‘गेंदू’ से लेकर ‘बाघू’ तक बंगाली पशु लोगों को मतदान के लिए कर रहे हैं प्रेरित
गोला मनीषा
- 12 Apr 2024, 02:41 PM
- Updated: 02:41 PM
(सुप्रतीक सेनगुप्ता)
कोलकाता, 12 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव में इस बार ‘गेंदू’ से लेकर ‘बाघू’ तथा और भी जानवर लोगों को मतदान केंद्रों तक जाने के लिए मार्गदर्शन करने के अलावा उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
राज्य में जिला चुनाव अनुभाग मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने के लिए विभिन्न शुभंकरों का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनमें से ज्यादातर पशु हैं। इनके अलावा तीस्ता, टेनिडा, वोट गोपाल, बेतुल द ग्रेट, घोटोकनाथ आदि विभिन्न शुभंकर भी मतदाताओं को लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अलीपुरद्वार जिला इस उद्देश्य के लिए दुआर के गैंडों से प्रेरित ‘गेंदू’ लेकर आया है। कूचबिहार में ‘मोहनबाओ’ (एक कछुआ) लोगों को मतदान केंद्रों तक लाने का प्रयास कर रहा है।
बेंगाल टाइगर ‘बाघू’ विश्व के सबसे बड़े नदी डेल्टा सुंदरबन का घर कहे जाने वाले दक्षिण 24 परगना जिले के लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का मौका न गंवाने का अनुरोध कर रहा है। दार्जीलिंग पर्वतीय क्षेत्र में रेड पांडा यह काम कर रहा है।
एक निर्वाचन अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारे अभियान में बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता पर प्रकाश डाला गया है जिसका उद्देश्य मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित करना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘औपचारिक भाषा के बजाय हम मतदाताओं से उन पात्रों के जरिए पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके दिलों के करीब हैं। हमें लगता है कि इसका असर कहीं ज्यादा होगा।’’
जलपाईगुड़ी जिले के लिए चुनावी शुभंकर ‘तीस्ता’ है जो इस क्षेत्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली नदी के नाम वाली एक लड़की है। कोलकाता उत्तर निर्वाचन क्षेत्र में ‘टेनिडा’ मतदान के लिए उन युवाओं को प्रेरित कर रहा है जो पहली बार मतदान करेंगे। ‘टेनिडा’ पोतोल्दंगा इलाके का एक काल्पनिक निवासी है।
नदिया का ‘वोट गोपाल’ शुभंकर मध्यकालीन बंगाल के अमर दरबारी विदूषक गोपाल भर पर आधारित है। ‘बेतुल द ग्रेट’ का हास्य पात्र हावड़ा के मतदाताओं को प्रेरित कर रहा है जो उसके रचयिता नारायण देबनाथ का जन्म स्थान है।
तटीय जिले पूर्व मेदिनीपुर में केकड़ों पर आधारित एक पात्र मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित कर रहा है जबकि हुगली में महेश की जगन्नाथ रथयात्रा होर्डिंग्स और पोस्टर के जरिए निर्वाचन आयोग के संदेश मतदाताओं तक पहुंचा रही है।
बांकुड़ा के प्रसिद्ध टेराकोटा घोड़ों पर आधारित ‘घोटोकनाथ’ लोगों को उनके जिले की सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाने के अलावा उनसे मतदान करने का अनुरोध कर रहा है।
कोलकाता में केके दास कॉलेज में बांग्ला की प्रोफेसर अंजना ब्रह्मा ने कहा, ‘‘ऐसी पहल लोगों के बीच न केवल चुनावों के बारे में, बल्कि उनके इलाके की विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के बारे में भी जागरूकता फैलाती हैं।’’
भाषा गोला