वायलार प्रकरण: उच्च न्यायालय ने सीबीआई को दलित लड़कियों के माता-पिता पर कार्रवाई से रोका
राजकुमार नेत्रपाल
- 02 Apr 2025, 07:21 PM
- Updated: 07:21 PM
कोच्चि, दो अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को सीबीआई को निर्देश दिया कि वह उन दो नाबालिग दलित लड़कियों के माता-पिता के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम न उठाए, जिनके साथ 2017 में कथित रूप से बलात्कार किया गया था और बाद में वे पलक्कड़ के पास वायलार में मृत पाई गई थीं।
उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि (दोनों लड़कियों के) माता-पिता को विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है, जहां एजेंसी ने उन्हें भादंसं, किशोर न्याय (बाल देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत आरोपी के रूप में पेश करते हुए आरोपपत्र दाखिल किए हैं।
न्यायमूर्ति सी. जयचंद्रन ने कहा, ‘‘दंडात्मक कार्रवाई स्थगित रखी जाती है। व्यक्तिगत पेशी से छूट दी गई है।’’
उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 19 मई तय की।
यह निर्देश माता-पिता की उस याचिका पर आया जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ अदालत में दाखिल आरोपपत्र को रद्द करने का अनुरोध किया था।
लड़कियों के माता-पिता ने अपनी याचिका में अपनी बेटियों की मौत के संबंध में हत्या के पहलू की भी जांच की मांग की है। उन्होंने अधिवक्ता पी वी जीवेश के माध्यम से यह याचिका दायर की है।
केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जांच पूरी कर ली है और छह आरोपपत्र दाखिल किए हैं।
मार्च में दाखिल आरोपपत्रों में, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इन लड़कियों के माता-पिता को पॉक्सो अधिनियम की धारा 16, 17 (उकसाना), भादंसं की धारा 109 (उकसाना), 376(2)(एफ)(आई)(एन) (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक अपराध), 201 (अपराध के लिए गायब करना) और किशोर न्याय (बाल देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 (बच्चे के साथ क्रूरता के लिए सजा) के तहत आरोपी बनाया है।
ये दोनों दलित लड़कियां क्रमश: 13 और नौ साल की थीं तथा आपस में बहनें थीं। वे क्रमश: 13 जनवरी और चार मार्च, 2017 को लगभग 50 दिन के अंतराल पर अपने घर में फंदे से लटकी मिली थीं।
इन दोनों लड़कियों का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया था। इस मामले में पांच आरोपियों को पहले ही बरी किया जा चुका है।
बाद में, इन लड़कियों की मां की मांग पर विचार करते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए गए।
एजेंसी ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि बहनों ने उत्पीड़न से आहत होकर फांसी लगाकर जान दे दी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी इस बात को लेकर पक्के तौर पर निश्चिंत नहीं है कि यह हत्या है या आत्महत्या।
याचिका में कहा गया, ‘‘याचिकाकर्ताओं को तार्किक आधार पर आरोपी नहीं बनाया गया है। कुछ गवाहों , जिनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है, के बयानों के आधार पर जांच अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि याचिकाकर्ताओं ने अपराध किया है।’’
इसमें आरोप लगाया गया है कि याचिकाकर्ताओं और आरोपियों के बीच संबंधों को बढ़ा-चढ़ाकर और बनावटी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि आरोपियों- प्रदीप और मधु उर्फ कुट्टी मधु, और एक संदिग्ध जॉन प्रवीण की संदिग्ध मौतों की कोई जांच नहीं की गई है।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच एजेंसी इस मामले को आत्महत्या का मामला बताकर खत्म करने की कोशिश कर रही है।
भाषा राजकुमार