उच्चतम न्यायालय ने बिहार विधान परिषद से राजद नेता सुनील कुमार सिंह का निष्कासन रद्द किया
देवेंद्र माधव
- 25 Feb 2025, 08:18 PM
- Updated: 08:18 PM
नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बिहार विधान परिषद के सदस्य तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता सुनील कुमार सिंह का, ‘‘अशोभनीय आचरण’’ के लिये सदन से निष्कासन मंगलवार को यह कहते हुये रद्द कर दिया कि यह सजा अत्यधिक है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि बिहार विधान परिषद (बीएलसी) को और अधिक उदार होना चाहिये था और कहा कि राजनीतिज्ञ का आचरण परिषद के सदस्य के लिए ‘‘अनुचित’’ था
पीठ ने 50 पृष्ठ के अपने फैसले में कहा, ‘‘रिकार्ड में प्रस्तुत सामग्री के आधार पर यह स्पष्ट है कि सदन में याचिकाकर्ता का आचरण घृणित था तथा विधानमंडल के सदस्य के अनुरूप नहीं था।’’
सिंह के आचरण के बावजूद, न्यायालय ने कहा कि संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सिद्धांतों के संरक्षक के रूप में सदन को उदारता दिखानी चाहिए और अपने सदस्यों के खिलाफ अनुचित टिप्पणियों से ऊपर उठना चाहिए।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘ऐसा करने से वे सहिष्णुता, संयम और संस्थागत परिपक्वता के गुणों का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे, जिससे उनके पद की गरिमा, निष्पक्षता और सम्मान को बल मिलेगा।’’
फैसले में कहा गया है कि सिंह के खिलाफ निर्धारित कार्रवाई से निश्चित रूप से बड़ी संख्या में हितधारकों, विशेष रूप से उन मतदाताओं पर सीधा और महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा जिन्होंने अपने प्रतिनिधि के रूप में उन पर विश्वास जताया है।
इसमें कहा गया है, ‘‘उनकी आवाज, आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों की अवहेलना नहीं की जा सकती है, और इन सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए मतदाताओं की जरूरतों और हितों को किसी भी निर्णय में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।’’
अदालत ने पिछले साल दिसंबर में निर्वाचन आयोग द्वारा जारी उस अधिसूचना को भी खारिज कर दिया, जिसमें सिंह की सीट पर उपचुनाव की घोषणा की गई थी।
पीठ ने सिंह को उनके ‘अशोभनीय’ आचरण के लिए पहले से ही बिताई गई अवधि के लिए निलंबन की सजा सुनाई और कहा कि वह निलंबन अवधि के लिए कोई पारिश्रमिक नहीं मांगेंगे।
सिंह को तत्काल प्रभाव से बीएलसी के सदस्य के रूप में बहाल करने का आदेश दिया गया।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता ऐसे अन्य भत्ते और विशेषाधिकारों का हकदार होगा, जो किसी अन्य समान पद पर नियुक्त एमएलसी को अपना पूर्ण कार्यकाल पूरा होने पर मिलते हैं। कार्यकाल के बाद लाभ के सीमित उद्देश्य के लिए, यदि कोई हो, तो याचिकाकर्ता को पूरे कार्यकाल के लिए एमएलसी के रूप में कार्य करने वाला माना जाएगा।’’
हालांकि, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सिंह ने बहाली के बाद अनुचित व्यवहार का प्रदर्शन किया तो आचार समिति या बीएलसी अध्यक्ष उचित कानूनी कार्रवाई करेंगे।
पिछले साल 26 जुलाई को, सिंह को सदन में उनके ‘अशोभनीय’ आचरण के लिए बिहार विधान परिषद से निष्कासित कर दिया गया था।
राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिवार के करीबी माने जाने वाले सिंह पर 13 फरवरी, 2024 को सदन में तीखी नोकझोंक के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप लगाया गया था।
आचार समिति की ओर से 2024 में परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश नारायण सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के एक दिन बाद, सिंह के निष्कासन का प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था।
सिंह पर ‘‘मुख्यमंत्री के हाव-भाव की नकल करके उनका अपमान करने’’ तथा आचार समिति के समक्ष उपस्थित होने के बाद उसके सदस्यों की योग्यता पर सवाल उठाने का भी आरोप लगाया गया था।
भाषा
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