‘गेनबिटक्वाइन’ घोटाला : सीबीआई ने 23.94 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की ‘क्रिप्टोकरेंसी’ जब्त की
राजकुमार अविनाश
- 26 Feb 2025, 09:12 PM
- Updated: 09:12 PM
नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने ‘गेनबिटक्वाइन’ घोटाला मामले में दो दिन चले देशव्यापी तलाशी अभियान के दौरान 23.94 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की ‘क्रिप्टोकरेंसी’ जब्त की है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने कई ‘हार्डवेयर क्रिप्टो वॉलेट’, 121 दस्तावेज, 34 लैपटॉप और ‘हार्ड डिस्क’, 12 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।
एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, ‘‘गेनबिटक्वाइन मामलों के संबंध में 25 और 26 फरवरी को देशभर में मारे गये छापों के बाद, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने....महत्वपूर्ण अभियोजन योग्य सामग्री (सबूत) और आभासी डिजिटल संपत्ति जब्त की है, जिससे क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी की सीमा का खुलासा होता है।’’
अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने धन की हेराफेरी तथा संभावित अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के बारे में और अधिक जानकारी हासिल करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेज दिया है।
सीबीआई ने घोटाले की जांच के तहत मंगलवार को दिल्ली, पुणे, नांदेड़, कोल्हापुर, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, मोहाली, झांसी और हुबली में 60 स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू किया था। यह अभियान बुधवार को समाप्त हुआ।
अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख वेबसाइट ‘डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट गेनबिटक्वाइन डॉट कॉम’ समेत कई वेबमंचों के माध्यम से यह पोंजी घोटाला किया गया और इसकी पूरी साजिश कथित रूप से अमित भारद्वाज (अब दिवंगत) और उसके भाई अजय भारद्वाज ने रची थी।
उन्होंने बताया कि 2015 में शुरू किया गया यह अवैध कारोबार ‘वेरिएबलटेक प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम से चल रहा था।
सीबीआई ने बताया कि इस योजना के तहत निवेशकों को 18 महीने की अवधि में बिटक्वाइन पर प्रति माह 10 प्रतिशत का रिटर्न देने का लालच दिया गया और उन्हें बाहरी ‘एक्सचेंज’ से डिजिटल मुद्रा खरीदने और ‘गेन बिटक्वाइन’ में जमा करने के लिए कहा गया।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह मॉडल बहु-स्तरीय विपणन (नेटवर्किंग मार्केटिंग-एमएलएम) संरचना पर काम करता था...उसमें भुगतान नए निवेशकों को शामिल करने पर निर्भर होता है।’’
प्रारंभिक दिनों में निवेशकों को ‘बिटक्वाइन’ में भुगतान मिलता था, जिससे यह एक आकर्षक उद्यम होने का भ्रम पैदा हुआ। हालांकि, 2017 तक नयी पूंजी का प्रवाह कम होने के साथ ही यह दिखावा (भ्रम) टूटने लगा।
बयान में कहा गया है, ‘‘घाटे की लीपापोती करने के प्रयास में, ‘गेनबिटक्वाइन’ ने एकतरफा ढंग से भुगतान को अपने कथित ‘इन-हाउस क्रिप्टोकरेंसी’ में बदल दिया, जिसका मूल्य ‘बिटक्वाइन’ की तुलना में काफी कम था। ऐसे में निवेशक और अधिक भ्रमित हो गए।’’
घोटाले के विशाल पैमाने और जटिलता के परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर से लेकर महाराष्ट्र और दिल्ली से लेकर पश्चिम बंगाल तक पूरे भारत में कई प्राथमिकियां दर्ज की गईं।
उच्चतम न्यायालय ने इस (अवैध कारोबार के) संचालन की व्यापक प्रकृति तथा इसके अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को देखते हुए इसकी जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी।
एजेंसी ने धोखाधड़ी की गतिविधियों की पूरी सीमा का पता लगाने, सभी संलिप्त पक्षों की पहचान करने और धनराशि का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है, जिसमें सीमा पार से आई धनराशि भी शामिल है।
भाषा
‘गेनबिटक्वाइन क्रिप्टोकरेंसी’
राजकुमार