तमिलनाडु विधानसभा ने कच्चातीवु द्वीप को वापस लेने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया
राजकुमार नेत्रपाल
- 02 Apr 2025, 07:38 PM
- Updated: 07:38 PM
चेन्नई, दो अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें केंद्र से अनुरोध किया गया कि वह राज्य के मछुआरों के मछली पकड़ने के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए स्थायी समाधान के रूप में कच्चातीवु द्वीप को वापस ले। यह द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया था।
प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों की यह आदत बन गई है कि वे यह गलत सूचना फैलाते हैं कि यह राज्य सरकार थी जिसने कच्चातीवु को श्रीलंका को सौंप दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि केंद्र सरकार भी वही गलती कर रही है। यह दुर्भाग्यपूर्ण एवं अस्वीकार्य है।’’
स्टालिन ने कहा कि जहां तक कच्चातीवु का सवाल है, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने इसे सौंपे जाने का कड़ा विरोध किया था और द्रमुक सांसदों ने भी इस पर आपत्ति जताई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 28 जून 1974 को कच्चातीवु समझौते पर हस्ताक्षर होने के एक दिन बाद कलैगनार (करुणानिधि) ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और इसकी निंदा करते हुए प्रस्ताव पारित किया था।
स्टालिन ने कहा कि उसी दिन उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘भारत-श्रीलंका समझौते पर गहरी निराशा’ व्यक्त की थी।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता ने तीन अक्टूबर, 1991 और तीन मई, 2013 को तथा ओ पन्नीरसेल्वम ने भी अपने कार्यकाल के दौरान पांच मई, 2014 को विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर कच्चातीवु को पुनः प्राप्त करने के लिए कदम उठाने की मांग की थी।
स्टालिन ने कहा कि 2021 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर द्वीप को वापस लेने का दबाव बनाया, बल्कि मछुआरों की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के लिए कई मौकों पर पत्र भी लिखे।
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा 27 मार्च को राज्यसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंकाई नौसेना द्वारा प्रतिदिन औसतन दो मछुआरों को गिरफ्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जयशंकर ने 27 मार्च को राज्यसभा में बताया कि 97 भारतीय मछुआरे श्रीलंका की जेल में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल ही श्रीलंकाई नौसेना ने करीब 530 मछुआरों को पकड़ा था।’’
स्टालिन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव को गहन चर्चा के बाद विधानसभा में पारित कर दिया गया।
भाजपा सदस्य वनथी श्रीनिवासन ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय से कच्चातीवु पर भाजपा के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रस्ताव का समर्थन करती है, लेकिन जानना चाहती है कि जब द्रमुक ने दस साल तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के साथ सत्ता साझा की थी, तो उसने द्वीप को वापस पाने का अवसर क्यों गंवा दिया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि को (द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने के) घटनाक्रम की जानकारी थी।
इस पर सदन के नेता दुरईमुरुगन ने कहा कि करुणानिधि ने द्वीप को सौंपे जाने का कड़ा विरोध किया था।
कानून मंत्री एस रघुपति ने कहा, ‘‘इस मुद्दे पर न तो केंद्र ने कलैगनार से सलाह ली और न ही उन्होंने अपनी सहमति दी।’’
कांग्रेस नेता के सेल्वापेरुन्थगई ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के योगदान को छिपाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि कच्चातीवु की केवल 285 एकड़ जमीन लंका को दी गई, लेकिन उन्होंने ‘वेज बैंक’ का 4,600 वर्ग किलोमीटर हिस्सा भारत को दिलवा दिया।’’
विपक्ष के नेता एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने संप्रग शासन में एक दशक तक सत्ता में रहने के बावजूद इस विषय पर बहुत कम काम करने के लिए द्रमुक की आलोचना की। हालांकि उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन किया।
मुख्य विपक्षी दल अखिल भारतीय अन्नाद्रमुक मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने समर्थन दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘कच्चातीवु द्वीप को वापस लेना तमिलनाडु के मछुआरों के मछली पकड़ने के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करने और श्रीलंकाई नौसेना के कारण उन्हें होने वाली परेशानियों को कम करने का एकमात्र स्थायी समाधान है।’’
इसमें कहा गया, ‘‘उपर्युक्त बातों पर विचार करते हुए यह सम्मानित सदन सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह भारत-श्रीलंका समझौते की तत्काल समीक्षा करे और कच्चातीवु द्वीप को वापस पाने के लिए सभी कदम उठाए। सदन भारत के माननीय प्रधानमंत्री से आग्रह करता है कि वह श्रीलंका की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान सद्भावना के आधार पर हमारे सभी बंदी मछुआरों को रिहा कराने तथा उनकी जब्त नौकाओं को वापस कराने के लिए श्रीलंका सरकार से बातचीत करें।’’
भारत ने 1974 और 1976 में समझौतों के माध्यम से कच्चातीवु द्वीप को श्रीलंका को सौंप दिया था।
भाषा राजकुमार