सीजेआई चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस को विदाई दी, उन्हें उत्कृष्ट न्यायाधीश बताया
सुभाष माधव
- 09 Apr 2024, 08:55 PM
- Updated: 08:55 PM
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस को ‘‘उत्कृष्ट न्यायाधीश’’ और एक बंगाली ‘भद्रलोक’ बताते हुए मंगलवार को अपने सहकर्मी को विदाई दी।
न्यायमूर्ति बोस 24 मई 2019 को शीर्ष अदालत में न्यायाधीश के तौर पर पदोन्नत हुए थे। वह अब भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी में निदेशक के रूप में सेवा देने वाले हैं।
प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने न्यायमूर्ति बोस को शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘‘...अपने सहकर्मियों को विदाई देते समय हमेशा ही भावुक माहौल रहता है। यह क्षण एक साथ उनके ऐतिहासिक कार्यकालों पर नजर डालने और उनके यहां से जाने से उत्पन्न होने वाले खालीपन को महसूस करने का अवसर भी है।’’
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में, प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत, कलकत्ता उच्च न्यायालय और झारखंड उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति बोस के योगदान ने कानूनी परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति बोस एक बंगाली ‘भद्रलोक’ हैं और उनका स्वभाव एक अच्छे श्रोता एवं एक सच्चे बुद्धिजीवी का है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘न्यायमूर्ति बोस न केवल एक उत्कृष्ट न्यायाधीश रहे हैं, बल्कि 2004 में कलकत्ता उच्च न्यायालय में पदोन्नत होने से पहले, एक उम्दा वकील भी थे।’’ उन्होंने बोस को न्यायपालिका के आधुनिकीकरण में ‘अग्रणी’ भूमिका निभाने वाला न्यायाधीश बताया और कहा कि अपने पूरे करियर के दौरान उन्होंने प्रौद्योगिकी-अनुकूल न्यायपालिका की हिमायत की।
अपने संबोधन में, न्यायमूर्ति बोस ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ‘‘आधुनिक भारत का लघु रूप’’ है, जैसा कि किसी निर्णय पर पहुंचने के लिए न्यायाधीशों के बीच सोच में समानता से पता चलता है।
प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने याद किया कि कैसे 2012 में, कलकत्ता उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश के रूप में कार्यरत बोस ने चिकित्सा लापरवाही से संबंधित एक मामले में अमेरिका के एक वादी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश होने की अनुमति दी थी।
न्यायमूर्ति बोस ने कहा, ‘‘भारत में कानून के पेशे में महत्वपूर्ण बदलाव हो रहे हैं। और ये बदलाव बेहतरी के लिए हैं क्योंकि अब बड़ी संख्या में महिलाएं इस पेशे में हैं। संभवतः हमारा न्यायशास्त्र अब दुनिया में सबसे उन्नत है।’’
उनका जन्म 11 अप्रैल, 1959 को हुआ था। उनकी स्कूली शिक्षा कोलकाता के सेंट लॉरेंस हाई स्कूल से पूरी हुई और उन्होंने सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज से एलएलबी की उपाधि ली।
वकील के रूप में पंजीकरण कराने के बाद, बोस ने 1985 में कलकत्ता उच्च न्यायालय में संवैधानिक, नागरिक और बौद्धिक संपदा मामलों पर वकालत शुरू की।
जनवरी 2004 में उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया और 11 अगस्त, 2018 को उन्हें झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया था।
भाषा सुभाष