वक्फ संशोधन विधेयक धार्मिक स्वतंत्रता के 'उल्लंघन का प्रयास' : झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष
रंजन नेत्रपाल
- 02 Apr 2025, 07:54 PM
- Updated: 07:54 PM
रांची, दो अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की झारखंड इकाई के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने बुधवार को वक्फ संशोधन विधेयक की निंदा करते हुए इसे संविधान के तहत मुसलमानों को मिली धार्मिक स्वतंत्रता के ‘‘उल्लंघन का प्रयास’’ करार दिया।
कमलेश ने यह भी कहा कि यह विधेयक बेरोजगारी और महंगाई जैसे विभिन्न मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने का प्रयास है।
उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम संशोधन के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसके इरादे के खिलाफ हैं। संशोधन राज्य और देश के हित में पेश किया जाना चाहिए। हालांकि, यह देश में विभाजन पैदा करने का प्रयास है।’’
कमलेश ने आरोप लगाया कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड पर मुसलमानों के अधिकार को कमजोर करता है और सरकार को वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण की अनुमति देता है।
कांग्रेस की झारखंड इकाई के पूर्व अध्यक्ष और राज्य समन्वय समिति के सदस्य राजेश ठाकुर ने कहा, ‘‘भाजपा इस संशोधन के जरिए देश में नफरत फैलाना चाहती है। वे हितधारकों के साथ चर्चा किए बिना ही विधेयक को संसद में ले आए।’’
अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार को लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश किया। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के कामकाज में सुधार लाना, जटिलताओं का समाधान करना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रौद्योगिकी आधारित प्रबंधन शुरू करना है।
सदन में विधेयक पेश करते हुए मंत्री ने कहा कि इस विधेयक का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है, यह केवल संपत्ति से संबंधित है।
इस विधेयक की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने पड़ताल की थी और इसका मसौदा दोबारा तैयार किया था।
झारखंड प्रदेश भाजपा प्रमुख बाबूलाल मरांडी ने इस विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि जो दल मुस्लिम समुदाय और महिलाओं की प्रगति और विकास नहीं चाहते, वे इसका विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इस संशोधन से मुस्लिम समुदाय के गरीबों और महिलाओं को अधिकार एवं सुविधाएं मिलेंगी।’’
मरांडी ने कहा कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन को जनता को गुमराह करने से बचना चाहिए।
उन्होंने दावा किया, ‘‘कई मुस्लिम और ईसाई संगठनों ने संशोधन विधेयक का समर्थन किया है।’’
जनता दल (यू) के विधायक सरयू राय ने कहा कि यह विधेयक समय रहते उठाया गया एक कदम है जिसका उद्देश्य देश में सद्भाव को बढ़ावा देना और किसी विशेष समुदाय के प्रति तुष्टीकरण की नीति को समाप्त करना है।
झारखंड के कैबिनेट मंत्री रह चुके राय ने कहा, ‘‘संसद में विधेयक पेश करने का सरकार का कदम सराहनीय है और इसके पारित होने के बाद यह और भी अधिक लाभकारी होगा।’’
राय ने मूल वक्फ बोर्ड अधिनियम की आलोचना करते हुए दावा किया कि इसे राष्ट्रीय हितों के बजाय राजनीतिक उद्देश्यों से लागू किया गया था।
उन्होंने वक्फ (संशोधन) विधेयक पेश करके सही दिशा में कदम उठाने के लिए केंद्र सरकार की सराहना की।
भाषा रंजन