केंद्र सरकार वक्फ संशोधन के जरिए ‘हिंदू-मुस्लिम’ विमर्श खड़ा करना चाहती है: शिवसेना (उबाठा) सांसद
शफीक नेत्रपाल
- 09 Mar 2025, 03:52 PM
- Updated: 03:52 PM
(प्रशांत रंगनेकर)
मुंबई, नौ मार्च (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने दावा किया है कि वक्फ अधिनियम में संशोधन करने को लेकर केंद्र सरकार की मंशा अच्छी नहीं है और वह इसके जरिए देश में ‘हिंदू-मुस्लिम’ विमर्श खड़ा करना चाहती है।
वक्फ संशोधन विधेयक पर विचार करने वाली संयुक्त समिति के सदस्य रहे सावंत ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक साक्षात्कार में भाजपा सांसद जगदंबिका पाल पर ‘‘गुमराह करने वाला रवैया’’ अपनाने और प्रस्तावित कानून पर खंड-वार चर्चा नहीं करने का आरोप लगाया।
उन्होंने समिति की कार्यप्रणाली को ‘‘तानाशाही भरा’’ करार दिया।
इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को सरल बनाना और उनके दुरुपयोग को रोकना है। यह विधेयक बजट सत्र के दूसरे चरण में संसद में पेश होने की संभावना है, जो 10 मार्च से चार अप्रैल तक चलेगा।
सावंत ने कहा कि 31 सदस्यों वाली समिति में शामिल 10 विपक्षी सदस्यों को जनवरी में विधेयक पर खंडवार विचार के समय को लेकर हुए हंगामे के बाद निलंबित कर दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह अपने आप में समिति के अध्यक्ष की तानाशाही भरी कार्यप्रणाली को दर्शाता है, जिन्होंने समिति के कामकाज के संचालन के लिए भाजपा नेताओं के निर्देश पर काम किया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘सरकार की मंशा अच्छी नहीं है। वे इस देश में एक विमर्श खड़ा करना चाहते हैं और वे लगातार ऐसा कर रहे हैं तथा लोगों को मूर्ख बना रहे हैं।’’
सावंत ने दावा किया, ‘‘सरकार हिंदू-मुस्लिम विमर्श खड़ा करने की कोशिश कर रही है और कह रही है कि वह हिंदुओं की रक्षा के लिए है। आप हिंदुओं के हितों की रक्षा करें। हम भी यही कर रहे हैं। हिंदुओं के हितों की रक्षा करने का मतलब दूसरे लोगों के प्रति नफरत पैदा करना नहीं है।’’
उन्होंने कहा कि जब यह विधेयक संसद में पेश किया जाएगा तो विपक्ष इसका पुरजोर विरोध करेगा।
विपक्ष द्वारा उठाई गई चिंताओं का हवाला देते हुए सावंत ने दावा किया कि समिति ने हितधारकों को आमंत्रित किया था, लेकिन उनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और (इससे संबद्ध) वनवासी आश्रम से जुड़े लोग शामिल थे।
सावंत ने आरोप लगाया, ‘‘उन्हें हितधारकों के रूप में केवल इस तथ्य का विरोध करने के लिए आमंत्रित किया गया था कि उनके (वक्फ बोर्ड) पास कई हेक्टेयर जमीन है। ये भाजपा द्वारा उत्पन्न किए गए गए भ्रम हैं।’’
उन्होंने दावा किया कि सरकार समान नागरिक संहिता की बात करती है, लेकिन वह चाहती है कि वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम हों, साथ ही कुछ अतिरिक्त अधिकारी भी हों।
अब तक बोर्ड चुनाव कराता था और मुस्लिम समुदाय के लोगों को वक्फ बोर्ड में प्रतिनिधित्व मिलता था।
सावंत ने कहा कि अब सरकार ने चुनाव न कराने का फैसला किया है और वह बोर्ड में सदस्यों को नामित करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा हो सकता है कि अधिकतर सदस्य गैर-मुस्लिम हों। क्या आप अल्पसंख्यकों को न्याय दे रहे हैं? चाहे अल्पसंख्यकों या बहुसंख्यकों के लिए हो, न्याय तो न्याय है।’’
शिवसेना (उबाठा) सांसद ने कहा, ‘‘मेरे मन में इस बात को लेकर गहरी आशंका है कि मेरे हिंदू मंदिरों का क्या होगा।’’
उन्होंने कहा कि हिंदू बंदोबस्ती अधिनियम अब भी मौजूद है। उदाहरण के लिए पंढरपुर और वाराणसी के मंदिरों को लें, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि हिंदुओं के अलावा कोई भी वहां (उनकी प्रबंध समितियों में) नहीं होगा।
मुंबई दक्षिण से सांसद सावंत ने दावा किया, ‘‘जब आप समान नागरिक संहिता की बात करते हैं, तो वे (मुस्लिम समुदाय) कहेंगे कि वक्फ (विधेयक) में जो है, वह हिंदू मंदिरों पर भी लागू होना चाहिए। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम मंदिरों की प्रबंध समितियों में हिंदुओं के अलावा किसी और को नहीं चाहते हैं।’’
भाषा शफीक