हेगड़े के बयान को उनका निजी विचार बताकर भाजपा की ओर से खारिज किया जाना शर्मनाक: सिद्धरमैया
अमित माधव
- 11 Mar 2024, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
बेंगलुरु, 11 मार्च (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को कहा कि सांसद अनंत कुमार हेगड़े की संविधान में संशोधन संबंधी टिप्पणी को महज निजी विचार बताकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा खारिज किया जाना ''बेहद शर्मनाक'' है।
सिद्धरमैया ने कहा कि भाजपा के ''बेपरवाह रवैये'' ने संविधान के प्रति उनकी अज्ञानता और उपेक्षा को उजागर कर दिया है। सिद्धरमैया ने कहा, "हेगड़े ने यह बयान अपने किसी व्यक्तिगत स्थान पर नहीं बल्कि संसद सदस्य के रूप में सार्वजनिक रूप से दिया था। यह स्पष्ट है कि भाजपा नेता अंतर को समझते हैं, लेकिन हेगड़े का सामना करने का साहस नहीं रखते हैं, जो आरएसएस द्वारा समर्थित हैं।’’
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘अब, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा के सामने केवल दो विकल्प हैं: हेगड़े को तुरंत अपनी पार्टी से बाहर निकालना या खुले तौर पर उनकी कही गई बातों से सहमत होना। इस आम चुनाव को इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द केंद्रित रहने दें।’’
हेगड़े ने रविवार को कहा था कि भाजपा को संविधान में संशोधन करने के लिए और ‘‘कांग्रेस द्वारा इसमें जोड़ी गईं अनावश्यक चीजों को हटाने के लिए’’ संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। उन्होंने कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा को इसके लिए 20 से अधिक राज्यों में सत्ता में आना होगा।
भाजपा ने रविवार को संविधान में संशोधन पर सांसद अनंतकुमार हेगड़े की टिप्पणी से खुद को अलग कर लिया था और इसे उनका "व्यक्तिगत विचार" बताते हुए कहा था कि वह उनसे एक स्पष्टीकरण मांगेगी। भाजपा ने कहा था कि वह संविधान को बरकरार रखने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता दोहराती है और हेगड़े की टिप्पणी उसके रुख को प्रतिबिंबित नहीं करती है।
सिद्धरमैया ने कहा कि हेगड़े ने पहले भी संविधान और आरक्षण प्रणाली के बारे में अपमानजनक बयान दिए हैं। सिद्धरमैया ने कहा, "उन्होंने लगातार दलितों और ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) का अपमान किया है और खुले तौर पर मनुस्मृति के आधार पर संविधान का मसौदा तैयार करने का अपना इरादा व्यक्त किया है। फिर भी, भाजपा इस मुद्दे पर चुप है। यह चुप्पी इसलिए है क्योंकि हेगड़े केवल भाजपा और आरएसएस की वास्तविक भावनाओं को दोहरा रहे हैं।''
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस दावा कर सकता है कि वे संविधान का सम्मान करते हैं, लेकिन अंदर से उन्होंने इसे या इसके निर्माता डॉ. बी आर आंबेडकर को कभी भी स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि "हेगड़े महज एक कठपुतली हैं; असली ताकत आरएसएस है।"
मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा कि हेगड़े ने अपने निर्वाचन क्षेत्र की उपेक्षा करके अपने मतदाताओं को भी निराश किया है, वह पिछले पांच वर्षों में सदन के पटल पर चुप रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका एकमात्र योगदान सांप्रदायिक कार्ड खेलना और हिंदुओं में डर पैदा करके मतों को विभाजित करना है।
उन्होंने कहा कि "हेगड़े का उद्देश्य आरक्षण को खत्म करना है और यह इरादा कारवार (हेगड़े का संसदीय क्षेत्र) के लोगों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।"
भाषा अमित