वक्फ को लेकर विपक्ष का विरोध केवल धार्मिक आधार पर, जबकि अनेक पहलू मौजूद: लोजपा (आर)
सुरेश देवेंद्र
- 02 Apr 2025, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी धर्म या धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि मुसलमानों का कल्याण सुनिश्चित करने के लिए वक्फ की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए है।
लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने लोकसभा में बुधवार को ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि विधेयक का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
उन्होंने विपक्ष पर वक्फ के केवल धार्मिक पहलू को उजागर करने का आरोप लगाया।
भारती ने कहा कि वक्फ को लेकर विपक्ष का विरोध केवल धार्मिक आधार पर किया जाता है, जबकि इसमें विधिक, आर्थिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक पक्ष भी मौजूद हैं।
बिहार की एक अन्य क्षेत्रीय दल जद (यू) के उलट, भारती ने विधेयक का समर्थन करने में अधिक सावधानी बरती।
उन्होंने कहा कि पिछले साल अगस्त में जब यह कानून संसद में पेश किया गया था, तब उनकी पार्टी के अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस पर व्यापक बहस की मांग की थी और इसे संसदीय समिति के पास भेजने का अनुरोध किया था।
उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दल मुसलमानों को डरा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि सरकार उनकी धार्मिक संपत्तियों पर कब्जा कर लेगी।
उन्होंने कहा कि ये दल अपना वोट बैंक सुरक्षित रखने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष मुसलमानों के पिछड़ेपन और देश भर में फैली विशाल वक्फ संपत्तियों के अकुशल प्रबंधन पर बहस करने में दिलचस्पी नहीं रखता।
भारती ने कहा कि सिंगापुर जैसा छोटा देश वक्फ संपत्तियों से 42 करोड़ रुपये कमाता है, जबकि हजारों की संख्या में वक्फ संपत्तियां होने के बावजूद भारत केवल 163 करोड़ रुपये ही कमाता है।
उन्होंने तुर्की, मिस्र, ट्यूनीशिया और अल्जीरिया जैसे मुस्लिम देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने वक्फ प्रबंधन में भी सुधार किए हैं, ताकि इसकी संपत्तियों का अधिक उत्पादक तरीके से उपयोग किया जा सके।
उन्होंने कहा कि गरीब और पिछड़े मुसलमानों को राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने के लिए एक ईमानदार प्रयास की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम धर्मगुरुओं ने विधेयक का समर्थन करने के लिए पासवान के खिलाफ फतवा जारी किया था, जबकि उनके पिता रामविलास पासवान ही थे, जिन्होंने 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में एक मुस्लिम को समर्थन देने के लिए अपनी पार्टी के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया था।
भाषा सुरेश