जब 26/11 आतंकी हमला हुआ, गृह सचिव गुप्ता बातचीत के लिए इस्लामाबाद में थे
नेत्रपाल माधव
- 10 Apr 2025, 06:01 PM
- Updated: 06:01 PM
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) भारी हथियारों से लैस 10 पाकिस्तानी आतंकवादियों ने मुंबई में जब 26/11 हमलों को अंजाम दिया, तब तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल आतंकवाद सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए द्विपक्षीय वार्ता के वास्ते इस्लामाबाद में था।
भारतीय एजेंसियों के वर्षों के प्रयासों के बाद हमलों के प्रमुख आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा को मुकदमे का सामना कराने के लिए आज अमेरिका से दिल्ली लाया जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि 26 नवंबर 2008 को जब आतंकवादी पाकिस्तान से अरब सागर के रास्ते मुंबई पहुंचे तो उस समय गुप्ता द्विपक्षीय गृह सचिव स्तर की वार्ता में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद में थे, जिसे तब ‘समग्र वार्ता’ का नाम दिया गया था।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 26 नवंबर को अपने पाकिस्तानी समकक्षों के साथ वार्ता पूरी की थी। मौजूदा परंपरा के तहत भारतीय प्रतिनिधिमंडल को शिष्टाचार भेंट के लिए पाकिस्तान के गृह मंत्री से मिलना था।
हालांकि, सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल को कहा गया कि पाकिस्तानी मंत्री यात्रा पर होने के कारण उपलब्ध नहीं हैं और वह अगले दिन यानी 27 नवंबर को उनसे मिल सकते हैं। इसलिए टीम वहीं रुक गई।
बाद में, उसी दिन (26 नवंबर) भारतीय प्रतिनिधिमंडल को इस्लामाबाद के निकट खूबसूरत पर्वतीय क्षेत्र मुर्री ले जाया गया।
उसी शाम आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला कर देश की सबसे भीषण आतंकी घटना को अंजाम दिया जिसमें 166 लोग मारे गए।
जब यह खबर आई, तब गुप्ता मुर्री से दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व के साथ नियमित संपर्क में थे।
पाकिस्तान गए भारतीय प्रतिनिधिमंडल में गृह मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव, एक संयुक्त सचिव और कुछ अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
टीम ने अगले दिन भारत वापस लौटने से पहले वह दुर्भाग्यपूर्ण रात मुर्री में बिताई।
बृहस्पतिवार को जब गुप्ता से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है और बात करने में असमर्थ हैं।
उस समय ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि पाकिस्तान ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल को धोखा देकर उनका प्रवास एक दिन बढ़ा दिया होगा।
वर्ष 2008 के उस दुर्भाग्यपूर्ण दिन गुप्ता की अनुपस्थिति में गृह मंत्रालय में तत्कालीन विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) एम एल कुमावत गृह मंत्रालय के मामलों को संभाल रहे थे और तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल की सलाह के अनुसार संबंधित एजेंसियों को प्रारंभिक निर्देश दे रहे थे। पाटिल ने बाद में इस्तीफा दे दिया था।
आईपीएस अधिकारी कुमावत को तत्कालीन संयुक्त सचिव नवीन वर्मा और कुछ अन्य अधिकारियों ने सहायता प्रदान की थी।
भाषा
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