युद्ध के समय तीर्थंकरों की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो गई हैं : प्रधानमंत्री मोदी
आशीष नरेश
- 21 Apr 2024, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में छिड़े युद्ध के समय तीर्थंकरों की शिक्षाएं और भी प्रासंगिक हो गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत विभाजित दुनिया में ‘विश्व-बंधु’ के रूप में अपनी जगह बना रहा है।
मोदी ने यहां भगवान महावीर के 2,550वें निर्वाण महोत्सव के अवसर पर कहा कि भारत दुनिया के सामने मौजूद समस्याओं के समाधान के तौर पर सच्चाई एवं अहिंसा के मंत्रों को आत्मविश्वास के साथ पेश कर रहा है और उसकी सांस्कृतिक छवि भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर एक स्मृति डाक टिकट और एक सिक्का भी जारी किया और जैन समुदाय को उनके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद दिया।
पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने 2014 में सत्ता में आने पर ऐसे समय में विरासत के साथ-साथ भौतिक विकास को बढ़ावा देने पर जोर दिया जब देश निराशा में डूबा हुआ था।
मोदी ने अपनी सरकार द्वारा योग और आयुर्वेद जैसी भारतीय विरासत को बढ़ावा दिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि देश की नयी पीढ़ी अब मानती है कि स्वाभिमान ही उसकी पहचान है।
स्कूली बच्चों द्वारा भगवान महावीर पर प्रस्तुत नृत्य नाटिका ‘वर्तमान में वर्धमान’ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर के मूल्यों के प्रति युवाओं का समर्पण और प्रतिबद्धता देश के सही दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है।
मोदी ने जैन समुदाय के संतों को नमन किया और महावीर जयंती के अवसर पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं दीं।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों के समय में तीर्थंकरों, श्रद्धेय आध्यात्मिक जैन गुरुओं की शिक्षाएं और भी अधिक प्रासंगिक हो गई हैं।
मोदी ने अनेकांतवाद और स्यादवाद जैसे दर्शनों को याद किया जो लोगों को सभी पहलुओं को देखना और दूसरों के विचारों को भी स्वीकारना सिखाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज संघर्षों में फंसी दुनिया भारत से शांति की अपेक्षा कर रही है।
उन्होंने कहा कि नए भारत के इस नयी भूमिका का श्रेय देश के बढ़ते सामर्थ्य और विदेश नीति को दिया जा रहा है। लेकिन इसमें भारत की सांस्कृतिक छवि का बहुत बड़ा योगदान है।
मोदी ने कहा, ‘‘आज भारत इस भूमिका में आया है, क्योंकि आज हम सत्य और अहिंसा जैसे व्रतों को वैश्विक मंचों पर पूरे आत्मविश्वास से रखते हैं। हम दुनिया को बताते हैं कि वैश्विक संकट और संघर्षों का समाधान भारत की प्राचीन संस्कृति और प्राचीन परंपरा में है। इसीलिए, आज विभाजित दुनिया में भारत विश्व-बंधु के रूप में अपनी जगह बना रहा है।’’
उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ‘मिशन लाइफ’ और ‘एक विश्व-एक सूर्य-एक ग्रिड’ के रोडमैप के साथ ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ के दृष्टिकोण जैसी भारतीय पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज भारत अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी भविष्योन्मुखी वैश्विक पहल का नेतृत्व कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इन पहल ने न केवल दुनिया में आशा पैदा की है बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा के प्रति वैश्विक धारणा में बदलाव आया है।’’
प्रधानमंत्री ने आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की और आचार्य के साथ अपनी मुलाकात को याद करते हुए कहा कि ‘‘उनका आशीर्वाद अभी भी हमारा मार्गदर्शन कर रहा है।’’ विद्यासागरजी महाराज का फरवरी में निधन हो गया।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की समस्याओं के समाधान के रूप में सत्य और अहिंसा के मंत्र को वैश्विक स्तर पर अब आत्मविश्वास के साथ पेश कर रहा है।
मोदी ने कहा कि दुनिया को भारत से शांति की राह दिखाने की उम्मीद है और इसकी वजह देश की बढ़ती ताकत एवं विदेश नीति बताई जाती है, लेकिन इसमें इसकी सांस्कृतिक छवि ने भी बड़ी भूमिका निभाई है।
उन्होंने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि लोकतंत्र का बड़ा उत्सव जारी है और ‘‘देश का मानना है कि यहां से भविष्य की नयी यात्रा भी शुरू होगी।’’
प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि उन्हें सुबह-सुबह मतदान करना चाहिए। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संतों का संबंध कमल से होता है जिसका इस्तेमाल प्राय: पवित्र आयोजनों में किया जाता है और यह फूल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का चुनाव चिह्न भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम 2500 वर्षों के बाद भी भगवान महावीर का निर्वाण दिवस मना रहे हैं और मुझे यकीन है कि देश आने वाले हजारों वर्षों तक भगवान महावीर के मूल्यों का जश्न मनाता रहेगा।’’
उन्होंने भगवान महावीर की शिक्षाओं का पालन करने को कहा क्योंकि इन मूल्यों को पुनर्जीवित करना आज समय की मांग है।
जैन धर्म के अर्थ के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि जैन धर्म का अर्थ है, जीतने वाले का मार्ग।
मोदी ने कहा कि यह आयोजन एक दुर्लभ अवसर है और यह ‘अमृत काल’ की शुरुआत में हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश आजादी के शताब्दी वर्ष को ‘स्वर्णिम शताब्दी’ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने जोर दिया कि ‘अमृत काल’ का विचार केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक प्रेरणा है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत के लिए आधुनिकता उसका शरीर है, आध्यात्मिकता उसकी आत्मा है। अगर आधुनिकता से अध्यात्मिकता को निकाल दिया जाता है, तो अराजकता का जन्म होता है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भ्रष्टाचार और निराशा के दौर से उभर रहा है क्योंकि 25 करोड़ से अधिक भारतीय गरीबी से बाहर आ गए हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मीनाक्षी लेखी के साथ जैन समुदाय के गणमान्य व्यक्ति और संत उपस्थित थे।
भाषा आशीष