1859 में तीन मार्च को ही इलाहाबाद-कानपुर रेलखंड का पूर्ण परिचालन शुरू हुआ
धीरज माधव
- 03 Mar 2025, 08:21 PM
- Updated: 08:21 PM
(कुणाल दत्त)
प्रयागराज, तीन मार्च (भाषा) रेलवे के इतिहास में तीन मार्च विशेष है क्योंकि इसी दिन 1859 में 119 मील लंबे इलाहाबाद-कानपुर खंड पर रेलगाड़ियों का पूर्ण रूप से परिचालन शुरू हुआ था।
यह उपलब्धि रेलवे ने स्वतंत्रता संग्राम की पहली लड़ाई के बमुश्किल दो साल बाद हासिल की थी क्योंकि परियोजना इन दो शहरों में हुई उथल-पुथल भरी घटनाओं से प्रभावित हुई थी।
इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक महाकुंभ का आयोजन हुआ और अन्य परिवहन साधनों के साथ-साथ रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से तीर्थयात्रियों को इस शहर तक लाने में अहम भूमिका निभाई, जैसा कि वह पिछले 160 सालों से कर रहा है।
एक वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने सोमवार को बताया कि शहर में नौ रेलवे स्टेशन कार्यरत हैं, लेकिन 45 दिनों तक चले महाकुंभ के दौरान यात्रियों का अधिकांश बोझ प्रयागराज जंक्शन (पहले इलाहाबाद जंक्शन) ने संभाला।
भारतीय रेलवे द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान 17,000 से अधिक रेलगाड़ियों का परिचालन किया गया और अधिकारियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से भीड़ को प्रबंधित करने के लिए कई कदम उठाए थे।
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि कांत त्रिपाठी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘प्रयागराज में नौ स्टेशन अलग-अलग जोन के अंतर्गत आते हैं। प्रयागराज जंक्शन, नैनी, प्रयागराज छिवकी और सूबेदारगंज उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के अंतर्गत आते हैं; जबकि प्रयाग, प्रयागराज संगम और फाफामऊ उत्तर पूर्वी रेलवे (एनईआर) के अंतर्गत आते हैं। रामबाग और झूसी स्टेशन उत्तर रेलवे (एनआर) के अंतर्गत आते हैं। इस प्रकार प्रयागराज भी तीन रेलवे जोन का ‘संगम’ है।’’
प्रयागराज जंक्शन का पुनर्विकास 1950 के दशक में किया गया था और यह पुराना कानपुर स्टेशन के साथ भारत के सबसे ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों में से हैं।
इलाहाबाद -कानपुर रेलखंड पर पूर्ण रूप से परिचालन शुरू होने की 166वीं वर्षगांठ पर ‘पीटीआई-भाषा’ने कुछ रेलवे अधिकारियों और विशेषज्ञों से बात की, जिन्होंने पुराने स्टेशनों, पुलों और तत्कालीन ईस्ट इंडियन रेलवे (ईआईआर) पर व्यापक शोध किया है, जिसने हावड़ा और दिल्ली के बीच रेल लाइन का निर्माण किया था।
दक्षिण पश्चिम रेलवे (एसडब्ल्यूआर) के पूर्व अतिरिक्त महाप्रबंधक और आसनसोल डिवीजन के पूर्व मंडल रेलवे प्रबंधक पी के मिश्रा ने बताया,‘‘पूरा खंड मार्च 1859 में खोला गया था, लेकिन आंशिक रूप से रेलगाड़ियों का परिचालन 1857 से ही चल रही थीं।’’
मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इलाहाबाद और कानपुर स्टेशन 1857 के विद्रोह के दौरान जला दिए गए थे और उन्हें दोबारा बनाया गया था। उनका निर्माण 1858 के बाद किया गया था।’’
पुराने इलाहाबाद स्टेशन के औपनिवेशिक युग की झलक कुछ पुरानी तस्वीरों और पोस्टकार्ड में देखी जा सकती है, पुराने कानपुर स्टेशन को रेलवे ने एक विरासत इमारत के तौर पर संरक्षित किया है और यहां एक प्रशिक्षण संस्थान भी है। अब रेल परिचालन मुख्य रूप से 90 साल से ज्यादा पुराने कानपुर सेंट्रल स्टेशन से होता है।
‘‘कलकत्ता से कानपुर 632 मील बंबई से 962 मील, समुद्र तल से 414 फुट की ऊंचाई’’ दर्शाने वाली एक मूल पट्टिका अब भी पुरानी पटरियों के सामने एक दीवार में लगी हुई है, जो पहले एक प्लेटफार्म क्षेत्र था।
एनसीआर जोन की वेबसाइट के अनुसार, ‘‘1852 में इलाहाबाद से कानपुर रेलखंड निर्माण का काम शुरू हुआ। फरवरी 1857 में, इलाहाबाद से कानपुर की ओर 26 मील (41.8 किलोमीटर) दूर एक इंजन चलाया गया। इलाहाबाद से कानपुर तक का खंड शुरू में केवल सैनिकों और उपकरणों की आवाजाही के लिए रणनीतिक उद्देश्यों के लिए खोला गया था। यह खंड 3.3.1859 को जनता के लिए खोला गया।’’
इलाहाबाद डिवीजन का नाम 2020 में बदलकर प्रयागराज डिवीजन किया गया। यह डिवीजन 2025 में 100 साल पूरे करने वाला है।
भाषा धीरज