कर्नाटक में दलित के मुख्यमंत्री बनने का अभी समय नहीं आया है: मंत्री के एच मुनियप्पा
राजकुमार धीरज
- 19 Apr 2025, 10:17 PM
- Updated: 10:17 PM
बेंगलुरु, 19 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के मंत्री के एच मुनियप्पा ने शनिवार को दावा किया कि अभी समय नहीं आया है कि कोई दलित राज्य का मुख्यमंत्री बने। उन्होंने कहा कि इस मामले पर अभी बोलना उचित नहीं है क्योंकि सिद्धरमैया वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं और वह पद पर बने रहेंगे।
मुनियप्पा ने कहा कि नये कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति समेत सभी मामलों पर आलाकमान फैसला करेगा और सभी लोग उस निर्णय का पालन करेंगे। हालांकि, उन्होंने माना कि दलित समुदाय की ओर से अनुरोध है कि समय आने पर उसे मौका दिया जाए।
दलित समुदाय से आने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुनियप्पा ने एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘फिलहाल हमारे पास एक मुख्यमंत्री हैं। सिद्धरमैया मुख्यमंत्री हैं और आलाकमान इस पर फैसला करेगा। कांग्रेस हमेशा से सभी समुदायों को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक समानता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध रही है।’’
मुनियप्पा ने संवाददाताओं से बाचीत करते हुए याद किया कि जब धरम सिंह मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने कहा था कि मल्लिकार्जुन खरगे जैसे वरिष्ठ नेता को उनका उत्तराधिकारी बनना चाहिए। बाद में, जब 2013 में सिद्धरमैया मुख्यमंत्री बने, तो मुनियप्पा ने अपील की थी कि तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष जी परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए, भले ही वह चुनाव हार गए हों।
मुनियप्पा ने कहा, ‘‘ दलित समुदाय से किसी को मुख्यमंत्री पद मिलना चाहिए, ऐसी इच्छा है। लेकिन लगता है कि अभी इसके लिए समय नहीं आया है। जब हमारे पास पहले से ही मुख्यमंत्री है, तो हम ऐसे मामलों पर चर्चा नहीं कर सकते। पार्टी अध्यक्ष का पद भी आलाकमान के अधिकार क्षेत्र में आता है। अध्यक्ष को कब बदलना है, और इन मामलों पर कैसे निर्णय लेना है - यह पूरी तरह से पार्टी नेतृत्व का फैसला है।’’
दलित मुख्यमंत्री की मांग कांग्रेस के भीतर लंबे समय से बहस का मुद्दा रही है। सिद्धरमैया मंत्रिमंडल में मंत्री जी परमेश्वर और एच सी महादेवप्पा जैसे समुदाय के वरिष्ठ नेताओं ने अतीत में इस विषय पर बात की है।
मुनियप्पा ने इस बात पर जोर दिया कि सिद्धरमैया मुख्यमंत्री बने रहेंगे और इस पर कोई मतभेद नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार पार्टी अध्यक्ष बने रहेंगे और इस पर भी आम सहमति है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब बदलाव का समय आएगा, तो पार्टी नेतृत्व निर्णय लेगा। यह ऐसा कुछ नहीं है जो हम अपने स्तर पर कर सकते हैं। इन समुदायों की अपील सरल है: हमें एक अवसर दें। और पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय लेगा, हम उसका पालन करेंगे।’’
राजनीतिक हलकों में, खासकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर, इस साल के अंत में मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव की अटकलें रही हैं। इन अटकलों के लिए सिद्धरमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता-साझाकरण समझौते का हवाला दिया जाता है। हालाँकि, पार्टी नेतृत्व के सख्त निर्देशों के बाद ऐसी चर्चाओं पर लगाम लगी है।
भाषा
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