केवल 60 प्रतिशत देशों में ही हैं स्कूलों में भोजन एवं पेय पदार्थों संबंधी कानून, मानक :यूनेस्को
राजकुमार नरेश
- 20 Apr 2025, 04:47 PM
- Updated: 04:47 PM
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) यूनेस्को की ‘ग्लोबल एजूकेशन रिपोर्ट (जीईएम)’ में खुलासा किया गया है कि केवल 60 प्रतिशत देशों में ही स्कूलों में भोजन और पेय पदार्थों को विनियमित करने वाले कानून और मानक हैं।
यह रिपोर्ट ‘लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन’ की अगुवाई वाले ‘स्कूल स्वास्थ्य एवं पोषण अनुसंधान कंसोर्टियम’ के साथ साझेदारी में प्रकाशित की गई है, जो ‘स्कूल मील्स कोलिशन’ की अनुसंधान पहल है।
‘ग्लोबल एजुकेशन रिपोर्ट’ (जीईएम) में कहा गया है, ‘‘ 187 देशों में से केवल 93 देशों में ही स्कूल के भोजन और पेय पदार्थों पर कानून, अनिवार्य मानक या निर्देश हैं। हालांकि, इन 93 देशों में से केवल 29 प्रतिशत ने स्कूलों में खाद्य और पेय पदार्थों के विपणन को प्रतिबंधित करने के उपाय किए हैं तथा केवल 60 प्रतिशत देशों में ही खाद्य और पेय पदार्थों को विनियमित करने वाले मानक हैं।’’
जीईएम टीम ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले 30 देशों में स्कूल-आधारित खाद्य और पोषण शिक्षा के सर्वेक्षण-आधारित मूल्यांकन से पता चला कि इसका (खाद्य एवं पोषण शिक्षा का) स्कूल प्रणाली के साथ एकीकरण, एक स्वतंत्र विषय या पूरे पाठ्यक्रम के बजाय, ज्यादातर पाठ्येतर या परियोजना-आधारित गतिविधियों के माध्यम से हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘28 देशों में से केवल तीन में ही नियमित रूप से मूल्यांकन किया गया और उनका उपयोग किया गया। मूल्यांकन जानकारी में भोजन और पोषण, ज्ञान, भोजन पद्धति, पोषण की स्थिति, आदतों और आहार के बारे में दृष्टिकोण और धारणाओं में परिवर्तन शामिल थे।’’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘अधिकतर स्कूल भोजन कार्यक्रमों में पोषण, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा उद्देश्यों के साथ-साथ शिक्षा लक्ष्य भी होते हैं। हालांकि, ऐसे कार्यक्रम कम ही हैं जो मोटापे को रोकने या कम करने पर केंद्रित हैं।’’
स्कूली भोजन प्रावधान पर केंद्रित एक अन्य सर्वेक्षण में पाया गया कि 72 प्रतिशत देशों ने स्कूल परिसरों में खाद्य विपणन पर कुछ सीमाएं लगाने की बात स्वीकार की है जबकि 52 प्रतिशत देशों ने स्कूल परिसरों में या उसके आसपास खाद्य पदार्थों के विपणन पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध लगाए हैं।
जीईएम रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘उच्च आय वाले देशों में खाद्य प्रणाली परिवर्तन के साथ पोषण नीति जुड़ाव की समीक्षा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अधिकांश नीतिगत कार्रवाइयां स्वस्थ विकल्प व्यवहार बदलाव के वास्ते संवाद पर केंद्रित थीं जबकि खाद्य माहौल में अधिकतर परिणाम खाद्य ‘लेबलिंग’, उत्पाद सुधार, स्कूलों में स्वस्थ भोजन प्रदान करने और खाद्य विज्ञापन को प्रतिबंधित करने पर केंद्रित रहे।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘अस्वास्थ्यकर भोजन या पेय की खपत को कम करने पर जोर नहीं दिया गया। खाद्य माहौल तथा विनियामक और विधायी सुधारों के बजाय व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया गया।’’
भाषा
राजकुमार