ज्यादा नि:शक्तता वाले दिव्यांग जनों को रोजगार में प्राथमिकता दे मप्र सरकार : उच्च न्यायालय
नरेश मनीषा ब्रजेन्द्र
- 05 Mar 2025, 03:25 PM
- Updated: 03:25 PM
इंदौर, पांच मार्च (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपने एक परिपत्र का सख्ती से पालन करते हुए अधिक निःशक्तता वाले दिव्यांग जनों को शासकीय रोजगार में प्राथमिकता प्रदान करे।
उच्च न्यायालय ने ज्यादा निःशक्तता से जूझ रहे पांच लोगों की याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह निर्देश दिया। इन याचिकाओं में कहा गया था कि राज्य सरकार दिव्यांग जनों की नियुक्ति में अपने ही परिपत्र की ‘पूरी तरह अनदेखी’ कर रही है।
राज्य सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के वर्ष 2018 में जारी परिपत्र में कहा गया था, ‘‘प्राय: देखने में आया है कि जिन दिव्यांग जनों की नि:शक्तता का प्रतिशत कम है, उन्हें शासकीय सेवा में आरक्षण दिया जा रहा है। जिन दिव्यांगजनों की नि:शक्तता का प्रतिशत अधिक है, उन्हें शासकीय सेवा में नियुक्ति नहीं दी जा रही है। यह कार्यवाही दिव्यांग जन अधिकार नियम 2017 में उल्लेखित प्रावधान की मंशा के विपरीत है। अत: जिन दिव्यांग जनों की नि:शक्तता अधिक है, उन्हें प्राथमिकता दी जाए।’’
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने इस परिपत्र की रोशनी में राज्य सरकार के कौशल विकास विभाग, देवास जिले की कन्नौद नगर पालिका परिषद और रतलाम जिले की जावरा नगर पालिका परिषद द्वारा दिव्यांग कोटा के तहत चतुर्थ श्रेणी पदों पर कुल पांच उम्मीदवारों की भर्ती को 24 फरवरी को निरस्त कर दिया।
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देशित किया कि वह इन पदों पर दिव्यांगों की भर्ती के लिए फिर से विज्ञापन जारी करे और इस सिलसिले में अपने 2018 के परिपत्र का सख्ती से पालन करते हुए नियुक्ति प्रक्रिया को चार महीने के भीतर पूरा करे।
याचिकाकर्ताओं की वकील शन्नो शगुफ्ता खान ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उच्च न्यायालय का फैसला ऐतिहासिक है। इस फैसले से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले ऐसे उम्मीदवारों के लिए भी सरकारी रोजगार मिलने की राह खुल सकेगी जिनकी अब तक नियुक्ति में सरासर अनदेखी की जाती रही है।’’
सरकारी रोजगार की गुहार के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने वाले पांच याचिकाकर्ताओं में इंदौर की गुरदीप कौर वासु (34) शामिल हैं। वह बोल, देख और सुन नहीं सकतीं, लेकिन तमाम शारीरिक बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुकी हैं।
शहर में दिव्यांगों के लिए काम करने वाली गैर सरकारी संस्था ‘आनंद सर्विस सोसायटी’ पढ़ाई में वासु की मदद करती है।
संस्था की निदेशक और सांकेतिक भाषा की जानकार मोनिका पुरोहित ने बताया, ‘‘वासु किसी व्यक्ति के हाथों और उंगलियों को दबाकर उससे संकेतों की भाषा में संवाद करती हैं। हमें भी उन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए इसी भाषा में उनके हाथों और अंगुलियों को दबाना होता है।’’
पुरोहित ने कहा कि वासु, समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकारी सेवा में आना चाहती हैं।
भाषा हर्ष
नरेश मनीषा