केरल के विझिंजम बंदरगाह पर महिलाएं क्रेन संचालन का कार्य कर रहीं
राखी शोभना रंजन
- 08 Mar 2025, 03:26 PM
- Updated: 03:26 PM
(हैरी एम पिल्लई)
तिरुवनंतपुरम, आठ मार्च (भाषा) केरल का विझिंजम बंदरगाह न केवल देश का एक प्रमुख ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल है, बल्कि यह महिलाओं को रोजगार देने के लिए भी जाना जा रहा है। स्थानीय मछुआरा समुदाय की महिलायें यहां विशाल स्वचालित कैंटीलीवर रेल माउंटेड गैंट्री (सीआरएमजी) क्रेनों का संचालन कर रही हैं।
पुरुषों के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में नौ महिलाएं अपने पुरुष सहकर्मियों के साथ काम कर रही हैं।
बंदरगाह के एक अधिकारी के अनुसार ये महिलायें देश में पहली बार इस तरह की क्रेनों का संचालन कर रही हैं, क्योंकि ये पूरी तरह स्वचालित मशीनें भारत के किसी अन्य बंदरगाह पर उपलब्ध नहीं हैं।
इन महिलाओं में से सात आसपास के मछुआरा समुदाय से आती हैं जिन्होंने वर्ष 2022 में बंदरगाह निर्माण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। सभी स्नातक उत्तीर्ण हैं और अधिकतर के लिए यह पहली नियमित नौकरी है।
प्रीनू तीस वर्ष की है और उसने बीएससी केमिस्ट्री में स्नातक की उपाधि हासिल की है। वह पहले शिक्षिका बनना चाहती थी। उनके पिता और पति मछुआरे हैं, लेकिन मछली पकड़ने से होने वाली आय पर्याप्त नहीं थी।
इसी दौरान उन्होंने सुना कि बंदरगाह स्थानीय निवासियों, विशेष रूप से विझिंजम की महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए क्रेन चलाने वालो की भर्ती कर रहा है।
उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, "मुझे बताया गया कि यह एक स्थायी नौकरी है, इसलिए मैंने आवेदन किया और मेरा चयन हो गया। छह महीने पहले मैंने यहां काम शुरु किया, एक महीने का प्रशिक्षण लिया और फिर बतौर पर्यवेक्षक कुछ महीने काम किया। अब मैं स्वतंत्र रूप से क्रेन चला रही हूं।"
उन्होंने कहा कि उनकी कमाई से परिवार को आर्थिक मजबूती मिली है। हालांकि स्वचालित क्रेन होने के कारण काम ज्यादा मुश्किल नहीं है।
बंदरगाह अधिकारी ने बताया कि नौ महिलाओं समेत 20 लोग क्रेन संचालन का कार्य करते हैं।
एल कार्तिका (27) पहले कोच्चि बंदरगाह में क्रेन संचालक के रूप में एक साल काम कर चुकी हैं। मूल रूप से नेय्याटिंकारा की निवासी कार्तिका ने वर्ष 2023 में विझिंजम बंदरगाह में सेवाएं देना शुरु किया। उन्होंने इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया है।
उन्होंने कहा, "जब मैंने यहां काम शुरु किया, तो कुछ भी नहीं था। मुझे गुजरात में एक महीने के लिए प्रशिक्षण पर भेजा गया और जब मैं लौटी, तो क्रेनें आ चुकी थीं।"
कार्तिका के मुताबिक, सभी क्रेन संचालक 12 घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं। पहली शिफ्ट सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक और दूसरी रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक रहती है। कंपनी कर्मचारियों के लिए शिफ्ट-आधारित परिवहन सुविधा भी प्रदान करती है।
बंदरगाह सूत्रों के अनुसार, अन्य महिला क्रेन संचालकों में एस अनीशा (29), एल सुनीता राज (35), डी आर स्टेफी रिबेरा (30), आर एन राजीथा (36), पी आशा लक्ष्मी (33), ए वी श्रीदेवी (37) और जे डी नथाना मैरी शामिल हैं।
विझिंजम बंदरगाह का विकास 'अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड' (एपीएसइजेड) ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत 8,867 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया है। इसे चार दिसंबर 2023 को व्यावसायिक संचालन प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ था और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बंदरगाह के औपचारिक उद्घाटन का इंतजार है।
बंदरगाह के वर्ष 2028 तक पूरी क्षमता से चालू होने की उम्मीद है।
भाषा राखी शोभना