अरूणाचल प्रदेश में लेकांग एकमात्र गैर जनजातीय बहुल विधानसभा क्षेत्र
राजकुमार नरेश
- 12 Apr 2024, 01:21 PM
- Updated: 01:21 PM
(उत्पल बरूआ)
महादेवपुर, 12 अप्रैल (भाषा) दिगांता मोरान अरूणाचल प्रदेश में पैदा तो हुआ है, लेकिन उसे राज्य में जमीन खरीदने का अधिकार नहीं है, परंतु उसे वोट डालने का हक है।
मोरान पूर्वी अरूणाचल प्रदेश के लेकांग विधानसभा क्षेत्र में गैर जनजातीय मतदाता है। इस पूर्वोत्तर राज्य में यह एकमात्र विधानसभा सीट है जहां गैर जनजातियों की चुनाव परिणाम में अहम भूमिका होती है।
उसने कहा, ‘‘ स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) यहां एक विवादास्पद मुद्दा है लेकिन यहां गैर जनजातीय मतदाताओं का इस निर्वाचन क्षेत्र के सभी प्रत्याशी सम्मान करते हैं और यह (उसका) एक सकारात्मक पक्ष है।’’
इस निर्वाचन क्षेत्र में 20,831 मतदाताओं में से 18000 बहुसंख्यक मतदाता जनजातीय नहीं हैं। यहां रह रहे गैर जनजातियों लोगों में मोरान, अहोम, देवोरिस, आदिवासी, कछारी और असमी मूल के अन्य समूहों के सदस्य हैं। स्थानीय बोलचाल में चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी के रूप में जाने जाते हैं।
अरूणाचल प्रदेश की सीमा के पार असम में ये प्रभावी समुदाय हैं लेकिन नामसाई जिले में यहां इन बस्तियों में ये समूह पीआरसी के लिए संघर्षरत हैं और उनकी उम्मीद किसी ऐसे व्यक्ति पर टिकी है जो उन्हें समझ सके।
इस विधानसभा क्षेत्र में पांच प्रत्याशी-- भाजपा के चौ सुजाना नामचूम, राकांपा के लिखा सोनी, कांग्रेस के ताना तमार तारा, अरूणाचल डेमोक्रेटिक पार्टी के हरेन ताली और निर्दलीय उम्मीदवार मोनेश्वर चुनाव मैदान में हैं।
नामचूम राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यों पर निर्भर हैं जबकि राकांपा के सोनी मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए विवादास्पद पीआरसी मुद्दा उठा रहे हैं।
नामचूम ने कहा, ‘‘ मैं भूमिपुत्र हूं इसलिए महादेवपुर जैसे शहरी क्षेत्र हों या ग्रामीण इलाके, मैं लोगों की समस्याएं समझता हूं।’’
इस निर्वाचन क्षेत्र के गैर जनजातीय लोगों के मुद्दों में राज्य की राजधानी ईटानगर की यात्रा तथा राज्य सरकार से कानूनी कागजात के अभाव में ऋण लेने जैसे मुद्दे हैं।
मोरान ने कहा कि अरूणाल प्रदेश में रह रहे असमी मूल के ऐसे समूहों के सदस्यों को ईटानगर या राज्य के अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए ‘इनर लाइन परमिट’ की जरूरत होती है और वे ऋण के लिए भी पात्र नहीं हैं।
वर्ष 2019 में भाजपा ने घोषणा की थी कि वह उच्चाधिकार प्राप्त समिति की रिपोर्ट पर विधानसभा में चर्चा करेगी जिसमें इन समुदायों को पीआरसी जारी करने की सिफारिश की गयी है लेकिन उसकी इस घोषणा से हिंसा का चक्र शुरू हो गया था।
चिंतित मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ऐलान किया था कि पीआरसी पर फिर कभी चर्चा नहीं की जाएगी।
भाषा राजकुमार