तमिलनाडु : भाषा विवाद पर राज्यपाल और द्रमुक आमने-सामने
राखी मनीषा
- 28 Feb 2025, 03:57 PM
- Updated: 03:57 PM
चेन्नई, 28 फरवरी (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने शुक्रवार को राज्य की भाषा नीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार की "कठोर" दो-भाषा नीति के कारण दक्षिणी तमिलनाडु के युवा अवसरों से वंचित हो रहे हैं।
उन्होंने इसे "अनुचित" बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र "उपेक्षित पिछवाड़ा" बन चुका है।
सत्तारूढ़ द्रमुक ने रवि की टिप्पणियों के लिए उनकी आलोचना करते हुए उन पर तमिलनाडु के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया।
राज्यपाल रवि ने तूतिकोरिन और तिरुनेलवेली जिलों का दौरा करते हुए विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर अपनी बातचीत का जिक्र किया और कहा कि उन्होंने शिक्षा, व्यवसाय, स्वास्थ्य, पर्यटन, युवा स्टार्टअप, महिला उद्यमिता और एमएसएमइ क्षेत्र के लोगों के साथ चर्चा की।
उन्होंने लिखा, "इस क्षेत्र के लोगों में सकारात्मक ऊर्जा और विकास की इच्छा है, लेकिन वे अनेक कठिनाइयों और व्यवस्थागत बाधाओं का सामना कर रहे हैं।"
राज्यपाल ने कहा कि यह क्षेत्र अपार मानव और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद औद्योगीकरण और अवसरों की कमी महसूस करता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं में नशीले पदार्थों का दुरुपयोग एक गंभीर समस्या है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 को लागू करने की मांग बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यहां के युवा पड़ोसी राज्यों के युवाओं की तुलना में खुद को पिछड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं जिसका मुख्य कारण राज्य सरकार की दो-भाषा नीति है। ‘‘हिंदी विरोध के नाम पर उन्हें अन्य दक्षिण भारतीय भाषाएं भी सीखने नहीं दी जातीं। यह सरासर अन्याय है। युवाओं को अपनी पसंद की भाषा पढ़ने का विकल्प मिलना चाहिए।’’
राज्यपाल की टिप्पणी पर तमिलनाडु के कानून मंत्री एस. रघुपति ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, "तमिलों को उनकी भाषा के प्रति प्रेम सिखाने की जरूरत नहीं है। राज्यपाल बार-बार तमिल, तमिलनाडु और तमिल थाई वाझ्थु (राज्य गान) के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं।"
द्रमुक नेता ने आरोप लगाया, "तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था और शिक्षा में हुई प्रगति को देखकर राज्यपाल इसे बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।"
रघुपति ने सवाल किया, "राज्यपाल बताएं कि दक्षिणी तमिलनाडु किस क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है? तमिलनाडु ने शिक्षा, चिकित्सा और अर्थव्यवस्था में अन्य भारतीय राज्यों की तुलना में अभूतपूर्व प्रगति की है,जो केंद्र सरकार के आंकड़ों में भी स्पष्ट है।"
उन्होंने दो-भाषा नीति का समर्थन करते हुए कहा, "तमिलनाडु की उपलब्धियां इसी भाषा नीति के कारण संभव हुई हैं। तमिल अच्छी तरह जानते हैं कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) के जरिए हिंदी थोपने की साजिश की जा रही है।"
राज्यपाल की "भाषा चुनने की स्वतंत्रता" वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए द्रमुक नेता ने कहा, "हमें अच्छी तरह पता है कि पसंद क्या होती है और थोपना क्या होता है। ऐसे नाटक तमिलनाडु में नहीं चलेंगे।"
द्रमुक लंबे समय से केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाती रही है जबकि केंद्र सरकार इसे नकारती आई है। द्रमुक का कहना है कि तीन-भाषा फॉर्मूला के जरिए हिंदी को जबरदस्ती लागू करने की कोशिश की जा रही है लेकिन तमिलनाडु की दो-भाषा नीति इस खतरे को रोकने के लिए बनी हुई है।
भाषा राखी