पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती विवाद: न्यायालय के फैसले के बाद भाजपा ने ममता के इस्तीफे की मांग की
सुरभि नरेश
- 03 Apr 2025, 02:35 PM
- Updated: 02:35 PM
कोलकाता, तीन अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पश्चिम बंगाल इकाई ने करीब 26,000 शिक्षकों की ‘‘दुर्दशा’’ के लिए बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। इन शिक्षकों की नियुक्तियों को उच्चतम न्यायालय ने अमान्य घोषित कर दिया है।
शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति को बृहस्पतिवार को अमान्य घोषित कर दिया और उनकी चयन प्रक्रिया को ‘‘त्रुटिपूर्ण’’ करार दिया।
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘शिक्षक भर्ती में इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की पूरी जिम्मेदारी राज्य की विफल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की है। उच्चतम न्यायालय के फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ममता बनर्जी के शासन में कैसे पश्चिम बंगाल में शिक्षित बेरोजगार युवाओं की योग्यता को पैसे के बदले बेचा गया।’’
उन्होंने मांग की कि बनर्जी को इस ‘‘भ्रष्टाचार’’ की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘अब और माफी नहीं।’’
‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में मजूमदार ने उन योग्य उम्मीदवारों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की, जिन्होंने ‘‘अपने कौशल और योग्यता का उपयोग करके नौकरी पाई, लेकिन ममता बनर्जी सरकार द्वारा पूरी भर्ती प्रक्रिया के भ्रष्ट संचालन के कारण वे पीड़ित बन गए। यह भ्रष्ट भर्ती प्रक्रिया अनियमित तरीके से बड़ी संख्या में दागी शिक्षकों को नौकरी दिलाने के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है।’’
मजूमदार ने कहा, ‘‘उन्हें (अयोग्य उम्मीदवारों को) योग्य उम्मीदवारों से अलग नहीं किया जा सका। भ्रष्ट ममता बनर्जी सरकार को राज्य के लोगों, खासकर योग्य शिक्षकों के परिवारों को स्पष्टीकरण देना चाहिए।’’
तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य डोला सेन ने कहा कि पार्टी फैसले का सम्मान करती है और उन्होंने कहा कि पार्टी हमेशा से भ्रष्टाचार के खिलाफ रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार आदेश, कानूनी मुद्दों की गहनता से जांच करेगी और कानूनी विशेषज्ञों से बात करने के बाद उचित कदम उठाएगी। पार्टी हमेशा योग्य उम्मीदवारों के साथ खड़ी रहेगी।’’
पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) द्वारा आयोजित 2016 की भर्ती परीक्षा उत्तीर्ण सैकड़ों शिक्षक महीनों से कोलकाता के मध्य में धरना दे रहे थे और अनुरोध कर रहे थे कि न्यायपालिका द्वारा निर्णय देते समय उनके मामलों के गुण-दोष पर विचार किया जाए तथा उसे मान्य किया जाए।
उच्चतम न्यायालय के फैसले के बारे में सुनने के बाद उनमें से कई रो पड़े।
राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त स्कूल में काम करने वाले एक शिक्षक ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम सारी उम्मीदें खो चुके थे। हम उच्चतम न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं। लेकिन हमारी क्या गलती है? हमने 2016 की एसएससी परीक्षा उत्तीर्ण की थी। लेकिन सरकार के एक वर्ग के भ्रष्ट आचरण के कारण कुछ अयोग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति में मदद मिली, जिससे हमारी पूरी दुनिया तबाह हो गई।’’
एक अन्य उम्मीदवार ने आरोप लगाया कि इस स्थिति के लिए राज्य और केंद्र दोनों जिम्मेदार हैं।
उन्होंने सवाल किया, ‘‘हमने सुना है कि हमें फिर से एसएससी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। अगर यह 2016-17 में होता, तो हम इस संभावना को लेकर उत्साहित होते और नए सिरे से शुरुआत करते। लेकिन हमें बताएं कि अब जब हम 30 साल की आयु सीमा पार कर चुके हैं, तो हमारे लिए यह कैसे संभव होगा?’’
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की एक पीठ ने नियुक्तियों को रद्द करने वाले 22 अप्रैल, 2024 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।
फैसला सुनाते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जिन कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द की गई हैं, उन्हें अब तक अर्जित वेतन और अन्य भत्ते वापस करने की जरूरत नहीं है।
शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को नए सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू करने और इसे तीन महीने के भीतर पूरा करने का भी आदेश दिया।
हालांकि, न्यायालय ने दिव्यांग कर्मचारियों को मानवीय आधार पर छूट देते हुए कहा कि वे नौकरी में बने रहेंगे।
पीठ ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच संबंधी उच्च न्यायालय के निर्देश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए चार अप्रैल की तारीख तय की।
शीर्ष अदालत ने 10 फरवरी को मामले से संबंधित कई याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और कहा कि जिन लोगों को गलत तरीके से नौकरी मिली है, उन्हें हटाया जा सकता है।
भाषा सुरभि