भारत को अमेरिका के साथ वार्ता के दौरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी चाहिए : एसजेएम
धीरज नरेश
- 10 Mar 2025, 07:09 PM
- Updated: 07:09 PM
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा)स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने सोमवार को कहा कि भारत को बहुपक्षीय समझौतों के बजाय द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के तहत अपने विदेशी व्यापार को बढ़ाना चाहिए और अमेरिका के साथ बातचीत करते समय अपने राष्ट्रीय हितों, विशेष रूप से किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन ने एक बयान में कहा कि एसजेएम की राष्ट्रीय परिषद ने छत्तीसगढ़ में अपनी बैठक में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया।
एसजेएम की रायपुर में आयोजित दो दिवसीय बैठक सोमवार को संपन्न हुई। इसमें बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की पारस्परिक शुल्क नीति सहित कई मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रस्ताव में कहा गया है, ‘‘अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व भर के कई देशों से आयात पर उच्च शुल्क (पारस्परिक आधार पर) लगाने की अपनी मंशा की घोषणा करके वैश्विक मुक्त व्यापार प्रणाली पर सीधा हमला किया है।’’
इसमें कहा गया है कि इस कदम का उद्देश्य विनिर्माण को अमेरिका में वापस लाना है ताकि बेरोजगारी की समस्या का समाधान किया जा सके।
प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘स्वदेशी जागरण मंच की राष्ट्रीय परिषद दृढ़ता से सुझाव देती है कि भारत को बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के बजाय द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के माध्यम से अपने विदेशी व्यापार को बढ़ाना चाहिए।’’
इसमें कहा गया, ‘‘ अमेरिका और अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते करते समय राष्ट्रीय हितों, विशेषकर हमारे किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।’’
प्रस्ताव में रेखांकित किया गया कि केंद्र सरकार व्यापार समझौतों पर बातचीत करते समय किसानों के हितों और उनकी आजीविका की रक्षा करती रही है। इसमें कहा गया, ‘‘इस नीति को जारी रखने की आवश्यकता है।’’
एसजेएम के प्रस्ताव में भारतीय रुपये में विदेशी व्यापार बढ़ाने के सरकार के प्रयासों की सराहना की गई और कहा गया कि यह सुनिश्चित करने के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए कि विदेशी मुद्रा और ‘स्विफ्ट’ जैसी भुगतान प्रणालियों को ‘‘दबाव की रणनीति’’ के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति न दी जाए।
इसमें कहा गया है, ‘‘पूरा विश्व भू-आर्थिक विखंडन के दौर से गुजर रहा है और इस परिदृश्य में सफलता की कुंजी ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति है।’’
प्रस्ताव में लोगों से भारतीय उत्पादों का उपयोग करने की भी अपील की गई।
भाषा धीरज