कलकत्ता उच्च न्यायालय ने भूपतिनगर मामले में एनआईए अधिकारियों को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी
धीरज माधव
- 10 Apr 2024, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
कोलकाता, 10 अप्रैल (भाषा)कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के भूपतिनगर में बम धमाके के संदिग्धों को पकड़ने के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की टीम द्वारा की गई छापेमारी के संबंध में दर्ज प्राथमिकी में केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों को बुधवार को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी।
अदालत ने जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए निर्देश दिया कि राज्य पुलिस को पूछताछ के लिए एनआईए अधिकारियों को 72 घंटे का नोटिस देना होगा और यह पूछताछ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा सकेगी।
एनआईए ने अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध करते हुए अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल की थी। उसने मामले में अपने अधिकारियों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने की भी प्रार्थना की थी।
न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने राज्य पुलिस को निर्देश दिया कि इस आवेदन के लंबित रहने के दौरान एनआईए के उन अधिकारियों को गिरफ्तार न किया जाए जिनके खिलाफ एक आरोपी की पत्नी ने मारपीट और गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है।
अदालत ने कहा कि वह इस मामले पर 29 अप्रैल को दोबारा सुनवाई करेगी।
एनआईए अधिकारियों पर कथित तौर पर भीड़ ने छह अप्रैल को तब हमला किया था जब वे दिसंबर 2022 में हुए विस्फोट की जांच के सिलसिले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद पूर्वी मेदिनीपुर जिले के भूपतिनगर से लौट रहे थे। दिसंबर 2022 में हुए धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई थी।
भूपतिनगर में एनआईए अधिकारियों की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। दूसरी ओर गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से एक की पत्नी की शिकायत पर केंद्रीय एजेंसी के अधिकारियों के खिलाफ एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अदालत को दी गई अर्जी में एनआईए के वकीलों ने कहा कि शिकायत गलत मंशा से दर्ज की गई और झूठे आरोप लगाए गए हैं।
अदालत ने आदेश में कहा कि मुख्य आरोपी मनोब्रत जना की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई विरोधी प्राथमिकी में, गंभीर चोट का शायद ही कोई उल्लेख है और केस डायरी में कथित पीड़ितों की चिकित्सा रिपोर्ट में केवल हल्की खरोंच/या सूजन, के निशान सामने आए हैं; फिर भी प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 325 (गंभीर चोट पहुंचाना) जोड़ी गई है।
न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने कहा,‘‘इस मामले में यह कठोर प्रावधान प्रथम दृष्टया भी नहीं बनता है।’’
भाषा धीरज