वेणुगोपाल ने ईसाई जुलूस की अनुमति न मिलने को धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया, शाह को लिखा पत्र
सिम्मी नरेश
- 13 Apr 2025, 09:11 PM
- Updated: 09:11 PM
नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने रविवार को आरोप लगाया कि दिल्ली में ‘कुरुथोला प्रदक्षिणा’ जुलूस के लिए अनुमति नहीं दिया जाना ‘‘धार्मिक स्वतंत्रता पर गंभीर हमला’’ है और यह अल्पसंख्यकों की आवाज को दबाने के लिए ‘‘उन्हें चुनिंदा आधार पर निशाना’’ बनाए जाने के समान है।
केरल के अलप्पुझा से कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में दिल्ली के ‘सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल’ में जुलूस की अनुमति न दिए जाने पर अपना ‘‘कड़ा विरोध और गहरी चिंता’’ दर्ज कराते हुए कहा कि ‘‘इस गिरजाघर को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि क्रिसमस और ईस्टर के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहां आते हैं।’’
वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘इस शांतिपूर्ण धार्मिक जुलूस पर रोक लगाने का निर्णय संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी पर गंभीर हमले को दर्शाता है। ‘ईस्टर संडे’ से एक सप्ताह पहले ‘पाम संडे’ पर ‘कुरुथोला प्रदक्षिणा’ (‘ऑफ द क्रॉस जुलूस’) जुलूस निकालना ईसाई समुदाय की एक प्रमुख परंपरा है जो भक्ति और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है।’’
उन्होंने शाह को लिखे पत्र में कहा, ‘‘दिल्ली में सेक्रेड हार्ट कैथेड्रल पिछले 15 साल से शांतिपूर्ण धार्मिक जुलूस निकाल रहा है और इसलिए ठोस कारण बताए बिना अनुमति देने से इनकार करना, धर्म का स्वतंत्र रूप से पालन करने और उसे मानने के व्यक्ति के मौलिक अधिकार को बनाए रखने की सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।’’
वेणुगोपाल ने कहा कि धार्मिक जुलूस निकालना भारत में कई धर्मों का अभिन्न अंग हैं और पारदर्शी एवं उचित कारणों के बिना उन्हें प्रतिबंधित करना देश के लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह महज अनदेखी नहीं है; यह जानबूझकर किया गया एक दमनकारी कार्य है। इस प्रतिबंध के लिए सरकार द्वारा विश्वसनीय तर्क देने से इनकार करना उसके उद्देश्यों को उजागर करता है: नीति की आड़ में भेदभाव करना।’’
वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘चुनिंदा रूप से इस तरह निशाना बनाया जाना अल्पसंख्यकों की आवाज को दबाने और दूसरों की आवाज को बढ़ावा देने के सोचे-समझे एजेंडे को रेखांकित करता है और यह हमारे धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है।’’
उन्होंने शाह से उन परिस्थितियों की जांच करने का आग्रह किया जिनके कारण दिल्ली पुलिस ने जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया। उन्होंने शाह से यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया कि धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार की रक्षा और सम्मान किया जाए।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सरकार का कर्तव्य है कि वह सभी समुदायों द्वारा शांतिपूर्ण तरीके से आस्था व्यक्त किए जाने में बाधा डालने के बजाय उसे सुगम बनाए।’’
वेणुगोपाल ने शाह को लिखा अपना पत्र साझा करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ‘‘भाजपा एक सप्ताह भी अपना ‘तथाकथित ईसाई समर्थक’ नाटक जारी नहीं रख सकती। पहले ‘ऑर्गनाइजर’ के लेख में गिरजाघर की संपत्तियों को निशाना बनाया गया और अब दिल्ली पुलिस ने ‘पाम संडे’ के पावन दिन पवित्र जुलूस की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।’’
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या दिल्ली में ईसाइयों को संविधान के उस अनुच्छेद 25 से बाहर रखा गया है, जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘आस्था का पालन करना कब से खतरा बन गया? यह कोई एकाध घटना नहीं है - यह लक्षित भेदभाव है। मैंने इस फैसले के खिलाफ गृह मंत्री को पत्र लिखा है, जिनके अधीन दिल्ली पुलिस काम करती है।’’
भाषा सिम्मी