वक्फ विधेयक : फडणवीस और शिंदे ने किया समर्थन, कांग्रेस ने उद्योगपतियों को जमीन सौंपने का लगाया आरोप
धीरज प्रशांत
- 02 Apr 2025, 07:32 PM
- Updated: 07:32 PM
मुंबई, दो अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किए जाने की प्रशंसा की। उन्होंने प्रस्तावित कानून को प्रगतिशील कदम करार देते हुए कहा कि यह संविधान की प्रस्तावना में उल्लिखित ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को प्रतिबिंबित करता है।
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह मुस्लिम समुदाय के हित में है।
फडणवीस ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में विश्वास जताया कि बुधवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू द्वारा चर्चा और पारित करने के लिए लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक को अंततः संसद की मंजूरी मिल जाएगी।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ने कहा,‘‘यह विधेयक किसी भी समुदाय की धार्मिक आस्था या भावना को ठेस नहीं पहुंचाता। यह केवल अतीत में हुई गलतियों को सुधारता है। महिलाओं को वक्फ बोर्ड (विधेयक के तहत प्रस्तावित) में प्रतिनिधित्व मिलेगा। बोर्ड में किसी भी गलत काम को अदालतों में (मौजूदा कानून के तहत) चुनौती नहीं दी जा सकेगी। इस प्रावधान को हटा दिया गया है।’’
फडणवीस ने आरोप लगाया कि मौजूदा वक्फ अधिनियम के तहत भूमि पर पहले बोर्ड और फिर कांग्रेस नेताओं ने कब्जा कर किया। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड संशोधन विधेयक का उद्देश्य इस ‘लूट’ को रोकना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहना मूर्खतापूर्ण है कि प्रस्तावित कानून से उद्योगपतियों को लाभ होगा। उन्होंने इसके आलोचकों को ‘‘चाटुकार’’ करार दिया जो तुष्टीकरण की राजनीति करना चाहते हैं।
फडणवीस ने कहा, ‘‘जिनकी अंतरात्मा जीवित है, वे विधेयक का समर्थन करेंगे। यदि शिवसेना (उबाठा) अब भी बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों का पालन करती है, तो वह विधेयक का समर्थन करेगी।’’
भाजपा के सहयोगी उपमुख्यमंत्री शिंदे ने वक्फ विधेयक को लेकर प्रतिद्वंद्वी शिवसेना (उबाठा) पर हमला बोला और उस पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना(उबाठा) अब कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रभाव में काम कर रही है।
शिंदे ने राज्य सरकार की 100 दिवसीय कार्ययोजना की समीक्षा के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह विधेयक मुस्लिम समुदाय के सर्वोत्तम हित में है। उन्होंने दावा किया, ‘‘यह उनके (मुस्लिमों के) समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है और मैं समुदाय से इसका समर्थन करने का आग्रह करता हूं। शिवसेना (उबाठा) बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से भटक गई है और अब राहुल गांधी के प्रभाव में काम कर रही है।’’
शिंदे ने कहा कि सत्तारूढ़ शिवसेना अपने निर्णय खुले तौर पर और स्वतंत्र रूप से लेती है तथा सुविधा की राजनीति में शामिल नहीं होती है।
उप मुख्यमंत्री ने विपक्षी शिवसेना (उबाठा) का नाम लिए बिना कहा कि उद्धव ठाकरे नीत पार्टी की वर्तमान दुर्दशा उसके प्रमुख मुद्दों पर अपनाए गए ‘‘सुविधाजनक’’ रुख के कारण है और इसी कारण उसे पिछले साल महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
शिंदे ने कहा कि वक्फ संपत्तियों को मुट्ठी भर लोगों के नियंत्रण में रखने (मौजूदा कानून के तहत) के बजाय, उनका इस्तेमाल अधिसंख्य लोग कर सकेंगे(अगर प्रस्तावित कानून लागू होता है)। दान की गई जमीनों पर कॉलेज, स्कूल और अस्पताल बनाए जाने चाहिए।
कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई ने हालांकि, इस विधेयक को लेकर केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आरोप लगाया कि सरकार प्रस्तावित कानून की आड़ में उद्योगपतियों और बिल्डरों को जमीन सौंपना चाहती है। उन्होंने यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि संविधान के प्रारूपण के दौरान विशेष भूमि अधिकार स्थापित किए गए थे।
उन्होंने कहा कि मंदिरों, पूजा स्थलों को भूमि आवंटित की गई है और इनाम (उपहार में दी गई) भूमि दी गई है। महाराष्ट्र में छत्रपतियों (मराठा शासकों) के वंशजों को भी विशेष भूमि अधिकार दिए गए हैं।
सपकाल ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार अब वक्फ विधेयक को धार्मिक नजरिए से देख रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि वह दान में दी गई संपत्तियों पर कब्जा कर उन्हें उद्योगपतियों और बिल्डरों को सौंपने की योजना बना रही है।
उन्होंने दावा किया, ‘‘वे पहले ही धारावी की जमीन अदाणी को सौंप चुके हैं और शक्ति पीठ कॉरिडोर के बहाने कोंकण की जमीन अदाणी और अंबानी को आवंटित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह (वक्फ विधेयक) भी इसी तरह की चाल प्रतीत होती है।’’
भाषा धीरज