पीएम श्री स्कूल योजना लागू न करने से हो रहे नुकसान से लोग ‘स्तब्ध और नाराज’ : अन्नाद्रमुक
माधव
- 21 Feb 2025, 08:26 PM
- Updated: 08:26 PM
चेन्नई, 21 फरवरी (भाषा) अखिल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने शुक्रवार को कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह संकेत दिया है कि ‘पीएम श्री स्कूल पहल’ को तमिलनाडु में न लागू किए जाने से प्रदेश को पांच हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है और इससे राज्य के लोग ‘‘स्तब्ध और नाराज’’ हैं।
पलानीस्वामी ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा तमिलनाडु को दी जाने वाली एसएसए निधि को अचानक बंद किए जाने से लोगों में काफी आक्राश है क्योंकि इससे छात्रों और शिक्षकों को बहुत नुकसान होगा।
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र से त्रिभाषी नीति (विद्यालयों में छात्रों को हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा पढ़ाना) पर जोर दिए बिना शिक्षा क्षेत्र के लिए देय धनराशि जारी करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) को सार्वजनिक रूप से निरर्थक तर्क देने से बचना चाहिए और राज्य के हित में ‘अच्छे निर्णय’ के लिए केंद्र सरकार के साथ बातचीत करनी चाहिए।
पलानीस्वामी ने यहां जारी एक बयान में कहा कि कई मौकों पर इस मुद्दे को स्पष्ट किए जाने के बावजूद कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के कुछ खंड तमिलनाडु को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन फिर भी सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि तमिलनाडु बिना किसी बदलाव के एनईपी का पालन करे। अपनी द्विभाषी नीति के कारण शिक्षा क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने वाले तमिलनाडु पर त्रिभाषी नीति थोपने के केंद्र के प्रयास ने राज्य के लोगों में भय और भ्रम पैदा कर दिया है।
उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को राजभाषा अधिनियम 1963 से छूट दी है, जिससे राज्य में हिंदी लागू करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। आधिकारिक भाषा अधिनियम 1976 उक्त बात को स्पष्ट करता है, जिससे राज्य में तमिल और अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा के रूप में अनुमति मिल गई।
पलानीस्वामी ने कहा, ‘‘इसलिए तमिलनाडु के लिए इस समय त्रिभाषी नीति अनावश्यक है। अन्नाद्रमुक इस रुख पर अडिग है। मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि वह इस बात को समझे और तमिलनाडु पर त्रिभाषी नीति न थोपें।’’
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा एनईपी का पालन करने पर जोर देना और धनराशि जारी करने से इनकार करना ‘‘तमिलनाडु के छात्रों, शिक्षकों तथा जनता के साथ विश्वासघात करना माना जाएगा।’’
अन्नाद्रमुक के महासचिव ने कहा, ‘‘इसलिए मैं केंद्र सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह लोगों के हित में इस तरह के मनमाने तरीके को बदलें और तमिलनाडु सरकार द्वारा आपत्ति किए जाने वाले प्रावधानों पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद एक सहज निर्णय लें।’’
भाषा प्रीति