मलाप्पुरम में मंदिर बना हिंदू-मुस्लिम सद्भावना की मिसाल
धीरज माधव
- 10 Apr 2024, 04:59 PM
- Updated: 04:59 PM
मलाप्पुरम (केरल), 10 अप्रैल (भाषा) केरल के मुस्लिम बहुल मलाप्पुरम में सदियों पुराना मंदिर हिंदू-मुस्लिम सद्भावना की मिसाल पेश कर रहा है जिसके जीर्णोद्धार में मुस्लिम समुदाय से खुलकर दान दिया और अब मंदिर में स्थापित देवी की नयी प्रतिमा की अगले महीने प्राण प्रतिष्ठा होगी। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि कोंडोट्टी के मुथुवल्लूर स्थित 400 साल पुराने श्री दुर्गा भगवती मंदिर के जीर्णोद्वार में हिंदुओं और मुस्लिमों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है।
मंदिर प्रशासन ने बताया कि मंदिर के जीर्णोद्वार पर अब तक करीब 50 लाख रुपये खर्च किए गए हैं और इनमें से करीब आधी राशि मुस्लिम समुदाय ने दान में दी है।
मंदिर प्रशासन के मुताबिक जीर्णोद्धार के पहले चरण का काम पूरा हो गया है और 173 सेंटीमीटर लंबी देवी दुर्गा की प्रतिमा के प्राण प्रतिष्ठा के लिए सात मई को तीन दिवसीय समारोह का आयोजन किया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष चंद्रन पी ने बताया कि मंदिर का जीर्णोद्धार 2015 में शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि यह मंदिर सरकार के अधीन मालाबार देवस्वम बोर्ड के अंतर्गत आता है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’से कहा, ‘‘ हमने धार्मिक और सांप्रदायिक विभाजन से परे जाकर लोगों से योगदान करने का अनुरोध किया.... कई लोगों ने बड़ा योगदान दिया और यह कहते हुए मुझे खुशी हो रही है कि इसके लिए मुसलमानों ने बड़ा हिस्सा दान दिया।’’
चंद्रन ने याद किया कि कैसे इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) प्रमुख सादिक अली शिहाब थंगल और पी के कुन्हालीकुट्टी जैसे वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने योगदान के उनके अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और मंदिर के जीर्णोद्वार के लिए पूरा समर्थन दिया।
उन्होंने बताया कि यहां तक पिछले साल दान एकत्र करने के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान थंगल स्वयं मंदिर भी आए थे।
इस साल मार्च में मंदिर में आयोजित एक समारोह के दौरान मंदिर के तंत्री (पुजारी) थेक्किनियेदथ थरानानेल्लूर पद्मनाभन उन्नी नंबूथिरीपाद ने कुन्हालीकुट्टी को एक प्रेम संदेश ‘पत्रिका’ की भेंट की थी।
चंद्रन ने बताया कि आईयूएमएल विधायक कुन्हालीकुट्टी अन्य व्यस्तताओं के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके, इसलिए मंदिर समिति के सदस्यों ने बाद में उनके आवास पर उन्हें पत्रिका भेंट की।
उन्होंने बताया कि एक मुस्लिम व्यक्ति ने दो लाख रुपये का योगदान दिया जबकि दूसरे ने एक लाख रुपये जीर्णोद्धार के लिए दिए।
चंद्रन ने बताया, ‘‘यह मंदिर के जीर्णोद्धार का आठवां साल है। प्राण प्रतिष्ठा के लिए देवी की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है। डेढ़ एकड़ में फैले मंदिर प्रांगण में बने चार उप मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा पहले ही हो चुकी है।’’
मंदिर पदाधिकारी ने बताया कि यहां तक मंदिर रमजान के महीने में मुस्लिमों के लिए ‘नोम्बू थुरा’ (इफ्तारी) का आयोजन करता है और हिंदू समुदाय के लोग भी इसमें हिस्सा लेते हैं।
भाषा धीरज