भाजपा ने राणा के प्रत्यर्पण को उपलब्धि बताया
नेत्रपाल अविनाश
- 10 Apr 2025, 08:54 PM
- Updated: 08:54 PM
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कहा कि मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘‘नए भारत’’ के आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के संकल्प को दर्शाता है। इसने साथ ही उसने कांग्रेस पर ‘‘वोट बैंक की राजनीति’’ के लिए आतंकवाद के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।
अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद राणा को बृहस्पतिवार को दिल्ली लाया गया।
भाजपा मुख्यालय में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राणा का प्रत्यर्पण मोदी सरकार और इसकी सुरक्षा एजेंसियों की एक ‘‘बड़ी उपलब्धि’’ है।
उन्होंने कहा कि यह उन सुरक्षाकर्मियों के प्रति भी श्रद्धांजलि है जिन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों से लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। साथ ही यह उस हमले में मारे गए 160 से अधिक लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में एक ‘‘बड़ा कदम’’ है। उस आतंकी हमले में मारे गए लोगों में अमेरिका, इजराइल, फ्रांस, जर्मनी, इटली तथा अन्य देशों के नागरिक भी थे।
पूनावाला ने कहा, ‘‘यह प्रत्यर्पण कोई साधारण प्रत्यर्पण नहीं है। यह नए भारत के संकल्प का प्रतिबिंब है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2019 में वर्णित करते हुए कहा था कि अगर किसी ने भारत की एकता, अखंडता, सम्मान और इसके निर्दोष लोगों पर हमला करने की हिम्मत की, तो नया भारत ऐसे आतंकवादियों को न्याय के कठघरे में लाएगा।’’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आतंकवाद और आतंकी हमलों के प्रति मोदी सरकार के कठोर रवैये के कारण राणा को न्याय के कठघरे में लाने के लिए उसे भारत लाया जा रहा है।
पूनावाला ने कहा कि यह एक ‘‘नए भारत’’ का प्रतिनिधित्व करता है, जो पाकिस्तान प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद को ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति रखता है तथा यह सुनिश्चित करता है कि राष्ट्रीय नीति वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित न हो।
उन्होंने कहा, ‘‘इससे पहले, विशेषकर 2004-14 के बीच (जब कांग्रेस नीत संप्रग सरकार सत्ता में थी), ऐसा एक भी महीना नहीं था जब भारत के किसी प्रमुख शहर में कोई बड़ा आतंकवादी हमला न हुआ हो।’’
पूनावाला ने कांग्रेस का नाम लिए बगैर आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार आतंकवादी हमलों की घटनाओं पर मूकदर्शक बनी रही और उसने ऐसे आतंकवादियों तथा भारत में आतंकवाद के प्रायोजकों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद को ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की मोदी सरकार की नीति के कारण इस तरह के बड़े आतंकवादी हमले ‘‘लगभग बंद हो गए हैं’’।
पूनावाला ने कहा, ‘‘पहले वोट बैंक के नाम पर आतंकवाद के प्रति नरम रुख अपनाया जाता था।’’
उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के समय आतंकवाद का समर्थन करने वाले देश को ‘विशेष तरजीही राष्ट्र’ का दर्जा दिया गया था।
भाजपा प्रवक्ता ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसने उत्तर प्रदेश में विस्फोटों के कुछ आरोपियों को रिहा करने का प्रयास किया क्योंकि वे एक ‘‘विशेष धर्म’’ से थे।
उन्होंने कहा, ‘‘रामपुर विस्फोट, वाराणसी विस्फोट और संकट मोचन विस्फोट में शामिल आतंकवादियों को बाद में दोषी ठहराया गया था, लेकिन एक पार्टी ने उनके धर्म के कारण उन्हें रिहा करने का प्रयास किया।’’
पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने यहां तक कि एक ‘‘फर्जी विमर्श’’ गढ़ने की कोशिश की, जिसमें आरोप लगाया गया कि मुंबई में हुए हमले सहित विभिन्न हमले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और हिंदुओं द्वारा रची गई साजिश थी।
उन्होंने पूछा, ‘‘अब जब भारत ने 26/11 हमले के सिलसिले में एक बड़ी सफलता हासिल कर ली है, तो क्या वे लोग माफी मांगेंगे जिन्होंने दावा किया था कि 26/11 आरएसएस या हिंदुओं की साजिश थी? क्या वे लोग माफी मांगेंगे जिन्होंने कहा था कि इस आतंकी हमले के लिए पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारतीय एजेंसियां जिम्मेदार थीं?’’
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने एक बयान में कहा, ‘‘मोदी सरकार ने इस प्रक्रिया की न तो शुरुआत की, न ही कोई नयी सफलता हासिल की। वह केवल उस संस्थागत ढांचे का लाभ उठा रही है, जिसे संप्रग सरकार ने वर्षों की मेहनत, समझदारी और राजनयिक दूरदर्शिता से खड़ा किया था।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘यह प्रत्यर्पण कोई प्रचार की जीत नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जब भारत ईमानदारी, गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ काम करता है, तब वह दुनिया के सबसे जटिल अपराधियों को भी कानून के कठघरे में खड़ा कर सकता है।’’
भाषा
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