जेनएआई से 2030 तक वित्तीय सेवाओं की उत्पादकता 38 प्रतिशत तक बढ़ जाएगीः ईवाई
अजय
- 13 Mar 2025, 03:42 PM
- Updated: 03:42 PM
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) सृजनात्मक कृत्रिम मेधा (जेनएआई) वर्ष 2030 तक भारतीय वित्तीय सेवाओं के उत्पादकता स्तर को 34 से 38 प्रतिशत और खासकर बैंकिंग परिचालन के लिए 46 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए तैयार है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
ईवाई की भारत में जेनरेटिव एआई से उत्पादकता पर असर का आकलन करने वाली यह रिपोर्ट कहती है कि जेनएआई भारत के वित्तीय सेवा परिदृश्य को नया रूप दे रहा है, जिससे ग्राहक जुड़ाव, परिचालन दक्षता और जोखिम मूल्यांकन में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।
यह सर्वेक्षण रिपोर्ट देशभर के 125 से अधिक कॉरपोरेट अधिकारियों से बात के आधार पर तैयार की गई है। वे वित्तीय सेवाओं, खुदरा, स्वास्थ्य सेवा, जीवन विज्ञान, मीडिया और मनोरंजन, प्रौद्योगिकी, वाहन, औद्योगिक और ऊर्जा सहित विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, 74 प्रतिशत वित्तीय कंपनियों ने संकल्पना से जुड़ी परियोजनाएं शुरू की हैं, और 11 प्रतिशत उत्पादन-स्तर की तैनाती की ओर बढ़ गई हैं।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘जेनएआई में निवेश भी बढ़ रहा है, 42 प्रतिशत संगठन सक्रिय रूप से एआई पहल के लिए बजट आवंटित कर रहे हैं। वे वॉयस बॉट्स, ईमेल ऑटोमेशन, बिजनेस इंटेलिजेंस और वर्कफ़्लो ऑटोमेशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में जेनएआई को तेजी से अपना रहे हैं।’’
रिपोर्ट कहती है कि ग्राहक सेवा सर्वोच्च प्राथमिकता है, 68 प्रतिशत कंपनियां इसे जेनएआई के लिए अंजाम देने को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके बाद परिचालन (47 प्रतिशत), बिक्री (26 प्रतिशत) और सूचना प्रौद्योगिकी (21 प्रतिशत) का स्थान आता है।
ये निवेश पहले से ही अनुकूल परिणाम दे रहे हैं। करीब 63 प्रतिशत ने ग्राहक संतुष्टि के स्तर में सुधार देखा है, जबकि 58 प्रतिशत फर्मों ने लागत में कमी की बात कही है।
ईवाई इंडिया में साझेदार और वित्तीय सेवा प्रमुख प्रतीक शाह ने कहा, ‘‘वित्तीय सेवा उद्योग 2024-25 में नवाचार परीक्षण से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया में लागू हो जाएगा। फर्म जेनएआई को प्रमुख बैंकिंग प्रणाली के साथ एकीकृत कर रही हैं।’’
शाह ने कहा कि इन प्रयासों से परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, एआई-संचालित समाधानों ने सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों की प्रति इकाई लागत में दसवें हिस्से तक कम कर दिया है।
भाषा प्रेम प्रेम