भारतीय भाषाओं के बीच कभी कोई वैर नहीं रहा, सभी ने एक-दूसरे को समृद्ध किया: प्रधानमंत्री
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र रंजन
- 21 Feb 2025, 10:19 PM
- Updated: 10:19 PM
नयी दिल्ली, 21 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाषा के आधार पर भेदभाव के प्रयासों पर करारा प्रहार करते हुए शुक्रवार को कहा कि भारतीय भाषाओं के बीच कभी कोई वैर नहीं रहा और सभी भाषाओं ने एक-दूसरे को समृद्ध किया है।
मोदी ने यहां 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मराठी को शूरता, वीरता, सौंदर्य, संवेदनशीलता और समानता के तत्वों को प्रतिबिंबित करने वाली एक संपूर्ण भाषा बताया।
उन्होंने ने कहा, ‘‘भारतीय भाषाओं में कभी कोई आपसी वैर नहीं रहा। भाषाओं ने हमेशा एक दूसरे को अपनाया है, एक दूसरे को समृद्ध किया है।’’
उन्होंने कहा कि कई बार जब भाषा के नाम पर भेद डालने की कोशिश की जाती है तो हमारी भाषाओं की साझी विरासत ही उसका सही जवाब देती है।
उन्होंने कहा, ‘‘इन भ्रमों से दूर रहकर भाषाओं को समृद्ध करना, उसे अपनाना हमारा सामाजिक दायित्व है। इसलिए आज हम देश की सभी भाषाओं को मुख्यधारा की भाषा की तरह देख रहे हैं। हम मराठी समेत सभी प्रमुख भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं।’’
प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे दिन आई है जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने दोहराया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पूरे देश में तीन-भाषा फार्मूला थोपने का एक प्रयास है।
मोदी ने कहा कि दुनिया की सबसे प्राचीन जीवंत सभ्यताओं में से एक है, क्योंकि हम लगातार विकसित हुए हैं, हमने लगातार नए विचारों को जोड़ा है और नए बदलावों का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज भारत, भारत में दुनिया की सबसे बड़ी भाषायी विविधता इसका प्रमाण है। हमारी ये भाषायी विविधता ही हमारी एकता का सबसे बुनियादी आधार भी है।’’
उद्घाटन समारोह में राकांपा प्रमुख शरद पवार, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, 98वें अखिल भारतीय मराठी सम्मेलन की अध्यक्ष और साहित्यकार तारा भावलकर समेत अन्य मौजूद थे।
राष्ट्रीय राजधानी में 71 साल के अंतराल के बाद तीन दिवसीय अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। पिछले साल बाद मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया था।
मोदी ने कहा, ‘‘मराठी एक सम्पूर्ण भाषा है, इसलिए...मराठी में शूरता भी है, वीरता भी है। मराठी में सौंदर्य है, संवेदना भी है, समानता भी है, समरसता भी है। इसमें अध्यात्म के स्वर भी हैं और आधुनिकता की लहर भी है। मराठी में भक्ति भी है, शक्ति भी है और युक्ति भी है।’’
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र