लोस में तटीय पोत परिवहन विधेयक: विपक्षी दलों ने सरकार पर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का लगाया आरोप
सुभाष सुरेश वैभव सुभाष सुरेश
- 01 Apr 2025, 07:43 PM
- Updated: 07:43 PM
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) लोकसभा में मंगलवार को तटीय पोत परिवहन विधेयक पर चर्चा हुई, जिसमें विपक्षी सांसदों ने सरकार पर निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया, वहीं सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा कि इससे समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी पोत परिवहन कंपनियों के लिए अवसर बढ़ेंगे।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने विधेयक को चर्चा और पारित कराने के लिए सदन में रखते हुए कहा कि यह विधेयक राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यावासयिक जरूरतों को लेकर भारतीय नागरिकों के स्वामित्व वाले और उनके द्वारा संचालित भारत के ध्वज लगे जहाजों की तटीय व्यापार में सहभागिता को प्रोत्साहित करेगा।
उन्होंने कहा कि मसौदा कानून में तटीय पोत परिवहन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रावधान हैं, जो जलक्षेत्र में देश की सामरिक सैन्य योजनाओं की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
सोनोवाल ने कहा कि यह विधेयक राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के अनुरूप है और तटीय नौवहन को परिवहन के एक लागत प्रभावी तरीके के रूप में बढ़ावा देता है, जो समग्र लॉजिस्टिक्स लागत को काफी कम कर सकता है।
उन्होंने कहा, "तटीय नौवहन भी परिवहन का एक टिकाऊ तरीका है, जिसमें रेल और सड़क नेटवर्क की तुलना में बहुत कम उत्सर्जन होता है। भारतीय परिवहन में इसकी हिस्सेदारी बढ़ाने से लॉजिस्टिक्स संचालन के कारण होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।"
विधयेक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मणिकम टैगोर ने कहा कि इस विधेयक के कानून का रूप लेने के बाद संबंधित महानिदेशक का अधिकार बढ़ जाएगा और निजी कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा।
उन्होंने मछुआरों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तमिलनाडु के 843 मछुआरे हाल के वर्षों में श्रीलंकाई नौसैनिकों की गोलियों के शिकार हुए हैं या वहां की जेलों में बंद हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात के तटीय क्षेत्र पर पाकिस्तान के खतरे की आशंका हो या ओडिशा में चक्रवात अथवा आंध्र प्रदेश में प्रदूषण के कारण 70 हजार प्रभावित परिवार, मछुआरों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
टैगोर ने दावा किया कि केरल में एक निजी समूह की पोत परियोजना के कारण हजारों मछुआरे बेघर हो गए हैं और उनकी आजीविका छिन गयी है। उन्होंने कहा कि सरकार को समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने प्रस्तावित कानून के अंतर्गत मौसम संबंधी चेतावनी, प्रत्येक मछुआरे के लिए जीवन रक्षक जैकेट तथा उनकी नौकाओं के लिए प्रमाणन को शामिल करने की मांग की, साथ ही तटीय नौवहन पर 30 प्रतिशत कर को हटाने की भी मांग की।
कांग्रेस के विरियातु फर्नांडिस ने कहा कि विधेयक में संबद्ध महानिदेशक को विवेकाधिकार दिया गया है जो पक्षपात को बढ़ावा देगा।
चर्चा में भाग लेते हुए भाजपा के अरुण गोविल ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भगवान राम को ‘काल्पनिक’ बताने वालों ने समुद्री व्यापार मार्ग छोटा करने के लिए रामसेतु को तोड़ने की अनुमति दे दी थी, लेकिन उसे भारी विरोध का सामना करना पड़ा था तथा 2014 में अंतत: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने इस परियोजना को निरस्त कर दिया।
वहीं, समाजवादी पार्टी (सपा) के नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने दावा किया कि इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद सारे अधिकार केंद्र को मिल जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिये सरकार एक बार फिर निजी उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाएगी। उन्होंने विधेयक में संशोधन की मांग की।
सपा के आनंद भदौरिया ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि आम आदमी के हितों की अनेदखी कर ‘‘बड़े व्यापारिक मित्र’’ को कहीं न कहीं लाभ पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से विधेयक और पुराने कानून में संशोधन लाने का काम किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने कहा कि किसी भी विधेयक को केवल क्रांति के लिए नहीं प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने समुद्री पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए सीएनजी चालित नौकाओं को बढ़ावा देने की सलाह दी।
विनियमन और निवेश के बीच संतुलन की आवश्यकता पर जोर देते हुए रॉय ने कहा, ‘‘हमें विनियमन को निवेश में बाधा नहीं बनने देना चाहिए। यह विधेयक एकरूपता और पारदर्शिता लाता है। हालांकि, हमें यह अनिवार्य करना चाहिए कि कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू माल भारतीय जहाजों द्वारा ले जाया जाए और शिपिंग मामलों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र निकाय बनाया जाए।’’
द्रमुक सांसद डी एम कथिर आनंद ने विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए दावा किया कि यह राज्य की स्वायत्तता को कमजोर करता है। पार्टी की सांसद रानी श्रीकुमार ने विधेयक में संशोधन करने की मांग करते हुए कहा कि यह अहम मुद्दों का समाधान करने में नाकाम रहा है।
रिवोल्युशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) के एन. के. प्रेमचंद्रन ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि इसे विदेशी और भारतीय जहाजों के बीच प्रतिस्पर्धा को लेकर लाया गया है।
हालांकि, उन्होंने विधेयक में विवाद समाधान तंत्र का प्रावधान नहीं किये जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कारोबार को आसान नहीं बनाएगा।
तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के लावू श्री कृष्ण देवरायलु ने कहा कि यह विधेयक बहुत ही महत्वपूर्ण है और इससे पोत परिवहन क्षेत्र में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को बढ़ावा मिलेगा।
शिवसेना (उबाठा) के अनिल देसाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समुद्री नाविकों का शोषण हो रहा है, ऐसे में इस विधेयक के आलोक में उनके पारिश्रमिक आदि पर सरकार को ध्यान देना होगा।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सदस्य सुप्रिया सुले ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को अपने मंत्रालय के कई विधेयक अलग-अलग लाने के बजाय समुद्री व्यापार से संबंधित एक समग्र विधेयक लाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक प्रभावी है लेकिन समेकित होता तो और प्रभावी होता।’’
उन्होंने भी मछुआरों के संरक्षण का मुद्दा उठाया और कहा कि जब बंदरगाह और समुद्री व्यापार के लिए नीति बनाई जाए तो उसमें मछुआरों को लेकर संवेदनशीलता होनी चाहिए।
शिवसेना के रवींद्र वायकर ने कहा कि यह विधेयक भारत को विकसित बनाने की दिशा में एक कदम है।
उन्होंने कहा कि तटीय पोत परिवहन किफायती और पर्यावरण अनुकूल माध्यम बनकर उभरा है और यह विधेयक भारत को ‘लॉजिस्टिक हब’ बनाने की दिशा में काम करेगा।
भाजपा के दर्शन सिंह चौधरी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘हमने रामसेतु पर भी विश्वास किया, लेकिन आपने तो उसके विरोध में शपथपत्र दिया। मैं याद दिलाना चाहता हूं कि आपने रामसेतु को तोड़ने की कोशिश की...।’’
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुधाकर सिंह ने केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह विधेयक सरकार की उसी नीति का विस्तार है जो लगातार विधायी प्रक्रिया को कमजोर कर रही है।
केरल कांग्रेस के सांसद के. फ्रांसिस जॉर्ज ने कहा कि विधेयक तटीय पोत परिवहन का केंद्रीकरण करता है। यह संविधान के संघीय ढांचे के विरूद्ध है।
भाषा
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