चंपक पत्रिका और चंपक रोबोट कुत्ता: प्रकाशक की याचिका पर अदालत का बीसीसीआई को नोटिस
धीरज मनीषा
- 30 Apr 2025, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को बच्चों की प्रसिद्ध पत्रिका ‘चंपक’ की याचिका पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से जवाब तलब किया।
याचिका में आईपीएल के दौरान बीसीसीआई द्वारा अपने एआई रोबोट कुत्ते का नाम ‘चंपक’ रखने पर ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि चंपक हमेशा से एक मौजूदा ब्रांड नाम रहा है। उन्होंने बीसीसीआई को चार सप्ताह के भीतर याचिका के जवाब में अपना लिखित बयान दाखिल करने को कहा। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को तय की है।
याचिकाकर्ता के वकील ने सुनवाई के दौरान अदालत से अनुरोध किया कि प्रतिवादियों को उस ‘नाम’ का उपयोग न करने का निर्देश देकर उनके मुवक्किल को अंतरिम संरक्षण प्रदान किया जाए। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया।
यह याचिका दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर की गई है, जो 1968 से चंपक पत्रिका का प्रकाशन कर रहा है। आईपीएल का 18वां सत्र अभी चल रहा है और 25 मई 2025 को समाप्त होगा।
एक मैच के दौरान बीसीसीआई और आईपीएल ने 20 अप्रैल को एआई प्रौद्योगिकी से लैस रोबोट कुत्ते को पेश किया, जिसका नाम ‘चंपक’ रखा गया है।
प्रकाशक की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अमित गुप्ता ने दलील दी कि रोबोट कुत्ते का नाम ‘चंपक’ रखना उसके पंजीकृत ट्रेडमार्क का उल्लंघन है और साथ ही इसका व्यावसायिक दोहन भी है, क्योंकि चंपक एक प्रसिद्ध ट्रेडमार्क है।
उन्होंने कहा कि आईपीएल मैचों के दौरान मनोरंजन के लिए ‘चंपक’ (रोबोटिक कुत्ता) को प्रदर्शित किया गया, जिससे वादी को अपूरणीय क्षति हुई, क्योंकि इससे उसके सुस्थापित ब्रांड को नुकसान पहुंचा, उसकी साख पर आंच आई और वह अनुचित रूप से समृद्ध हुआ। आईपीएल मैचों का प्रसारण देश भर में 20 करोड़ से अधिक दर्शकों के लिए किया जाता है।
याचिका में कहा गया है, ‘‘इससे छवि को कमजोर करने के साथ ही दशकों से वादी द्वारा कड़ी मेहनत से बनाई गई विशिष्टता और सकारात्मक सार्वजनिक धारणा को नुकसान पहुंचा है।’’
बीसीसीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जे साई दीपक ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चंपक एक फूल का नाम है और लोग रोबोट कुत्ते को पत्रिका से नहीं बल्कि एक टीवी श्रृंखला के एक पात्र से जोड़ रहे हैं।
अधिवक्ता मानसी कुकरेजा, क्षितिज वैभव और मुस्कान नागपाल के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली का घर का नाम ‘चीकू’ है और एक साक्षात्कार में उन्होंने स्वयं खुलासा किया था कि उनका घर का नाम ‘चंपक’ पत्रिका में छपने वाले एक चरित्र के आधार पर रखा गया था।
इसमें कहा गया है, ‘‘सभी तरह के लोग चंपक शब्द की पहचान विशेष रूप से वादी और उसकी पत्रिकाओं तथा उन पशु पात्रों से करते हैं, जो पत्रिका का केंद्र बिंदु होते हैं। यह दोहराया जाता है कि विराट कोहली का घरेलू नाम, जो कि चीकू है, भी वादी की पत्रिका के पात्र चंपक पर आधारित है।’’
इसपर न्यायाधीश ने कहा कि प्रकाशक ने कोहली के खिलाफ उनके घरेलू नाम के कारण कार्यवाही करने का निर्णय नहीं लिया, जो चंपक पत्रिका के एक पात्र पर आधारित है।
न्यायमूर्ति बनर्जी ने सवाल किया, ‘‘आपको इसके बारे में कब पता चला? यह चंपक का एक पात्र है। लेकिन आपने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की, आपने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की।’’
इस पर वकील ने कहा कि कॉमिक बुक या किसी टीवी सीरीज या फिल्म के किसी विशेष पात्र के आधार पर लोग आमतौर पर अपने प्रियजनों को उपनाम देते हैं।
गुप्ता ने कहा, ‘‘आज मेरा मुद्दा चंपक शब्द के प्रयोग को लेकर है, जो मेरा पंजीकृत ट्रेडमार्क है।’’
अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि उल्लंघन का आरोप किस प्रकार लगाया गया है, तो वादी के वकील ने दलील दी कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) एक वाणिज्यिक उपक्रम है तथा यह विज्ञापन, विपणन और कमाई करती है।
प्रकाशक ने अदालत से बीसीसीआई और आईपीएल को अपने ट्रेडमार्क का उल्लंघन करने से रोकने का आग्रह किया और अपने ट्रेडमार्क को होने वाले नुकसान के एवज में दो करोड़ रुपये का हर्जाना दिलाने की मांग की है।
भाषा धीरज