जातीय हिंसा भड़कने के बाद पहली बार मेइती, कुकी प्रतिनिधियों की हुई बैठक
आशीष पवनेश
- 05 Apr 2025, 10:08 PM
- Updated: 10:08 PM
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) मणिपुर में लगभग दो वर्ष पहले जातीय हिंसा शुरू होने के बाद पहली बार, शनिवार को मेइती और कुकी समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच आमने-सामने बैठक हुई। राज्य में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए केंद्र के प्रयास तेज करने के बीच यह बैठक हुई है।
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में यहां आयोजित बैठक में संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और राज्य के लोगों को स्वीकार्य सौहार्दपूर्ण समाधान खोजने के लिए बातचीत जारी रखने का निर्णय लिया गया।
सूत्रों ने बताया कि करीब पांच घंटे तक हुई बैठक दोनों समुदायों के बीच संघर्ष को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार की पहल के तहत हुई।
राज्य में मई 2023 में मेइती-कुकी समुदायों के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद जातीय तनाव और बढ़ गया।
सूत्रों ने बताया कि बैठक का उद्देश्य मेइती और कुकी के बीच विश्वास और सहयोग बढ़ाना तथा मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए खाका तैयार करना था।
बैठक में ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (एएमयूसीओ) और फेडरेशन ऑफ सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन (एफओसीएस) के प्रतिनिधियों सहित छह सदस्यीय मेइती प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। कुकी प्रतिनिधिमंडल में कुकी-जो काउंसिल के लगभग नौ प्रतिनिधि शामिल थे।
बैठक में केंद्र सरकार के वार्ताकार, खुफिया ब्यूरो के सेवानिवृत्त विशेष निदेशक ए के मिश्रा और मणिपुर के मुख्य सचिव प्रशांत कुमार सिंह शामिल हुए।
सूत्रों ने बताया कि दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों के बीच यह पहली सीधी बैठक थी। अक्टूबर 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित कुकी-जो, मेइती और नगा विधायकों की बैठक नहीं हो सकी क्योंकि संघर्षरत समुदायों के विधायकों ने एक कमरे में बैठने से इनकार कर दिया।
उस समय, उन्होंने केंद्र सरकार के वार्ताकारों से अलग-अलग मुलाकात की थी, हालांकि दोनों बैठकें राष्ट्रीय राजधानी में एक ही स्थान पर हुई थीं।
बृहस्पतिवार को लोकसभा में मणिपुर पर बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों मेइती और कुकी समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ 13 बैठकें की हैं।
निचले सदन में हुई संक्षिप्त बहस का जवाब देते हुए शाह ने कहा, ‘‘गृह मंत्रालय जल्द ही एक संयुक्त बैठक बुलाएगा।’’ सदन ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू करने की पुष्टि करते हुए एक वैधानिक प्रस्ताव को मंजूर किया।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार हिंसा को समाप्त करने का रास्ता तलाशने के लिए काम कर रही है, लेकिन सर्वोच्च प्राथमिकता शांति स्थापित करना है। शाह ने कहा कि मणिपुर में स्थिति काफी हद तक नियंत्रण में है क्योंकि पिछले चार महीनों में हिंसा में कोई मौत नहीं हुई है, लेकिन इसे संतोषजनक नहीं माना जा सकता क्योंकि विस्थापित लोग अभी भी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों को यह समझना चाहिए कि बातचीत ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है और केंद्र सरकार राज्य में एक दिन के लिए भी राष्ट्रपति शासन जारी रखने के पक्ष में नहीं है।
मणिपुर में नौ फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है। राज्य विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है।
मई 2023 में इंफाल घाटी स्थित मेइती और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़कने के बाद से लगभग 260 लोगों की जान जा चुकी है। संघर्ष के शुरुआती चरण के दौरान मणिपुर के विभिन्न थानों से कई हजार हथियार लूट लिए गए।
तीन जनवरी को राज्यपाल का कार्यभार संभालने वाले अजय कुमार भल्ला तब से विभिन्न वर्गों के लोगों से मिल रहे हैं और उनसे राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के बारे में जानकारी ले रहे हैं।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्यपाल ने शांति बहाल करने और सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए कई कदम उठाए थे, जिनमें सुरक्षा बलों से हथियार लूटने वालों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहना भी शामिल था।
केंद्र सरकार ने राज्य की सड़कों को सामान्य यातायात के लिए खोलने का भी प्रयास किया, हालांकि कुकी लोगों के विरोध के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
मेइती या कुकी के निवास वाले क्षेत्रों से होकर यात्रा करना अन्य समुदाय के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित है। कुकी राज्य से बाहर जाने के लिए ज़्यादातर मिजोरम से होकर यात्रा करते हैं, लेकिन मेइती कुकी के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में नहीं जाते हैं।
इस बीच, मेइती नागरिक समूहों की एक छत्र संस्था, कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटिग्रिटी (सीओसीओएमआई) ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह समाधान का दिखावा कर रहा है तथा इस संकट के मूल कारणों को दूर करने के लिए कोई गंभीर या ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
भाषा आशीष