बंगाल: वामपंथी और टीएमसीपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प
नोमान रंजन
- 03 Mar 2025, 04:23 PM
- Updated: 04:23 PM
कोलकाता, तीन मार्च (भाषा) शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छात्र शाखा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की सोमवार को विश्वविद्यालय परिसरों में हड़ताल के आह्वान के दौरान विभिन्न वामपंथी छात्र संगठनों और तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (टीएमसीपी) के समर्थकों के बीच कई स्थानों पर झड़पें हुई।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के मेदिनीपुर शहर, दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी, कूचबिहार जिले और पूर्व मेदिनीपुर जिले के पंसकुरा में टीएमसी की छात्र शाखा के सदस्यों और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआईडीएसओ) और एसएफआई के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें हुईं।
पश्चिम मेदिनीपुर जिले के विद्यासागर विश्वविद्यालय और मेदिनीपुर कॉलेज, पूर्व मेदिनीपुर के पंसकुरा बनमाली कॉलेज और सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय में टीएमसीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों के बीच मारपीट हुई। यह तब हुई जब टीएमसीपी के कार्यकर्ताओं ने वामपंथी छात्रों को हड़ताल लागू कराने और कक्षाएं स्थगित कराने से रोकने की कोशिश की।
हड़ताल के कारण कई जिलों में सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों में कक्षाएं बाधित रहीं।
कोलकाता में यादवपुर और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालयों के परिसर सुनसान रहे, क्योंकि आम छात्र, संकाय सदस्य और अन्य कर्मचारी यहां नहीं पहुंचे जबकि एसएफआई के सदस्य सुबह 10 बजे से शुरू हुई एक दिन की हड़ताल के लिए परिसरों में एकत्र हुए।
एसएफआई, एआईडीएसओ, आईसा और आरएसएफ के कार्यकर्ताओं ने यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में नारे लगाकर और ढोल बजाकर प्रदर्शन किया। हड़ताल को लागू करने के लिए उन्होंने कई विभागों के दरवाजे भी बंद कर दिए।
यादवपुर विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि परिसर में कोई कक्षाएं नहीं आयोजित की जा सकीं।
वामपंथी छात्र संगठनों के गढ़ प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय में एसएफआई के सदस्यों ने तृणमूल कांग्रेस की बल प्रयोग करने की रणनीति तथा एक मार्च को शिक्षा मंत्री के भड़काऊ आचरण के खिलाफ तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन किया।
विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कहा, "आज विश्वविद्यालय में कोई कक्षा नहीं हुईं।"
अधिकारियों ने बताया कि कलकत्ता विश्वविद्यालय, रवींद्र भारती विश्वविद्यालय और बर्दवान विश्वविद्यालय जैसे अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के परिसर भी सुनसान रहे, क्योंकि अधिकांश कक्षाएं नहीं लगीं। हालांकि सेमेस्टर परीक्षाएं निर्धारित समय के अनुसार आयोजित की गईं।
यादवपुर और प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालयों के विपरीत, इन परिसरों में एसएफआई के कार्यकर्ताओं की संख्या कम देखी गई।
सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की छात्र शाखा तृणमूल छात्र परिषद के कार्यकर्ता भी परिसरों में देखे गए।
हड़ताल से वाहनों की आवाजाही प्रभावित नहीं हुई है क्योंकि एसएफआई कार्यकर्ताओं ने सड़क यातायात में कोई व्यवधान नहीं डाला और स्कूली विद्यार्थी सुबह से ही राज्य भर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर बिना दिक्कत के पहुंचे। पश्चिम बंगाल बोर्ड की 12वीं कक्षा की परीक्षाएं भी सोमवार को शुरू हो गईं।
यादवपुर विश्वविद्यालय में एक मार्च को हुए हंगामे के दौरान बसु के काफिले की एक कार की टक्कर लगने से दो छात्र घायल हो गए थे। वामपंथी संगठन से जुड़े विद्यार्थियों ने छात्र संघ चुनाव कराने पर चर्चा की मांग करते हुए मंत्री को परिसर से बाहर जाने से रोकने की कोशिश की थी। प्रदर्शनकारियों ने बसु की कार के शीशे को क्षतिग्रस्त कर दिए थे जिससे उन्हें चोटें आईं।
बसु शनिवार को ‘पश्चिम बंगाल कॉलेज एवं विश्वविद्यालय प्राध्यापक संघ’ (डब्ल्यूबीसीयूपीए) की वार्षिक आम बैठक में शामिल होने के लिए यादवपुर विश्वविद्यालय गए थे।
एसएफआई के राज्य समिति सदस्य शुवाजीत सरकार ने आरोप लगाया, "टीएमसी द्वारा आश्रय प्राप्त बाहरी लोगों ने शनिवार को बसु की मौजूदगी में डब्ल्यूबीसीयूपीए की वार्षिक आम बैठक के दौरान यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में हिंसा और तोड़फोड़ को उकसाया था।"
शुवाजीत सरकार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, "छात्र केवल कुलपति की मौजूदगी में शिक्षा मंत्री से चर्चा करना चाहते थे, लेकिन उन्होंने (मंत्री ने) छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार किया और गुस्से में परिसर से बाहर जाने की कोशिश की।"
उन्होंने कहा, “दो छात्रों के घायल होने के लिए बसु जिम्मेदार हैं और हम राज्य मंत्रिमंडल से उनके इस्तीफे की तथा यादवपुर विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति को भड़काने के लिए उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई की मांग करते हैं।"
भाषा
नोमान