अदालत ने अलग रह रहे पति के खिलाफ महिला की याचिका खारिज की, 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
रंजन रंजन संतोष
- 05 Apr 2025, 07:30 PM
- Updated: 07:30 PM
नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महिला की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अलग रह रहे अपने पति के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई करने की मांग की थी। याचिका में महिला ने पति पर अपने बच्चों से मिलने के लिए मुलाकात के अधिकार का लाभ उठाने की शर्तों का कथित रूप से उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। अदालत ने महिला पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रेणु भटनागर की पीठ ने कहा कि अवमानना याचिका में कोई दम नहीं है और कहा कि महिला और उसके साथ आए अन्य लोग ही पति को उकसा रहे थे।
महिला ने अपनी याचिका में दावा किया कि निचली अदालत ने अक्टूबर 2023 में निर्देश दिया था कि पति को अपने माता-पिता या किसी और के साथ नहीं आना चाहिए और न ही बच्चों से मुलाकात की तस्वीरें या वीडियो लेनी चाहिए, लेकिन पति ने बिना अनुमति के वीडियो बनाना और तस्वीरें लेना शुरू कर दिया।
नवंबर 2023 में, उच्च न्यायालय ने कहा था कि व्यक्ति अपने माता-पिता के साथ दिवाली के अवसर पर महिला के कार्यालय में उसके बच्चों से मिलने का हकदार है।
महिला ने दावा किया कि जब व्यक्ति मुलाकात के लिए पहुंचा, तो उसने जानबूझकर उसे, उसके परिवार के सदस्यों और उसके नियोक्ताओं को परेशान किया, जिसका एकमात्र उद्देश्य उसका आत्मविश्वास तोड़ना, उसे काम से निकालने की कोशिश करके उसके जीवन के स्रोत को सीमित करना और उसे केवल गिड़गिड़ाने के लिए बेबस करना था।
चूंकि महिला के कहने पर रिकॉर्ड की गई वीडियो क्लिप याचिका के साथ दायर नहीं की गई थी, इसलिए पीठ ने उसे अपने लैपटॉप पर इसे दिखाने के लिए कहा।
अदातल ने कहा, ‘‘वीडियो देखने के बाद, हमारी यह राय है कि वास्तव में, यह याचिकाकर्ता (महिला) और उसके साथ के लोग थे जो प्रतिवादी नंबर एक (पुरुष) को इस तरह की प्रतिक्रिया करने के लिए उकसा रहे थे।’’
पीठ ने 28 मार्च के अपने आदेश में कहा, ‘‘हम पाते हैं कि प्रतिवादी नंबर एक के साथ उसके माता-पिता, यानी प्रतिवादी नंबर 2 और 3 भी थे, जिनमें से हमें बताया गया है कि प्रतिवादी नंबर 3 की दुर्भाग्य से 12 फरवरी, 2025 को मृत्यु हो गई है।’’
अदालत ने कहा कि उसने वीडियो में देखा है कि व्यक्ति के माता-पिता ने याचिकाकर्ता के साथ आए लोगों से अनुरोध करने की भी कोशिश की कि वे उस व्यक्ति का मजाक न उड़ाएं और मुलाकात को शांतिपूर्ण तरीके से होने दें।
हालांकि, वीडियो से स्पष्ट है कि इस अनुरोध का फिर से मजाक उड़ाया गया।
अदालत ने निर्देश दिया कि 50,000 रुपये के जुर्माने की राशि में से महिला को 25,000 रुपये पुरुष को देने चाहिए और शेष 25,000 रुपये चार सप्ताह के भीतर दिल्ली उच्च न्यायालय अधिवक्ता कल्याण कोष में जमा किए जाने चाहिए।
महिला ने दावा किया कि दिवाली पर उसके कार्यालय में स्थान उपलब्ध नहीं था, इसलिए उसने ‘अपने दूसरे कार्यालय में’ एक निजी सम्मेलन कक्ष की व्यवस्था की थी और पुरुष को मुलाकात के लिए स्थल की बुकिंग के बारे में सूचित किया था और उससे लागत वहन करने के लिए कहा था।
इस पर, पीठ ने कहा कि अदालत ने पुरुष को स्थल का खर्च वहन करने का कोई निर्देश नहीं दिया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘वास्तव में, इस अदालत ने नौ नवंबर, 2023 के अपने आदेश में, महिला के कार्यालय में पुरुष और उसके माता-पिता को बच्चों से मिलने की अनुमति दी थी, तथा इसके लिए उसे कोई खर्च वहन नहीं करना था।’’
भाषा रंजन रंजन