टीबी उन्मूलन में सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए मिसाल कायम कर रहा
सुरभि पारुल
- 07 Mar 2025, 04:30 PM
- Updated: 04:30 PM
गोरखपुर, सात मार्च (भाषा) भारत से तपेदिक (टीबी) को खत्म करने के केंद्र के अभियान में नेपाल की सीमा से सटा उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला राज्य के अन्य जिलों के लिए एक आदर्श बन गया है। स्थानीय प्रशासन ने इस खतरनाक बीमारी से निपटने के लिए रोग की शीघ्र पहचान और उपचार के प्रयासों को तेज कर दिया है।
सौ दिन के अखिल भारतीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत सिद्धार्थनगर जिला प्रशासन ने ‘वॉर रूम’ की स्थापना की है, जो मरीज की पहचान और उसके उपचार एवं आगे के चिकित्सीय परामर्श के लिए लागू विभिन्न उपायों के कार्यान्वयन पर नजर रखता है।
शुरुआती चरण में टीबी की पहचान के लिए एक नयी रणनीति तैयार की गई है, जिसके तहत रोग के विकास के उच्च जोखिम वाले लोगों की ‘एक्स-रे’ से जांच की पेशकश की गई है।
इसके लिए घर-घर जाकर जांच के प्रयासों को तेज करते हुए विशेष रूप से मधुमेह रोगियों, धूम्रपान करने वालों, शराब का सेवन करने वालों, एचआईवी से संक्रमित लोगों, टीबी के इतिहास वाले व्यक्तियों, बुजुर्गों और टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले लोगों जैसे उच्च जोखिम वाले समूहों के बीच ‘अल्ट्रापोर्टेबल हैंड-हेल्ड एक्स-रे’ उपकरणों की मदद से जांच की जा रही है।
लक्षणहीन और लक्षण वाले दोनों ही व्यक्तियों की ‘एक्स-रे’ उपकरण का इस्तेमाल करके जांच की जाती है। असमान्य लक्षण वाले लोगों को न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (एनएएटी) से गुजरना पड़ता है, जिससे तपेदिक के रोगियों की पहचान की जाती है।
सिद्धार्थनगर के जिलाधिकारी राजा गणपति आर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जिले की 32.1 लाख आबादी में से लगभग 12.92 लाख संवेदनशील लोगों की जांच की गई और उनमें से 2,343 नये तपेदिक रोगियों की पहचान बीमारी के शुरुआती चरण में की गई।
उन्होंने बताया, ‘‘पिछले एक साल में जिले की 216 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया है। साथ ही जिन 2,343 लोगों में टीबी की पहचान की गई है, उन्हें ‘नि-क्षय मित्रों’ के माध्यम से ‘निक्षय पोषण किट’ प्रदान की जा रही है।’’
गणपति ने कहा, ‘‘हम शुरुआती स्तर पर पहचान, प्रारंभिक उपचार, प्रारंभिक पोषण और प्रारंभिक रोकथाम के लिए विभिन्न उपायों के कार्यान्वयन पर लगातार नजर रख रहे हैं। जनभागीदारी अभियान का एक प्रमुख पहलू है और इसे लोगों का आंदोलन बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’’
जिलाधिकारी ने कहा कि जनवरी से अब तक 21,165 लोगों को टीबी निवारक उपचार पर रखा गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम सिद्धार्थनगर से टीबी के समयबद्ध उन्मूलन के लिए सभी जरूरी प्रयास कर रहे हैं।’’
उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. पार्थसारथी सेन शर्मा ने कहा कि 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसे पहले राज्य के 15 जिलों में लागू किया गया था और अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी 75 जिलों में इसका विस्तार करने का निर्णय लिया है।
पार्थसारथी ने कहा, ‘‘हमारा प्रयास मौजूदा ‘एक्स-रे’ मशीनों और ‘एनएएटी’ मशीनों का अधिकतम उपयोग करना, निक्षय पोषण योजना के तहत मौद्रिक लाभ भेजना, रोगियों को निक्षय मित्रों से जोड़ना, कमजोर आबादी को टीबी निवारक उपचार देना और सामाजिक समावेश पर ध्यान केंद्रित करना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी मोर्चों पर काम कर रहे हैं और राज्य टीबी को खत्म करने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जो एक ऐतिहासिक अवसर होगा।’’
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पिछले साल सात दिसंबर को 347 हस्तक्षेप जिलों पर ध्यान केंद्रित करते हुए तपेदिक के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने की घोषणा की थी, जिसका दायरा बढ़ाते हुए बाद में 455 जिलों को इसमें शामिल कर लिया गया।
विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले समूहों में निदान, उपचार और सहायता सेवाओं को बढ़ाकर भारत 2025 तक टीबी उन्मूलन की दिशा में एक व्यापक दृष्टिकोण के तहत मंच तैयार कर रहा है।
हालांकि, इस बीमारी से लड़ने में एक बड़ी बाधा सामाजिक लांछन का डर है, जिसके कारण लोग जांच के लिए आसानी से आगे नहीं आते।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेंद्र भटनागर ने कहा, ‘‘इस बाधा को दूर करने के लिए उन्हें सामान्य स्वास्थ्य शिविरों में भाग लेने के नाम पर जांच के लिए बुलाया जाता है। टीबी रोगियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की जाती है और कई मामलों में निक्षय पोषण किट उनके घर तक पहुंचा दी जाती है।’’
उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर की 216 क्षय रोग मुक्त ग्राम पंचायतों को उनके प्रयासों के लिए 2024 में महात्मा गांधी की कांस्य प्रतिमा देकर सम्मानित किया जाएगा।
भाषा सुरभि