तेलंगाना सुरंग दुर्घटना: फंसे हुए लोगों तक पहुंचने के लिए बाधाएं हटाकर बचाव अभियान तेज किया गया
शोभना माधव
- 27 Feb 2025, 08:15 PM
- Updated: 08:15 PM
(फोटो के साथ)
नगरकुरनूल (तेलंगाना), 27 फरवरी (भाषा) तेलंगाना के नगरकुरनूल में श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (एसएलबीसी) के एक निर्माणाधीन खंड के आंशिक रूप से ढहने के बाद सुरंग में फंसे आठ व्यक्तियों को बचाने में जुटी टीम ने टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के उस हिस्से और अन्य अवरोधकों को काटना शुरू कर दिया है जो फंसे हुए व्यक्तियों की मौजूदगी की आशंका वाले स्थान तक पहुंचने में बाधक बन रहे हैं।
नगरकुरनूल के पुलिस अधीक्षक (एसपी) वैभव गायकवाड़ ने कहा कि सुरंग में ‘कन्वेयर बेल्ट’ के क्षतिग्रस्त हिस्से की दिन के दौरान मरम्मत हो जाने की संभावना है जिससे मलबा हटाने में मदद मिलेगी।
अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या गैस कटर ने काम करना शुरू कर दिया है, तो उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हां, यह पहले ही हो चुका है (गैस कटर वाली मशीनें अंदर चली गई हैं)। (यहां तक कि) रात के समय भी उन्होंने कुछ कटाई की। हां, यह कल रात से ही शुरू हो चुका है।’’
तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि बचाव एवं राहत कार्य जोरों पर है और यह अभियान दो दिनों में पूरा हो जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘ मैं आपको दो बातें आश्वस्त कर सकता हूं। दो दिनों में बचाव और राहत अभियान पूरा हो जाएगा और लगभग दो या तीन महीनों में हम (एसएलबीसी परियोजना) काम फिर से शुरू करेंगे और इस परियोजना को रिकॉर्ड समय में पूरा करेंगे। यह एक प्राकृतिक दुर्घटना है। मलबा और मशीन को हटा दिया जाएगा’’
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ चाहे एक दिन हो, दो दिन हो या ढाई दिन हो, काम जोरों पर है।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और विशेषज्ञ समन्वित एवं एकीकृत तरीके से काम कर रहे हैं।
रेड्डी ने बुधवार को कहा कि अंदर फंसी टीबीएम को गैस कटर का उपयोग करके टुकड़ों में काटा जाएगा और निकाला जाएगा। इसके बाद सेना, नौसेना, ‘रैट माइनर्स’ (पर्वतीय क्षेत्रों में हाथ से खुदाई करने में महारत रखने वाले विशेषज्ञ व्यक्तियों) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम अपनी सुरक्षा से समझौता किए बिना, लापता आठ लोगों को बचाने के लिए एक और गंभीर प्रयास करेंगी।
एक सवाल पर एसपी ने कहा कि वह इस बात का जवाब नहीं दे सकते कि फंसे हुए लोगों का आज पता चल पाएगा या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, सुरंग के काम में शामिल कुछ मजदूरों ने डर की वजह से जगह छोड़ने की बात कही है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि एसएलबीसी परियोजना पर 800 लोग काम कर रहे हैं, जिनमें से 300 स्थानीय हैं जबकि बाकी झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से हैं।
दुर्घटना के बाद मजदूरों के घबराने और उनके नौकरी छोड़ने की योजना के संबंध में मीडिया में आई खबरों पर अधिकारी ने कहा कि मजदूरों में कुछ आशंका होंगी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘कंपनी ने मजदूरों के लिए आवासीय शिविर भी बनाए हैं। कुछ लोगों में घबराहट होगी। हो सकता है कि कुछ लोग वापस जाना चाहें। लेकिन हमारे पास मजदूरों के सामूहिक रूप से काम छोड़ने की कोई खबर नहीं है।’’
एसएलबीसी सुरंग का एक हिस्सा 22 फरवरी को ढह जाने के बाद परियोजना पर काम कर रहे आठ कर्मचारी सुरंग के अंदर फंस गए थे।
इस बीच परियोजना स्थल पर उस समय काफी हंगामा हुआ जब बीआरएस विधायक टी हरीश राव और पार्टी नेताओं ने मांग की कि उन्हें सुरंग का दौरा करने की अनुमति दी जाए। हालांकि, पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया, जिसके चलते बीआरएस नेता सड़क पर बैठ गए।
बाद में पुलिस ने केवल छह नेताओं को ही सुरंग तक जाने दिया। मीडिया से बातचीत में हरीश राव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पिछले छह दिनों में उन आठ लोगों की जान बचाने के लिए कुछ नहीं किया।
आरोपों का खंडन करते हुए उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्षी पार्टी को सरकार की प्रतिबद्धता के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, ‘‘वे हर दिन कुछ मूर्खतापूर्ण बातें कहेंगे और ओछी राजनीति करेंगे।’’
फंसे हुए लोगों की पहचान मनोज कुमार (उत्तर प्रदेश), श्री निवास (उत्तर प्रदेश), सनी सिंह (जम्मू कश्मीर), गुरप्रीत सिंह (पंजाब) और संदीप साहू, जेगता जेस, संतोष साहू और अनुज साहू (सभी झारखंड के निवासी) के रूप में हुई है। इन आठ में से दो इंजीनियर, दो ऑपरेटर और शेष चार मजदूर हैं।
भाषा शोभना