 जनवरी के आदेश के खिलाफ शर्मा की एक अन्य अपील में, शीर्ष अदालत की पीठ ने राज्य सरकार से अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
कामत ने कहा कि 11 मार्च को अदालत ने अपील में, एक नोटिस जारी किया था और उन्होंने आशंका जताई थी कि मामले में शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
कामत ने कहा, ‘‘बिल्कुल, यही हुआ। एक प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें एक नये मामले में गिरफ्तार किया गया।’’
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और उन्हें याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।
इसके बाद, पीठ ने राज्य सरकार को शर्मा के दूसरे मामले में अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी, जिसमें उच्च न्यायालय के 31 जनवरी के फैसले को चुनौती दी गई थी।
शर्मा के खिलाफ भूमि के अवैध आवंटन के मामले में कई प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं।
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