मुर्मू, मोदी ने ओडिशा के स्थापना दिवस पर बधाई दी
सुरभि नरेश
- 01 Apr 2025, 01:43 PM
- Updated: 01:43 PM
भुवनेश्वर/नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ओडिशा के स्थापना दिवस ‘उत्कल दिवस’ पर राज्य के लोगों को बधाई दी।
आज के ही दिन 1938 में तत्कालीन बिहार, बंगाल और मद्रास के कुछ हिस्सों को अलग करके भाषा के आधार पर ओडिशा को एक अलग प्रांत बनाया गया था।
राष्ट्रपति मुर्मू ओडिशा राज्य से ही आती हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यह ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विभिन्न क्षेत्रों में इसके लोगों के उल्लेखनीय योगदान का जश्न मनाने का अवसर है। ओडिशा के गर्मजोशी से भरे और आतिथ्य सत्कार प्रेमी लोगों ने अपनी गौरवशाली परंपराओं को संरक्षित करते हुए राज्य की प्रगति के लिए कड़ी मेहनत की है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आधुनिक भारत के कई निर्माता पैदा किए हैं। मैं महाप्रभु जगन्नाथ से ओडिशा की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हूं।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को ओडिशा के इतिहास, साहित्य और संगीत पर गर्व है।
मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘उत्कल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह दिन ओडिशा की गौरवशाली संस्कृति को नमन करने का है। भारत ओडिशा के इतिहास, साहित्य और संगीत पर गर्व करता है। ओडिशा के लोग मेहनती होते हैं और उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। पिछले एक साल में केंद्र और ओडिशा की सरकारें राज्य की प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर काम कर रही हैं।’’
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा, ‘‘अपनी शानदार विरासत, कलात्मक उत्कृष्टता और आध्यात्मिक भव्यता के साथ ओडिशा भारत के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक विशेष स्थान रखता है। आने वाले वर्षों में राज्य विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुए।’’
ओडिशा को शानदार सांस्कृतिक विरासत और अपार प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न राज्य बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह हमेशा से देश का रत्न रहा है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज राज्य अपनी वास्तविक क्षमता का एहसास करके भारत का विकास इंजन बनने की ओर अग्रसर है। महाप्रभु जगन्नाथ ओडिशा को समृद्धि की नयी ऊंचाइयों को छूने का आशीर्वाद दें।’’
ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने भी राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं।
सुबह मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राजभवन के पास राज्य के गौरव मधुसूदन दास की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और वहां एक समारोह में हिस्सा लिया।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘अलग ओडिशा राज्य के गठन के लिए अपार बलिदान देने वाले और हमारी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति का गौरव बढ़ाने वाले महान लोगों को विनम्र श्रद्धांजलि। आइए, आज के दिन हम एक स्वस्थ और विकसित ओडिशा के निर्माण के अपने संकल्प को और मजबूत करें।’’
बाद में वह उत्कल दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह में भाग लेने के लिए दास के जन्मस्थान कटक जिले के सत्यभामापुर गए।
राज्य सरकार राज्य की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 14 अप्रैल तक ‘ओड़िया पक्ष’ या पखवाड़ा भी मना रही है।
मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘आइए हम मन, आत्मा और हृदय से ओड़िया बनें। आइए हम उड़िया भाषा, साहित्य, भोजन, पहनावे और संस्कृति को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं और एक गौरवशाली ओडिशा का निर्माण करें। आइए हम एक अप्रैल से 14 अप्रैल तक अपने गांवों, शहरों और हर घर में उत्साह के साथ ‘ओड़िया पक्ष’ मनाएं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस अवधि के दौरान हम उन महान हस्तियों और महान नेताओं को याद करेंगे और उनका सम्मान करेंगे जिनके बलिदान के कारण 1936 में विभाजित ओडिशा का एकीकरण संभव हुआ।’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष मनमोहन सामल के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस दिन का जश्न मनाया।
विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (बीजद) ने सभी निर्वाचन क्षेत्रों में कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें विपक्ष के नेता नवीन पटनायक पार्टी मुख्यालय में एक समारोह में भाग लेने वाले हैं।
पटनायक ने कहा, ‘‘ओडिशा हमारी मां, भूमि और प्यार है। कई महान हस्तियों के प्रयासों और बलिदान के कारण अलग राज्य का गठन हुआ है। ओडिशा दिवस के अवसर पर आइए हम उन्हें याद करें और उनके दिखाए गए मार्ग पर चलें तथा ओडिशा को विकास के शिखर पर ले जाएं।’’
कांग्रेस ने भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता और प्रचुर संसाधन की भूमि ओडिशा अपनी अनूठी संस्कृति, सुंदर स्मारकों और मेहनतकश लोगों के लिए जानी जाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि ओडिशा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाता रहेगा और हम राज्य के लिए खुशी और समृद्धि की कामना करते हैं।’’
भाषा सुरभि