राष्ट्रपति मुर्मू ने स्लोवाकिया के बच्चों के साथ रामायण पर आधारित कठपुतली कार्यक्रम देखा
सुरभि अविनाश
- 10 Apr 2025, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
(अभिषेक शुक्ला)
ब्रातिस्लावा, 10 अप्रैल (भाषा) स्लोवाकिया की दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर आईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को स्लोवाकियाई बच्चों के साथ रामायण पर आधारित कठपुतली कार्यक्रम देखा।
कार्यक्रम के शुरुआती दृश्य में राजा दशरथ अपने पुत्र राम से विश्वामित्र के साथ जाने को कहते हैं। रामायण पर केंद्रित, स्लोवाक भाषा में कठपुतली शो के शुरू होते ही बच्चे मंत्रमुग्ध होकर कार्यक्रम देखते रहे।
कठपुतली की कला काफी प्राचीन है जिसके जरिए रामायण का मंचन किया गया। 45 मिनट के इस कार्यक्रम की परिकल्पना भगवान कृष्ण की भक्त और भारतीय संस्कृति की प्रशंसक लेंका मुकोवा ने की थी।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू के साथ 150 स्लोवाक छात्रों ने भाग लिया।
प्रेसोव में ‘बाबादलो पपेट थियेटर’ की मुख्य सदस्य मुकोवा ने अपनी आध्यात्मिक प्रेरणा और कलात्मक दृष्टि से एक ऐसा कार्यक्रम तैयार किया जो बच्चों और वयस्कों दोनों को पसंद आया।
उन्होंने स्लोवाकिया और चेक गणराज्य के कई शहरों में अब तक ऐसे 20 कार्यक्रम किए हैं।
लेख श्रवंती देवीदासी के नाम से भी मशहूर मुकोवा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं पिछले 17 साल से कृष्ण की भक्त हूं। मुझे रामायण की कहानी पसंद है क्योंकि यह भावनाओं, प्रेम और मूल्यों से भरपूर है।’’
उन्होंने कहा कि यह किसी भारतीय महाकाव्य पर आधारित उनकी पहली प्रस्तुति है। यह बच्चों के लिए बहुत शिक्षाप्रद है।
कार्यक्रम में पूरी तरह डूबे बच्चे तब चकित हो जाते जब रावण सीता का अपहरण करने आया या जब हनुमान ने रावण का सामना किया और और लंका जला दी। पृष्ठभूमि में हनुमान चालीसा की चौपाइयां बज रही थीं।
तीन दशकों से अधिक समय से ‘बाबादलो पपेट थियेटर’ ने शैक्षिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कहानी सुनाकर युवा मन को मंत्रमुग्ध कर दिया है।
रावण पर राम की जीत के साथ पर्दा गिरते ही हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा तथा भारत और स्लोवाकिया के झंडे लहराते दिखाई दिए।
राष्ट्रपति ने स्लोवाक बच्चों द्वारा बनाई गई चित्रकलाओं की एक जीवंत प्रदर्शनी भी देखी, जिसे वार्षिक कला प्रतियोगिता ‘परी कथाओं में छिपा सौंदर्य - स्लोवाक बच्चों की नजर से भारत’ के भाग के रूप में बनाया गया था। हर वर्ष, बच्चों को पंचतंत्र जैसी कृतियों से एक भारतीय दंतकथा का विषय दिया जाता है।
पिएस्तानी स्थित ‘स्लोवाक-भारत मैत्री सोसायटी’ की संस्थापक अन्ना गैलोविचोवा ने कहा कि बच्चों को पेंटिंग करने देने का विचार बीमार बच्चों के लिए बने एक आरोग्य आश्रय से आया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम इन बच्चों को पंचतंत्र या जातक कथाओं से भारतीय कहानियां सुनाते हैं और उनसे अपनी कल्पना का उपयोग करते हुए उन कहानियों से कुछ भी चित्रित करने के लिए कहते हैं। इससे उन्हें खुशी मिलती है और आरोग्य आश्रय का गमगीन माहौल खुशनुमा हो जाता है।’’
भारत के राजदूत अपूर्व श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने स्लोवाक बच्चों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने के लिए इन कार्यक्रमों के बारे में सोचा। ये बच्चे दोनों देशों के ब्रांड एंबेसडर होंगे।’’
सोसायटी ने 2015 में वार्षिक कार्यक्रम शुरू किया था। इस साल 10वें संस्करण में 700 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं।
तमारा कुबोवोवा की महात्मा गांधी पर बनाई गई पेंटिंग विजेता रही। तमारा ने कहा कि उन्हें भारत के बारे में इतिहास की कक्षा में पता चला।
भाषा सुरभि