ढोल बजाकर लोगों को ‘सहरी’ में उठाने वाले ‘सहरख्वां’ ने रमजान की सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखा

ढोल बजाकर लोगों को ‘सहरी’ में उठाने वाले ‘सहरख्वां’ ने रमजान की सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखा