लोकतांत्रिक राजनीति वैश्विक स्तर पर मौलिक रूप से बदल गई है : राहुल गांधी
आशीष पवनेश
- 26 Apr 2025, 09:54 PM
- Updated: 09:54 PM
(फोटो के साथ)
हैदराबाद, 26 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि दुनिया भर में लोकतांत्रिक राजनीति मौलिक रूप से बदल गई है और एक दशक पहले जो नियम लागू थे, वे अब मान्य नहीं हैं।
तेलंगाना में कांग्रेस नीत सरकार द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘‘भारत समिट 2025’’ को संबोधित करते हुए गांधी ने उन कारणों के बारे में बात की, जिसने उन्हें ‘भारत जोड़ो यात्रा’ शुरू करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पार्टी एक ऐसे राजनीतिक माहौल में ‘‘फंसी और अलग-थलग’’ महसूस कर रही थी, जहां उसे अब स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति नहीं है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि पूंजी, मीडिया और सोशल मीडिया के आधुनिक गठजोड़ के खिलाफ राजनीति के पारंपरिक साधन अब प्रभावी नहीं हैं।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व का पुराना मॉडल अब अप्रचलित हो चुका है और एक नए तरह का नेतृत्व गढ़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि असली चुनौती लोकतांत्रिक स्वरूप की बहाली और स्वास्थ्य सेवा जैसी प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की है।
गांधी ने कहा, ‘‘कुछ साल पहले, हम कांग्रेस पार्टी में पूरी तरह से फंसे हुए और अलग-थलग महसूस करते थे। यह नयी राजनीति आक्रामक किस्म की राजनीति है। यह ऐसी राजनीति है जिसमें विपक्ष से बात नहीं की जाती, बल्कि विपक्ष को कुचलने का विचार है। हमने पाया कि हमारे सभी रास्ते बंद हो गए थे। मीडिया, सामान्य माहौल ने हमें उस तरह से काम करने की अनुमति नहीं दी, जैसा हम चाहते थे।’’
उन्होंने कहा कि इसका मुकाबला करने के लिए कांग्रेस ने अतीत पर गौर किया और कन्याकुमारी से कश्मीर तक लगभग 4,000 किलोमीटर की यात्रा शुरू करने का निर्णय लिया।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मैंने उस यात्रा से दो बातें सीखीं। दुनिया भर में विपक्ष को क्रोध, भय और घृणा का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा कोई तरीका नहीं है जिससे हम क्रोध, भय और घृणा के मामले में उनसे प्रतिस्पर्धा कर सकें। वे हमसे आगे निकलने वाले हैं...इसलिए, सवाल यह है कि हम कहां और कैसे काम करते हैं। वे स्थान कहां हैं जहां से हम एक जवाबी विमर्श तैयार कर सकें।’’
‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान अपने अनुभवों को याद करते हुए गांधी ने कहा कि उन्हें एहसास हुआ कि नेता लोगों की आवाज समझने में विफल रहे हैं।
राहुल गांधी ने अपना नारा ‘नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान’ को याद करते हुए कहा कि उनके लिए दूसरा गहन एहसास प्रेम की ताकत के बारे में था।
प्रेम और सद्भाव फैलाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए गांधी ने कहा, ‘‘कोई चाहे कितनी भी नफरत फैलाए, उसे रोकने का सबसे शक्तिशाली तरीका उसके साथ बहस करना नहीं है, बल्कि उसकी नफरत के ठीक सामने प्रेम और स्नेह का विचार रखना है।’’
उन्होंने कहा कि नीतिगत मामलों पर हमेशा असहमति रहेगी और कुछ लोग क्रोध और भय के चश्मे से काम कर सकते हैं, लेकिन प्रगतिशील ताकतों को दुनिया को प्रेम, स्नेह और सहानुभूति के चश्मे से देखना चाहिए।
उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर भारत के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कार्यक्रम के प्रतिनिधियों को धन्यवाद दिया।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने अपनी सरकार द्वारा शुरू किए गए विकास और कल्याण कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला, जिसमें कृषि ऋण माफी, किसानों को 24 घंटे मुफ्त बिजली, किसानों को 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस और ‘यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी’ शामिल हैं।
अपने संबोधन में, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने कहा कि प्रगतिशील राजनीति कोई विलासिता नहीं है।
वैश्विक न्याय, समानता और प्रगतिशील सहयोग पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देने पर केंद्रित दो दिवसीय सम्मेलन ‘भारत समिट’ शुक्रवार को शुरू हुआ।
भाषा आशीष