उप्र सरकार की वृद्धाश्रमों के बुजुर्गों के व्यावसायिक अनुभवों का इस्तेमाल करने की योजना
जफर नोमान
- 03 Apr 2025, 07:39 PM
- Updated: 07:39 PM
लखनऊ, तीन अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के पूर्व व्यवसाय और पेशे के अनुभवों का आज के परिप्रेक्ष्य में लाभ उठाने की योजना बना रही है और इसके बदले में उन्हें निश्चित धनराशि भी प्रदान की जाएगी। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि इससे बुजुर्गों का न सिर्फ इन वृद्धाश्रमों में मन लगेगा बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर यहां बेहतर समय भी बिता सकेंगे।
वर्तमान में, सरकार राज्य द्वारा संचालित वृद्धाश्रमों में निःशुल्क आवास, भोजन, चिकित्सा देखभाल और मनोरंजन सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इन सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई पहल की जा रही है।
बयान के मुताबिक, प्रदेश सरकार ने इन वृद्धाश्रमों में सुविधाओं को और विस्तार देने की पहल की है जिसके अंतर्गत सभी बुजुर्गों को आयुष्मान कार्ड के माध्यम से उत्तम स्वास्थ्य सुविधा से जोड़ने की योजना है।
प्रत्येक सरकारी सहायता प्राप्त वृद्धाश्रम में अधिकतम 150 लोग रह सकते हैं। ये आश्रम सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सहयोग से संचालित किए जाते हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य परिवार के सहयोग से वंचित वरिष्ठ नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
पारदर्शिता और सेवा वितरण सुनिश्चित करने के लिए, चेहरा पहचान कर उपस्थिति दर्ज करने वाली प्रणाली लागू की गई है। इन आश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को वृद्धावस्था पेंशन भी मिलती है और उन्हें धार्मिक तीर्थ यात्राएं भी कराई जाती हैं।
हाल ही में आयोजित महाकुंभ में 1,500 से अधिक वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। उन्हें अस्थायी आवास उपलब्ध कराए गए।
बयान में कहा गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति विवाद या अन्य पारिवारिक समस्याओं को देखते हुए सरकार ने तहसील स्तर पर सुलह अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
इसके मुताबिक, प्रदेश में कुल 216 सुलह अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है, जो वृद्धजनों की शिकायतों का निवारण कर उन्हें न्याय दिलाने में सहायता कर रहे हैं।
बयान के अनुसार, वृद्धाश्रम प्रबंधन और सेवा सुधारों की देखरेख के लिए जिलाधिकारी (डीएम) के नेतृत्व में कार्यान्वयन समितियां भी गठित की गई हैं।
भाषा जफर