मैसूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में ‘राजा बनाम आम आदमी’ के बीच कड़ा मुकाबला
शोभना नरेश
- 12 Apr 2024, 03:06 PM
- Updated: 03:06 PM
(जी मंजूसाईनाथ)
मैसूर (कर्नाटक),12 अप्रैल (भाषा) कर्नाटक के मैसूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी मुकाबला ‘‘राजा बनाम आम आदमी’’ के बीच है और क्षेत्र के लोगों के बीच इस बात की दुविधा है कि वे भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के उम्मीदवार यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वाडियार तथा कांग्रेस के एम लक्ष्मण के बीच किसे चुनें।
पूर्ववर्ती मैसूरु शाही परिवार के वंशज वाडियार मैसूर लोकसभा क्षेत्र से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर रहे हैं जहां उनका मुकाबला कांग्रेस की राज्य इकाई के प्रवक्ता और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के करीबी लक्ष्मण से है।
सिद्धरमैया ने इस क्षेत्र में जितने दौरे किए हैं और प्रचार अभियान किया है उससे सर्वविदित है कि उन्होंने अपना पूरा ध्यान इन क्षेत्र पर केन्द्रित किया है।
जिले के वरुणा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सिद्धरमैया कह चुके हैं,‘‘लक्ष्मण को वोट देना मेरे लिए वोट करने जैसा है। उनकी जीत का मतलब मेरी जीत है।’’
कांग्रेस ने लक्ष्मण को चुनाव मैदान में उतार कर जाति कार्ड भी खेलने की कोशिश की है। उसने इस बात पर जोर दिया है कि लक्ष्मण इस क्षेत्र में प्रभुत्व रखने वाले कृषक समुदाय वोक्कालिगा से ताल्लुक रखते हैं।
मैसूर शहर के बाहरी इलाके थालुरु में पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे ‘अश्वत्थ कट्टे’ पर बैठे किसान राजू गौड़ा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘राष्ट्रीय मुद्दे मायने रखते हैं लेकिन हमें स्थानीय स्तर पर भी सोचना होगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के बीच ही मुकाबला नहीं है, बल्कि यह मैसूर के महाराजा और लक्ष्मण के बीच भी मुकाबला है।’’
जनता दल (सेक्युलर) का निर्वाचन क्षेत्र में काफी वोट-आधार है और उसने भाजपा के साथ गठबंधन किया है। इसे एक ऐसा कदम माना जा रहा है जिससे 26 अप्रैल को होने वाले चुनाव में 32 वर्षीय वाडियार को काफी फायदा होगा।
मैसूर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र दो जिलों मैसूर और कोडागु में फैला हुआ है। 2023 के विधानसभा चुनाव में, कांग्रेस ने पांच, जद (एस) ने दो और भाजपा ने एक सीट जीती थी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस चुनाव में स्थानीय मुद्दे भी मायने रखेंगे जिनमें पिछले 10 वर्षों में भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा का प्रदर्शन और अपने गृह जिले में सिद्धरमैया का काम शामिल है।
अमेरिका से शिक्षा प्राप्त वाडियार चुनावी राजनीति जल्दी सीखने की कोशिश करते प्रतीत हो रहे हैं, वे मतदाताओं से कन्नड़ भाषा में बात कर रहे हैं जिससे लोग उनसे जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।
सिद्धरमैया, लक्ष्मण और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार 'वोक्कालिगा के लिए वोट' अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। शिवकुमार खुद भी वोक्कालिगा हैं और उन्होंने लक्ष्मण के लिए समर्थन जुटाने के लिए समुदाय के नेताओं के साथ बैठकें की हैं।
वहीं इस सप्ताह की शुरुआत में वाडियार, भाजपा और जद (एस) के कई लोकसभा उम्मीदवारों ने प्रभावशाली आदि चुंचनगिरि मठ के वोक्कालिगा पुजारी डॉ निर्मलानंद नाथ स्वामीजी के ‘दर्शन’ किए थे।
कर्नाटक में दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं। राज्य के दक्षिणी हिस्सों में 14 लोकसभा क्षेत्रों में 26 अप्रैल को मतदान होगा वहीं उत्तरी हिस्सों में शेष 14 निर्वाचन क्षेत्रों में सात मई को दूसरे चरण में मतदान होगा।
भाषा शोभना